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लखनऊ के हिमांशु थपलियाल की कहानी काफी प्रेरणादायी है. उन्होंने साल 2023 में यूपीएससी की इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा में पहली रैंक हासिल करके इतिहास रच दिया था. पढ़ें उनकी सक्सेस स्टोरी
आपके जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न हो लेकिन अगर आपमें लगन और कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं. ऐसे लोग सिर्फ अपनी मंजिल को ही नहीं हासिल करते बल्कि बाकी लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन जाते हैं. लखनऊ के हिमांशु थपलियाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने साल 2023 में यूपीएससी की इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ईएसई) में पहली रैंक हासिल करके इतिहास रच दिया था.
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हिमांशु की कहानी रातोंरात मिली सफलता की कहानी नहीं है बल्कि उनकी सफलता यह दिखाती है कि आपको अपनी मंजिल हासिल करने के लिए निरंतर अपनी तैयारी को और पुख्ता करते रहना होगा. उत्तराखंड में जन्मे और लखनऊ में पले-बढ़े हिमांशु को जेईई में 5,83,000 रैंक मिली थी जो वास्तव में ऐसी शुरुआत नहीं थी जिसपर गर्व किया जा सके लेकिन उन्होंने कभी भी खुद में हीन भावना नहीं आने दिया. वह अपनी ही धुन में जमकर मेहनत करते रहे.
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उन्होंने पिथौरागढ़ में एनपीएसईआई से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक की पढ़ाई की. पढ़ाई पर पूरी तरह से फोकस रहने वाले हिमांशु ने इसके बाद गेट पास किया और NIT कर्नाटक के नैनोटेक्नोलॉजी कोर्स में एमटेक में एडमिशन पाया. एनआईटीके में बिताई अपनी जिंदगी के बारे में बात करते हुए हिमांशु ने बताया कि शुरू में यह समझना बेहद मुश्किल था कि मैं जीवन में आखिर करना क्या चाहता हूं. एनआईटीके ने मुझे काफी अच्छी दोस्ती दी और यहां आकर मैं अपने भविष्य को लेकर ज्यादा क्लियर हो पाया.
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हिमांशु के लिए यूपीएससी की ईएसई परीक्षा में पहली रैंक हासिल करना सिर्फ एक सपना नहीं था बल्कि यह भारतीय दूरसंचार सेवाओं में शामिल होने के उनके लक्ष्य की ओर एक कदम था. उन्होंने कहा, 'इस रैंक के साथ मैं आखिरकार उस लक्ष्य को हासिल कर सकता हूं. अब मेरा ध्यान सिस्टम को समझने और यह पहचानने पर है कि मैं कहां योगदान दे सकता हूं और समाज के लिए क्या कर सकता हूं.' हिमांशु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता लक्ष्मी और शंभू थपलियाल, अपने शिक्षकों और अपने दोस्तों को दिया. उनकी इस कहानी से लाखों युवा प्रेरित हो सकते हैं और अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं.
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