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पांशुल बंसल इस साल हुए नीट के पहले एग्जाम में 701 नंबर लाए थे और उन्हें पता था कि देश के बढ़िया सरकारी मेडिकल कॉलेज में उनका एडमिशन हो जाएगा. रि-नीट एग्जाम में तो उन्होंने इतिहास की रच दिया, जानें उनकी सक्सेस स्टोरी...
नीट यूजी 2026 में दूसरी रैंक हासिल करने वाले पांशुल बंसल का सपना बचपन से ही डॉक्टर बनने का था. वे एक कुशल सर्जन के रूप में लोगों की सेवा करना चाहते हैं. इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर उन्होंने लगातार मेहनत की और अपनी तैयारी में कभी ढिलाई नहीं बरती. रद्द होने से पहले हुए NEET UG 2026 एग्जाम में उन्होंने 701 नंबर हासिल किए थे. इतने नंबरों पर उन्होंने देश के बढ़िया सरकारी मेडिकल कॉलेज में आसानी से एडमिशन मिल जाता. बाद में हुए नीट के रि-एग्जाम में तो उन्होंने और बेहतर प्रदर्शन करते हुए दूसरी रैंक लाकर इतिहास ही रच दिया.
दिल्ली के कैलाश कॉलोनी में सोमरविले स्कूल के स्टूडेंट पांशुल बताते हैं कि 701 अंक मिलने के बाद उन्हें भरोसा था कि उनका दाखिला किसी अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज जैसे VMMC में हो सकता है. लेकिन दोबारा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करना उनके लिए भी उम्मीद से कहीं बड़ी उपलब्धि रही. उनका मानना है कि यह सफलता किसी एक दिन की मेहनत का नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार की गई पढ़ाई, अनुशासन और सही स्ट्रैटजी का नतीजा है.
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अक्सर ऐसा माना जाता है कि NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए दिन-रात सिर्फ पढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन पांशुल की तैयारी का तरीका इससे अलग था. उन्होंने पढ़ाई और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखा. उनका दिन सुबह करीब 6:30 बजे शुरू होता था. वे उठते ही पढ़ाई शुरू नहीं करते थे, बल्कि खुद को थोड़ा समय देते थे और फिर सुबह 9 बजे पूरे फोकस के साथ पढ़ाई शुरू करते थे.
दोपहर तक पढ़ाई करने के बाद वे आराम से लंच करते, फिर दोबारा पढ़ाई में जुट जाते. शाम को कुछ समय खेलने के लिए जरूर निकालते और रात में करीब एक घंटे रिवीजन करते थे. उनका कहना है कि उन्होंने तैयारी के दौरान परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना कभी नहीं छोड़ा क्योंकि इससे मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती थी.
पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपने शौक भी जारी रखे. जब तैयारी का दबाव बढ़ता था, तब वे पियानो बजाते, स्केटिंग करते, आउटडोर गेम्स खेलते और कभी-कभी वीडियो गेम भी खेलते थे. उनका मानना है कि लगातार पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे ब्रेक और अपने पसंदीदा काम दिमाग को तरोताजा रखते हैं. इससे दोबारा बेहतर एकाग्रता के साथ पढ़ाई की जा सकती है.
भविष्य के NEET उम्मीदवारों को सलाह देते हुए पांशुल कहते हैं कि सिर्फ किताबें पढ़ना ही काफी नहीं है. जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा सवालों की प्रैक्टिस करनी चाहिए और नियमित रूप से मॉक टेस्ट देना चाहिए. इससे अपनी कमजोरियों का पता चलता है और समय रहते उन्हें सुधारा जा सकता है. उनके अनुसार सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतरता है. वे कहते हैं कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती अपने नंबरों को लगातार उसी लेवल पर बनाए रखने की थी. वे इस बात पर ध्यान देते थे कि उनकी परफॉर्मेंस ऊपर-नीचे न हो और वह हर टेस्ट में बेहतर करने की कोशिश करते थे.
पांशुल की न्यूरोसर्जरी और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी में दिलचस्पी है. वह एम्स से मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं. उनका मानना है कि अगर मजबूत इरादे, सही रणनीति, नियमित अभ्यास और संतुलित दिनचर्या अपनाई जाए तो बड़ी से बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में भी शानदार सफलता हासिल की जा सकती है.