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Telegram Ban in India: भारत सरकार ने नीट यूजी के 21 जून को होने वाले रि-एग्जाम से पहले टेलीग्राम को बैन कर दिया है, ऐसे में जानिए इस मैसेजिंग ऐप का मालिक कौन है और कैसे इस ऐप को बनाने का उनके मन में आइडिया आया...
Telegram Ban in India: नीट यूजी के रि-एग्जाम से पहले बैन होने की वजह से टेलीग्राम भारत में चर्चा में आ गया है. इस पर मैसेजिंग ऐप के फाउंडर और सीईओ पावेल डुरोव ने कहा- 'इस फैसले से असल समस्या का समाधान तो नहीं होगा लेकिन लाखों आम यूजर्स को जरूर परेशानी उठानी पड़ेगी.' इन सभी बातों के बीच लोग जानना चाहते हैं कि आखिर टेलीग्राम का मालिक कौन है और इस ऐप के बनने की कहानी क्या है.
टेलीग्राम के फाउंडर और सीईओ पावेल दुरोव और उनके बड़े भाई निकोलई दुरोव की कहानी सिर्फ एक सफल टेक कंपनी बनाने की नहीं, बल्कि यह टेक्निकल इनोवेशन और बड़ा जोखिम उठाने की कहानी भी है. दोनों भाइयों ने ऐसे समय में दुनिया की सबसे पॉपुलर मैसेजिंग सर्विस में से एक टेलीग्राम खड़ा किया, जब डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी को लेकर दुनियाभर में बहस हो रही थी.
दुरोव फैमिली की जड़ें रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जुड़ी हुई हैं. इन भाइयों के पिता वालेरी दुरोव भाषाविज्ञान के जाने-माने प्रोफेसर रहे हैं. पिता के करियर की वजह से इस परिवार को कुछ समय इटली में भी बिताना पड़ा. यहां दोनों भाइयों को इंटरनेशनल माहौल में पढ़ाई का मौका मिला. बचपन से ही दोनों भाई मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में होशियार थे. निकोलई दुरोव को तो मैथ्स का जीनियस भी माना जाता है. उन्होंने इंटरनेशनल मैथेमेटिकल ओलंपियाड में रूस के लिए गोल्ड मेडल जीते और कंप्यूटर साइंस तथा क्रिप्टोग्राफी के फील्ड में भी अहम योगदान दिया.
दुरोव भाइयों के दादाजी सेम्योन पेत्रोविच तुल्याकोव आर्मी बैकग्राउंड से जुड़े थे. उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत सेना में सेवा दी थी और उन्हें अपनी बहादुरी के लिए कई मेडल भी मिले. ऐसे में इस परिवार में अनुशासन, साहस और आत्मनिर्भरता जैसे मूल्य पारिवारिक विरासत का हिस्सा बन गए.
जब सोवियत संघ का विघटन हुआ, तब यह परिवार रूस वापस लौट आया. उस समय पावेल की दिलचस्पी कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग में तेजी से बढ़ रही थी. यूनिवर्सिटी के पढ़ाई के दौरान उन्होंने सोशल नेटवर्किंग के महत्व को समझा और साल 2006 में रूस का लोकप्रिय सोशल नेटवर्क VKontakte (VK) लॉन्च किया. बहुत कम समय में VK रूस और कई पूर्व सोवियत देशों का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन गया. अपनी इस उपलब्धि की वजह से पावेल को रूस का मार्क जुकरबर्ग कहा जाने लगा.
लेकिन सफलता के साथ चुनौतियां भी आईं. पावेल दुरोव और रूस के अधिकारियों के बीच मतभेद बढ़ने लगे. समय के साथ कंपनी के नियंत्रण को लेकर भी विवाद बढ़ने लगता और साल 2014 में पावेल ने VK से अलग होने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने रूस छोड़ दिया और खुद को एक ग्लोबली स्थापित करने के रास्ते में आगे बढ़े.
टेलीग्राम की शुरुआत साल 2013 में हो चुकी थी. इस ऐप को बनाने के पीछे दोनों भाइयों का लक्ष्य यूजर्स की बातचीत को ज्यादा सुरक्षित और प्राइवेट रखने का था. जहां निकोलई ने टेलीग्राम के टेक्निकल स्ट्रक्चर और MTProto प्रोटोकॉल के विकास में अहम भूमिका निभाई, वहीं, पावेल ने इसके विस्तार और ग्लोबली इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया. धीरे-धीरे टेलीग्राम ने अपनी स्पीड, क्लाउड बेस्ड स्ट्रक्चर, लार्ज ग्रुप, चैनल और प्राइवेसी फीचर की वजह से दुनियाभर में पहचान बनाई. आज यह दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता है.