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NCERT की नई किताब में बदली मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल, सोशल मीडिया पर लोग बोले- 'सुधार की जरूरत कहीं और है'

सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे मशहूर कलाकृति मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल को एनसीआरटी की किताब में सेंसरशिप से गुजरना पड़ा है, जानें आखिर क्या है पूरा मामला और सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों का क्या रिएक्शन है...

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NCERT की नई किताब में बदली मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल, सोशल मीडिया पर लोग बोले- 'सुधार की जरूरत कहीं और है'

एनसीईआरटी के किताब की एक तस्वीर को लेकर मचा बवाल. (Image: Social Media)

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  • NCERT की किताब में की गई मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल पर सेंसरशिप
  • असली कांस्य प्रतिमा से अलग नजर आई किताब में छपी हुई तस्वीर
  • सोशल मीडिया पर लोग बोले- सुधार की जरूरत कहीं और है
  • लगभग 4,500 साल पुरानी है यह कांस्य प्रतिमा

सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे मशहूर कलाकृति मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल एक बार फिर से चर्चा में है. इस बार एनसीईआरटी की 9वीं कक्षा की किताब में इस कांस्य प्रतिमा को सेंशरशिप से गुजरना पड़ा है. आलोचकों का कहना है कि किताब में दिखाई गई तस्वीर असल वाली कांस्य प्रतिमा से अलग ही नजर आ रही है. किताब में छपी तस्वीर में प्रतिमा का ऊपरी हिस्सा ढका हुआ है जबकि असल प्रतिमा नग्न है. सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर पोस्ट की बाढ़ आई हुई है. लोग अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे की अच्छाई और बुराई गिनाने में लगे हुए हैं.

सोशल मीडिया पर लोगों का क्या है रिएक्शन?

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने लिखा कि देश में नीट पेपर लीक और सीबीएसई OSM जैसे जरूरी मुद्दे हैं और देश का शिक्षा मंत्रालय किसे प्राथमिकता दे रहा है? वहीं, एक और यूजर ने सवाल उठाया कि अगर हमें ऐसी चीजें असहज कर रही हैं तो क्या हमें प्राचीन मंदिरों की नक्काशी को आधुनिक नैतिकता के हिसाब से बदल देना चाहिए और खजुराहो की मूर्तियों को भी ढक देना चाहिए. 

यहां पढ़ें लोगों के रिएक्शन

आखिर क्या है पूरा मामला?

मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल की इस सेंसर्ड तस्वीर को कक्षा 9 की नई आर्ट्स की किताब मधुरिमा के शुरुआती चैप्टर हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स में शामिल किया गया है. जब इसकी तुलना मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली ओरिजनल कांस्य प्रतिमा की तस्वीरों से की गई तो लोगों ने कहा कि किताब में छपी हुई तस्वीर मूल कलाकृति से अलग दिखाई दे रही है. दिलचस्प बात यह है कि एनसीईआरटी की कक्षा 6 की सोशल साइंस की किताब में भी यही प्रतिमा अपने मूल स्वरूप के काफी करीब दिखाई दे रही है.

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मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल क्यों है खास?

मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली कलाकृति है. लगभग 4,500 साल पुरानी यह कांस्य प्रतिमा करीब 10.5 सेंटीमीटर ऊंची है. पुरातत्वविदों का मानना है कि इसे लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक से बनाया गया था. इस तकनीक को धातु ढलाई की एक प्राचीन और बेहद विकसित विधि मानी जाती है. प्रतिमा में एक किशोरी जैसी आकृति दिखाई देती है जिसके एक हाथ पर कई चूड़ियां हैं, गले में हार है और उसका एक हाथ कमर पर टिका हुआ है. उसकी मुद्रा आत्मविश्वास और सहजता को दिखाती है.

किताब में भी इस मूर्ति को मोहनजोदड़ो से मिली कांस्य प्रतिमा बताया गया है और इसे लगभग 2600 ईसा पूर्व का माना गया है. किताब में यह भी उल्लेख है कि यह प्रतिमा लॉस्ट वैक्स टेक्निक से बनाई गई थी. इस टेक्निक का इस्तेमाल आज भी भारत के कुछ हिस्सों खासतौर से पूर्वी और मध्य भारत के आदिवासी इलाकों में धातु शिल्प बनाने के लिए किया जाता है. एनसीईआरटी के किताब के मुताबिक, इस प्रतिमा में एक घुटना थोड़ा मुड़ा हुआ है, एक हाथ कमर पर रखा गया है और ठुड्डी ऊपर की ओर उठी हुई है जिससे उसमें आत्मविश्वास और गतिशीलता का भाव दिखाई देता है.

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डासिंग गर्ल पर विवाद बढ़ने पर NCERT ने क्या किया?

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी ने समीक्षा शुरू कर दी है. एनसीईआईटी के एक अधिकारी ने बताया कि इस विषय को संबंधित टेक्स्टबुक डेवलेपमेंट टीम के पास भेजा गया है और इसकी जांच की जा रही है. उन्होंने यह भी बताया के कक्षा 6 की सोशल साइंस की किताब में इस प्रतिमा की तस्वीर अपने मूल रूप के काफी करीब छपी हुई है. 

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