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चलना-फिरना दूभर फिर भी नहीं मानी हार... ऑटो चालक के दिव्यांग बेटे का कमाल, आईआईटी मद्रास में ऐसे बनाई जगह

स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी और सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे 17 साल के जे संतोष की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा है. जानें कैसे उन्होंने आईआईटी मद्रास में बनाई अपनी जगह...

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चलना-फिरना दूभर फिर भी नहीं मानी हार... ऑटो चालक के दिव्यांग बेटे का कमाल, आईआईटी मद्रास में ऐसे बनाई जगह

जे संतोष ने बीमारी से नहीं मानी हार, आईआईटी मद्रास में जगह की पक्की. (Image Credit: IIT Madras)

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जिंदगी में अक्सर छोटी सी परेशानी आते ही लोग हिम्मत हार बैठते हैं. लेकिन स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी और सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे 17 साल के जे संतोष की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा है. स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी एक जेनेटिक बीमारी है, जो शरीर के मोटर न्यूरॉन्स पर असर डालती है. इससे मांसपेशियां बेहद कमजोर हो जाती हैं और इंसान का चलना-फिरना और खुद से बैठ पाना भी कठिन हो जाता है. 

आईआईटी मद्रास के खास कोर्स में संतोष को मिला दाखिला

उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद संतोष ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज आईआईटी मद्रास में एडमिशन हासिल कर लिया है. संतोष अब आईआईटी मद्रास के डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस में 4 साल के ऑनलाइन बैचलर्स ऑफ साइंस डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करेंगे. 

पिछले साल स्कूल की तरफ से आयोजित आईआईटी मद्रास की एक ट्रिप छूट जाने के बाद उन्होंने ठान लिया था कि वे इस प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट का हिस्सा बनेंगे. संतोष ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर दूसरे प्रयास में इसके क्वालिफायर एग्जाम को पास कर लिया. वे अपनी पूरी क्लास से इस बीएस प्रोग्राम में जगह बनाने वाले एकमात्र स्टूडेंट हैं.

ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते हैं पिता

संतोष के पिता ऑटो रिक्शा चलाकर अपना घर चलाते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले संतोष के लिए आईआईटी मद्रास में एडमिशन पाना किसी उपलब्धि से कम नहीं है. उन्हें इस प्रोग्राम की जानकारी टीएन वॉलंटियर्स नाम के एनजीओ से मिली थी. अपनी शारीरिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने एक ऐसा कोर्स चुना, जिसकी पढ़ाई घर बैठे ही पूरी की जा सके. 

आईआईटी-एम फॉर ऑल पहल के तहत इस एनजीओ ने संतोष को शुरुआती चरणों में व्यक्तिगत सहायता और एआई की ट्रेनिंग दी है. इसके साथ ही एनजीओ उनके पहले साल की ट्यूशन फीस का खर्च भी उठा रहा है. संतोष के जज्बे को सलाम करते हुए आईआईटी मद्रास ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर उनकी कहानी शेयर की है. 

आईआईटी मद्रास ने शेयर की सफलता की कहानी

आईआईटी मद्रास ने लिखा कि सपने हमेशा आसान रास्तों से पूरे नहीं होते, लेकिन मजबूत इरादे आपको मंजिल तक पहुंचा ही देते हैं. संतोष आईआईटी मद्रास से यह खास कोर्स पूरा करने के बाद आईटी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं. उनकी यह सफलता साबित करती है कि अगर इंसान के पास दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची लगन हो, तो कोई भी बीमारी या मजबूरी उसकी राह का रोड़ा नहीं बन सकती.

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