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फरीदाबाद के सक्षम गौतम ने CLAT UG 2025 में टॉप कर देशभर में मिसाल पेश की है. सक्षम ने आर्ट्स स्ट्रीम से 12वीं की पढ़ाई की और 98.6% अंक हासिल किए. पढ़ाई के लिए उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें आज ये सफलता दिलाई है.
CLAT 2025 Topper Saksham Gautam: क्लैट यूजी 2025 में टॉप करने वाले सक्षम गौतम की कहानी वाकई प्रेरणादायक है. यह सिर्फ एक परीक्षा में टॉप करने की कहानी नहीं है, बल्कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और आत्मनियंत्रण की मिसाल है. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सक्षम ने न सिर्फ दिन-रात मेहनत की, बल्कि कई बुरी आदतों और ध्यान भटकाने वाली चीजों से भी खुद को दूर रखा. उनका यह सफर हर उस छात्र के लिए सीख है, जो अपने सपनों को सच्चाई में बदलना चाहता है.
फरीदाबाद के सक्षम गौतम ने CLAT UG 2025 में टॉप कर देशभर में मिसाल पेश की है, जहां ज्यादातर छात्र इंजीनियरिंग या मेडिकल को ही करियर विकल्प मानते हैं, वहीं सक्षम ने 7वीं क्लास में ही तय कर लिया था कि वह कानून की राह चुनेंगे. एक इंजीनियर परिवार से आने के बावजूद उन्होंने पारंपरिक राह से हटकर सोचने का साहस किया.
सक्षम ने आर्ट्स स्ट्रीम से 12वीं की पढ़ाई की और 98.6% अंक हासिल किए. उन्होंने 11वीं से ही CLAT की तैयारी शुरू कर दी थी. शुरुआत में दिन के 2-3 घंटे पढ़ाई करते थे, लेकिन 12वीं में उन्होंने पढ़ाई को घंटों में नहीं की बल्कि टास्क में बांटा. हर रात यह सुनिश्चित करते कि दिन के सभी लक्ष्य पूरे हुए हों.
सक्षम को शुरुआत में पढ़ने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, जबकि CLAT में पैसेज आधारित प्रश्नों पर फोकस होता है. उन्होंने खुद को बदलते हुए अखबार पढ़ना शुरू किया, लंबे लेखों को समझना सीखा और अपनी सोचने-समझने की क्षमता को निखारा. यही बदलाव उनके सफलता की नींव बने.
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सक्षम मानते हैं कि कोचिंग सिर्फ दिशा दिखाती है, लेकिन रास्ता खुद तय करना होता है. मॉक टेस्ट उनके लिए तैयारी का आईना बने. लगातार प्रैक्टिस और खुद से प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने परीक्षा पैटर्न को बारीकी से समझा और खुद को बेहतर बनाया.
एक समय था जब सक्षम सोशल मीडिया के आदी थे. लेकिन जब उन्हें अहसास हुआ कि ये लत उनके करियर में बाधा बन रही है, तो उन्होंने ठान लिया, अब बदलाव ज़रूरी है. उन्होंने फोन से सोशल मीडिया ऐप्स डिलीट किए और पढ़ाई को प्राथमिकता दी.
CLAT टॉपर सक्षम गौतम का सपना सिर्फ कानून की पढ़ाई करना नहीं, बल्कि एक दिन देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद तक पहुंचना है. उनकी ये कहानी हर युवा के लिए एक संदेश है अगर संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता.
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