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आईएएस मनीष कुमार की सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरणा देती है जो प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं लेकिन यूपीएससी पास करके समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं. जानें नोएडा के डीएम की सक्सेस स्टोरी...
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है. कई युवा इसकी तैयारी में सालों लगा देते हैं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती. वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जॉब के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी करते रहते हैं और आखिरकार अच्छी रैंक के साथ इस एग्जाम को क्रैक करते हैं. आईएएस मनीष कुमार वर्मा की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
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मनीष कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म 24 अगस्त 1984 को हुआ और बचपन से ही वह ब्राइट स्टूडेंट रहे हैं. आईआईटी कानपुर से उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है और उसके बाद जेएनयू से एमए और एमफिल की पढ़ाई की. पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में भी काम किया. जब वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे, उस दौरान वह ड्यूश बैंक नाम की एक इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म जॉब करते थे.
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जॉब करते-करते ही उनके मन में यूपीएससी की तैयारी का ख्याल आया और वह पूरी मेहनत और लगन से इसमें जुट गए. साल 2011 में उन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 61वीं रैंक के साथ पास की. उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा को चुना और उनकी पहली पोस्टिंग पीलीभीत में प्रोबेशनरी डीएम के तौर पर हुई. इसके बाद वह मथुरा और प्रतापगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी बने. फिलहाल वह उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा जिले के डीएम हैं.
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आईएएस मनीष कुमार की सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरणा देती है जो प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं लेकिन यूपीएससी पास करके समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं. उनकी कहानी यह दिखाती है कि अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो आपको कोई भी परिस्थितियां रोक नहीं सकतीं. आप अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से वो मुकाम हासिल कर सकते हैं, जिसका आपने सपना देखा होता है.
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