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डिलीवरी बॉय से सिविल सर्वेंट बनने तक का 'जज्बाती सफर', हालात से लड़कर यूं अफसर बने राजेश रजक

आज हम आपको ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने खराब हालात से हार नहीं मानी, स्कूल में पढ़ाया, डिलिवरी बॉय का काम किया लेकिन अपनी मंजिल को पाने के लिए लगातार कोशिश करते रहे, जानें झारखंड के राजेश रजक की सफलता की कहानी...

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डिलीवरी बॉय से सिविल सर्वेंट बनने तक का 'जज्बाती सफर', हालात से लड़कर यूं अफसर बने राजेश रजक

Rajesh Rajak JPSC

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मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. यह लाइन झारखंड के राजेश रजक पर एकदम सटीक बैठती हैं. कभी अपनी पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने के लिए उन्होंने डिलिवरी बॉय का काम किया था और आज उनके सपने साकार हो चुके हैं. उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में झारखंड सिविल सेवा की परीक्षा में 271वीं रैंक हासिल की है. 

कम उम्र में छूटा पिता का साथ तो स्कूल में पढ़ाकर की पढ़ाई

राजेश रजक का सफर कभी भी आसान नहीं रहा. 12वीं कक्षा की परीक्षा पास करने के तुरंत बाद ही उनके पिता का निधन हो गया. ऐसे में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें एक प्राइवेट स्कूल में भी काम करना पड़ा. राजेश रजक ने एक इंटरव्यू में बताया, 'चूँकि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए मुझे स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के लिए एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक की नौकरी करनी पड़ी. मेरे ग्रेजुएट होने के बाद दुनिया कोविड-19 की चपेट में आ गई. यह मेरे जीवन के लिए अहम मोड़ साबित हुआ.

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लॉकडाउन ने बदल दिया पूरा जीवन

राजेश लॉकडाउन के दौरान रांची वापस आ गए और अपने परिवार का पेट पालने के लिए डिलिवरी बॉय का काम करने लगे. उनके मन में कहीं न कहीं यह बात थी कि जिंदगी पूरी तरह से बर्बाद होने से पहले उन्हें कुछ करना है. जिस लॉज में वह ठहरे थे वहां किसी न किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स का जमावड़ा लगा रहता था जिससे उनके मन में भी पढ़ाई की ललक बनी रही.

डिलिवरी बॉय की नौकरी छोड़ की तैयारी

इसके बाद जब झारखंड सिविल सेवा परीक्षा का नोटिफिकेशन निकला तो उन्होंने डिलिवरी बॉय की नौकरी छोड़ दी और पूरी लगन से अपनी तैयारी में जुट गई. लेकिन इतनी आसानी से कहां सफलता मिलने वाली थी. उन्होंने प्रीलिम्स की परीक्षा तो पास कर ली लेकिन मेन्स में बेहद कम अंतर से पिछड़ गए. हालांकि उन्होंने अपने आत्मविश्वास को गिरने नहीं दिया. 

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यूं मिली सफलता

उन्होंने खुद से वादा किया कि वह अपने आप को दोबारा मौका जरूर देंगे. इस बार जेपीएससी की परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 271वीं रैंक के साथ इसमें सफलता हासिल की. वह कहते हैं कि अगर उन्हें अपनी नौकरी से समय मिला तो वह और बेहतर रैंक के लिए जरूर कोशिश करेंगे. फिलहाल जेल सेवा के लिए उनका सिलेक्शन हुआ है. उनकी सफलता की कहानी आज हजारों लोगों को प्रेरित कर रही है. अगर कुछ कर गुजरने का ठान लिया जाए तो ऐसी कोई मंजिल नहीं है जिसे हासिल न किया जा सके.

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