एजुकेशन
भारत में कॉलेज और यूनिवर्सिटी की छात्राओं के लिए मेटरनिटी लीव को लेकर क्या कानून हैं? जान लीजिए यूजीसी गाइडलाइंस...
भारत में मेटरनिटी लीव के संबंध में कई नियम हैं जो आमतौर पर कामकाजी महिलाओं पर लागू होते हैं. लेकिन आपके दिमाग में भी यह सवाल जरूर आया होता कि आखिर कॉलेज और यूनिवर्सिटी की छात्राओं के लिए मेटरनिटी लीव को लेकर क्या कानून हैं. खासकर जो विवाहित हैं और पोस्टग्रेजुएशन या डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रही हैं , उन्हें मातृत्व अवकाश मिलता है या नहीं?
शिक्षा और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने के लिए अवकाश की अवधि और आवेदन करने के तरीके सहित उपलब्ध प्रावधानों को समझना आवश्यक है.
भारत में नौकरीपेशा महिलाओं को छह महीने का सवेतन मातृत्व अवकाश मिलता है लेकिन ये नियम स्वतः ही छात्राओं पर लागू नहीं होते. हालांकि छात्राओं के मातृत्व अवकाश की जरूरत को समझते हुए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी और कई राज्य सरकारों ने उनकी सहायता के लिए नीतियां शुरू की है.
यूजीसी महिला रिसर्चर्स (एमफिल और पीएचडी स्तर) को अपने पाठ्यक्रम के दौरान एक बार 240 दिन (लगभग 8 महीने) तक मातृत्व या शिशु देखभाल अवकाश लेने की अनुमति देता है. इसके अलावा यूजीसी ने यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स कर रहीं छात्राओं को मातृत्व अवकाश और उससे जुड़ी रियायतें देते का आग्रह किया है. जैसे-
-अटेंडेंट में छूट
- एग्जाम फॉर्म सबमिट करने की डेडलाइन में छूट
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था के कारण किसी छात्रा की शैक्षणिक प्रगति में बाधा या हानि न हो.
केरल सरकार की मेटरनिटी पॉलिसी लीव
केरल के राज्य यूनिवर्सिटी के विशिष्ट नियम हैं:
- 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की छात्राएं 60 दिन के मातृत्व अवकाश की हकदार हैं.
- उपस्थिति मानदंड को 75% से घटाकर 73% कर दिया गया है.
केरल यूनिवर्सिटी (तिरुवनंतपुरम) में एक विशेष आदेश के तहत छात्राओं को 6 महीने की छुट्टी के बाद दोबारा रजिस्ट्रेशन कराए बिना पढ़ाई फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते कि एक वैध मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए.
हरियाणा सरकार का प्रावधान (2017)
हरियाणा में विवाहित छात्रा 45 दिनों के मातृत्व अवकाश की हकदार हैं, बशर्ते वे निम्नलिखित दिशानिर्देशों का पालन करें:
- विभाग प्रमुख से पूर्व अनुमति
- वैध मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करे
- एक्स्ट्रा क्लासेस के माध्यम से कम अटेंडेंस को ठीक करे
- छूटी हुई परीक्षाओं को अलग से एग्जाम
छात्राओं के लिए मातृत्व अवकाश के प्रावधान समान शैक्षिक अवसरों को बढ़ावा देने और महिला सशक्तिकरण के लिए जरूरी हैं. छात्राओं को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक अवकाश लेने की अनुमति देकर संस्थान यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि प्रेग्नेंसी उनकी शैक्षणिक सफलता में बाधा न बने.
यह प्रक्रिया संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है लेकिन इसमें आम तौर पर निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
- अपने कॉलेज या यूनिवर्सिटी की मेटरनिटी लीव पॉलिसी की समीक्षा करें.
- अपने विभागाध्यक्ष या कॉलेज के प्रिंसिपल से परामर्श करें.
- किसी प्रमाणित डॉक्टर से मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करें.
- छुट्टी की तारीख और डॉक्यूमेंट्स के साथ एक औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करें.
- छुट्टी से वापसी की जरूरतों को स्पष्ट करें जैसे एक्स्ट्रा क्लास की जरूरतों और एग्जाम को रिशेड्यूल करने की तारीख के बारे में बताएं.
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