Advertisement

ज्यादा स्मार्ट लोग नहीं चाहिए! नौकरी मांग रहे छात्र ने पैसे पूछे तो बिफर गया CA, मैसेज में ही कर दिया रिजेक्ट

CA की पढ़ाई कर रहे एक छात्र को एक CA से ये पूछना भारी पड़ गया कि आर्टिकलशिप के दौरान कितने घंटे काम करना होगा और उसको स्टाइपेंड कितनी मिलेगी. CA छात्र ने रेडिट पर मैसेज का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया है.

Latest News
ज्यादा स्मार्ट लोग नहीं चाहिए! नौकरी मांग रहे छात्र ने पैसे पूछे तो बिफर गया CA, मैसेज में ही कर दिया रिजेक्ट
Add DNA as a Preferred Source

एक CA कंपनी ने एक छात्र को बिना सीवी और इंटरव्यू देखे ही रिजेक्ट कर दिया. रिजेक्ट करने के साथ-साथ उसे अपने हक के सवाल पूछने को लेकर शर्मिंदा करने की भी कोशिश की गई. छात्र ने रेडिट पर मैसेज का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया है. पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर CA फर्म की खासी आलोचना भी हो रही है.

पैसे पूछने पर ओवरस्मार्ट बता दिया

CA की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए तीन साल की आर्टिकलशिप जरूरी होती है. ये आर्टिकलशिप किसी CA फर्म में या किसी किसी प्रैक्टिसिंग CA के साथ करनी ज़रूरी होती है. इसी आर्टिकलशिप के लिए छात्र ने एक CA से संपर्क किया. उसने पहले मैसेज में पूछा कि क्या उनके पास आर्टिकलशिप के लिए वेकेंसी है? इस पर हां में जवाब आया और छात्र से कहा गया कि वो कंपनी के ऑफिस में आ जाए और अपना सीवी भेज दे. सीवी भेजने से पहले छात्र ने पूछ लिया कि आर्टिकलशिप के दौरान उसके काम के घंटे क्या होंगे और उसे स्टाइपेंड के तौर पर कितने पैसे मिलेंगे. इस पर जवाब आया- तुम मत आओ. ओवर स्मार्ट लोगों की ज़रूरत नहीं है. 

Reddit post Screenshot

चैट के स्क्रीनशॉट के साथ छात्र ने लिखा,'मैंने अपनी टाइमिंग और स्टाइपेंड के बारे में पूछा तो मुझे ओवरस्मार्ट बता दिया. ऐसा क्यों? अगर मेरी टाइमिंग एडजस्टेबल नहीं है तो मैं वहां जाने और इंटरव्यू में अपना टाइम वेस्ट क्यों करूंगा. इसकी जगह मैं उन फर्म्स में जाऊंगा जहां मेरी टाइमिंग एडजस्टेबल होगी. मैं उस फर्म का समय भी बचाने की कोशिश कर रहा था. पर ऐसा बर्ताव फर्म की छवि को नुकसान पहुंचाता है. इस तरह का रवैया रखने वाले आर्टिकल्स का शोषण करते हैं.'

सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

इस पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा,'भारतीय वोकैब्युलरी में ओवरस्मार्ट एक ऐसा शब्द है जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भ्रष्ट लोग करते हैं, वो लोग जो सही सवालों के जवाब देने से डरते हैं.'

एक यूजर ने लिखा कि टाइम की बात ठीक है, पर स्टाइपेंड तो इंटरव्यू के बाद ही तय होता है. उसके बाद आप तय कर सकते थे कि आपको जॉइन करना है या नहीं. इस पर एक यूजर ने पूछा, "ऐसा क्यों? जब कंपनी हमसे हर चीज़ पूछती है और सीवी देखकर हमें शॉर्टलिस्ट करती है. तो सामने से स्टाइपेंड बताने में क्या आपत्ति है. स्टूडेंट भी स्टाइपेंड और टाइमिंग के आधार पर अपनी शॉर्टलिस्टिंग कर सकते हैं. इससे समय बचेगा. अगर कंपनी को ऐसा नहीं लगता है तो ये हिपोक्रेसी है. नेगोशिएशन एक चीज़ है, पर स्टाइपेंड रेंज न बताना अनुचित है... सबसे ज़रूरी बात, मैसेज से ही समझ में आ रहा है कि कंपनी में प्रोफेशनलिज़्म की कमी है."

कंपनी की तरफ से किए गए मैसेज में अंग्रेज़ी की गलती थी. You don't come को you dont come लिखा गया था, इसे हाईलाइट करते हुए एक यूजर ने लिखा- भाई मैं ऐसे HR के साथ काम करना चाहूंगा. कभी मेरी बेइज्जती करेगा या करेगी तो मैं पास्ट टाइम में जाकर उसकी इंग्लिश करेक्ट करूंगा.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement