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NIRF Ranking में कैसे तय होती है किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी की रैंक? जानें इवैल्यूएशन का पूरा फॉर्मूला

आखिर किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज की NIRF रैंकिंग कैसे तय होती है और शिक्षा मंत्रालय इवैल्यूएशन के लिए कौन-सा फॉर्मूला अपनाता है. समझिए पूरा गणित...

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NIRF Ranking में कैसे तय होती है किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी की रैंक? जानें इवैल्यूएशन का पूरा फॉर्मूला

NIRF Ranking 2026 पर परखने का शिक्षा मंत्रालय का पैमाना क्या है? (Image: AI)

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NIRF Ranking 2026: शिक्षा मंत्रालय हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स के लिए जल्द ही नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2026 जारी कर सकता है. इस रैंकिंग में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को 16 कैटिगरी में परखा जाता है. इन कैटिगरी में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल, यूनिवर्सिटी, लॉ, रिसर्च और एग्रीकल्चर आदि पैमाने शामिल हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी NIRF 2026 की लिस्ट जारी करेंगे. पिछले साल इस रैंकिंग में एक नई कैटिगरी सस्टेनेबल डेवलेपमेंट गोल्स यानी सतत विकास लक्ष्य को जोड़ा गया था. 

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज की NIRF रैंकिंग कैसे तय होती है और शिक्षा मंत्रालय इवैल्यूएशन के लिए कौन-सा फॉर्मूला अपनाता है. आइए समझते हैं कि आखिर इस रैंकिंग में किसी भी इंस्टीट्यूट को कितने पैमानों पर परखा जाता है- 

NIRF Ranking 2026: क्या हैं वो 5 पैरामीटर्स?

एनआईआरएफ रैंकिंग में कॉलेजों और यूनिवर्सिटी का 5 अहम मापदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है. प्रत्येक मापदंड को शिक्षा मंत्रालय ने एक निश्चित वेटेज दिया हुआ है-

  • 1. टीचिंग, लर्निंग एंड रिसोर्सेस
  • 2. रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस
  • 3. ग्रेजुएशन आउटकम्स
  • 4. आउटरीच एंड इनक्लूसिविटी
  • 5. परसेप्शन

1. टीचिंग, लर्निंग एंड रिसोर्सेस

एनआईआरएफ रैंकिंग में टीचिंग, लर्निंग एंड रिसोर्सेस का वेटेज 30 प्रतिशत होता है. इस पैमाने में किसी इंस्टीट्यूट को छात्र-शिक्षक अनुपास, संकाय की योग्यता और संस्थान में उपलब्ध वित्तीय संसाधन और बुनियादी ढांचे के आधार पर परखा जाता है. आसान शब्दों में कहें तो यह पैमाना स्थान में पढ़ाई के स्तर और उपलब्ध संसाधनों की जांच करता है.

2. रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस

एनआईआरएफ रैंकिंग में रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस का वेटेज 30 प्रतिशत होता है. इस पैमाने पर इंस्टीट्यूट या कॉलेज को उसके शोध प्रकाशनों की संख्या, उनकी गुणवत्ता और पेटेंट के आधार पर परखा जाता है. आसान शब्दों में कहें तो यह पैमाना रिसर्च वर्क, पब्लिकेशन और उसकी गुणवत्ता को चेक करता है.

3. ग्रेजुएशन आउटकम्स

एनआईआरएफ रैंकिंग में ग्रेजुएशन आउटकम्स का वेटेज 20 प्रतिशत होता है. इसमें यूनिवर्सिटी एग्जाम के पास प्रतिशत, प्लेसमेंट और हायर एजुकेशन के लिए चुने गए छात्रों की संख्या व औसत वेतन के आधार पर इंस्टीट्यूट का आकलन किया जाता है. आसान शब्दों में कहें तो इस पैमाने में यह चेक किया जाता है कि स्टूडेंट्स ने कोर्स पूरा करने के बाद कैसा प्रदर्शन किया. 

4. आउटरीच एंड इनक्लूसिविटी 

एनआईआरएफ रैंकिंग में आउटरीच एंड इनक्लूसिविटी का वेटेज 10 प्रतिशत का होता है. इसमें कॉलेज या यूनिवर्सिटी में क्षेत्रीय विविधता यानी दूसरे राज्यों या देशों से आने वाले छात्रों का अनुपात, महिलाओं का प्रतिनिधित्व और आर्थिक रूप से कमजोर या दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाओं को देखा जाता है.

5. परसेप्शन

एनआईआरएफ रैंकिंग में  परसेप्शन का वेटेज 10 प्रतिशत होता है. इसमें इंस्टीट्यूट की अकादमिक पियर्स यानी साथी संस्थानों, एम्प्लॉयर्स और उद्योग जगत के बीच उस संस्थान की साख और प्रतिष्ठा पर परखा जाता है. यह पैमाना संस्थान की साख और उसकी सामाजिक-शैक्षणिक छवि पर आधारित है.

NIRF Ranking 2026: क्या होती है मूल्यांकन की प्रक्रिया?

सबसे पहले संस्थान निर्धारित फॉर्मेट में पिछले 3 साल का अपना डेटा NIRF पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करते हैं. फिर सबमिट किए गए डेटा की जांच एनआईआरएफ, थर्ड-पार्टी डेटाबेस और रैंडम चेकिंग के जरिए की जाती है.

इसके बाद ऊपर बताए गए पांचों मापदंडों के नंबरों को उसके तय वेटेज से गुणा करके 100 में से कुल एग्रीगेट स्कोर निकाला जाता है. इसके बाद शिक्षा मंत्रालय अलग-अलग कैटिगरी जैसे ओवरऑल, यूनिवर्सिटी, कॉलेज, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट आदि कैटिगरी में फाइनल लिस्ट जारी करता है. 

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