एजुकेशन
जब बार-बार नाकामी हाथ लगती है तो कई लोगों का मेहनत और अपनी काबिलियत पर से भरोसा डगमगा जाता है. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं तो सौमिल सक्सेना की कहानी आपका मन बदल देगी...
कहते हैं कि एक असफलता आपका भविष्य तय नहीं करती. लेकिन जब बार-बार नाकामी हाथ लगे तो कई लोगों का मेहनत और अपनी काबिलियत पर से भरोसा डगमगा जाता है. सौमिल सक्सेना की कहानी ऐसे ही दौर से निकलकर सफलता तक पहुंचने की कहानी है. उन्होंने देश की कई मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं में किस्मत आजमाई, लेकिन लंबे समय तक उन्हें वह नतीजा नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी.
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से लेकर आरबीआई ग्रेड बी, नाबार्ड ग्रेड ए, आईबीपीएस पीओ, एलआईसी एएओ और कैट तक, उन्हें एक के बाद एक कई परीक्षाओं में असफलता मिली. इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा.
दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई करने वाले सौमिल सक्सेना ने पांच साल तक अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने 2019 से 2022 के बीच सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की और 9.318 के स्कोर के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया. ग्रेजुएशन के बाद उनका बड़ा लक्ष्य सिविल सेवा और दूसरी सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं पास करना था. लेकिन शुरुआत के साल में उन्हें असफलता का मुंह देखना पड़ा.
साल 2022 से 2025 के बीच सौमिल ने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं. उनकी असफल कोशिशों में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के 2023, 2024 और 2025 के प्रयास शामिल रहे. इसके अलावा उन्होंने 2022 और 2023 में नाबार्ड ग्रेड ए, 2023 और 2024 में आरबीआई ग्रेड बी, 2023 में आरबीआई असिस्टेंट, एएआई जूनियर एग्जीक्यूटिव, यूपीएससी ईपीएफओ, आईबीपीएस पीओ, एलआईसी एएओ, एमपीपीएससी, एनआईएसीएल एओ और कैट जैसी परीक्षाएं भी दीं. लेकिन इन प्रयासों में उन्हें मनचाही सफलता नहीं मिली. यह सिलसिला उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि हर नतीजे के साथ उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ती थी.
इस बीच कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं में उन्हें कामयाबी भी मिली. साल 2023 में उन्होंने एसएससी सीजीएल और एसबीआई पीओ की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने एसबीआई में प्रोबेशनरी ऑफिसर के तौर पर जॉइन किया. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल में छत्तीसगढ़ के भिलाई के बाद मध्य प्रदेश के मक्सी में पीओ के पोस्ट पर काम करने का एक्सपीरियंस दर्ज है. उन्होंने बैंकिंग सेक्टर में करीब 2 साल तक तक काम किया. जहां सरकारी नौकरी मिलने को लोग प्रोफेशनल स्थिरता समझ लेते हैं. वहीं बैंक में नौकरी मिलने के बाद भी सौमिल ने अपने सपने को नहीं छोड़ा. उनके मन में मैनेजमेंट में पढ़ाई की इच्छा बनी रही.
एक तरफ वह फुल टाइम बैंकिंग जॉब कर रहे थे तो दूसरी तरह उनकी कैट की तैयारी जारी थी. नौकरी के साथ तैयारी के लिए समय निकालना आसान नहीं था. उन्होंने खुद अपनी तैयारी के बारे में बताया कि उन्हें सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी और बैंक में लंबे घंटों की नौकरी के बाद रात में पढ़ाई के लिए समय निकालना पड़ता था.
इससे पहले साल 2023 में उन्होंने कैट दिया था, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए थे. इसके बावजूद उन्होंने कैट की तैयारी दोबारा शुरू की. आखिरकार कैट 2025 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 99.86 पर्सेंटाइल हासिल किया. अब वह आईआईएम कलकत्ता से अपनी मैनेजमेंट की पढ़ाई करेंगे.
उनकी कहानी का सबसे बड़ा सबक है कि करियर हमेशा सीधी लाइन में आगे नहीं बढ़ता. कई बार जिस परीक्षा को हम अपनी जिंदगी का आखिरी लक्ष्य मान लेते हैं, उसमें सफलता नहीं मिलती तो इसका मतलब यह नहीं होता कि आगे के सारे रास्ते बंद हो गए. अपने एक्सपीरियंस को शेयर करते हुए सौमिल ने भविष्य के उम्मीदवारों को मैसेज दिया है कि इंसान तब तक नहीं हारता, जब तक वह खुद को हारा हुआ नहीं मान लेता.