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JEE का सपना टूटने पर ऐसे खोजी IIT में पढ़ाई की नई राह, अब बेंगलुरु में AI इंजीनियर बन उठा रहीं मोटी सैलरी

आज हम आपको उस लड़की की कहानी बताने वाले हैं जिन्होंने आईआईटी से पढ़ाई के लिए जेईई क्रैक करने का सपना देखा था लेकिन कोविड ने उनके इस सपने पर पानी फेर दिया, जानें फिर कैसे प्रज्ञा सिंह ने हासिल की अपनी मंजिल...

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JEE का सपना टूटने पर ऐसे खोजी IIT में पढ़ाई की नई राह, अब बेंगलुरु में AI इंजीनियर बन उठा रहीं मोटी सैलरी

बिना जेईई कैसे आईआईटी पहुंचीं प्रज्ञा सिंह? (Image Credit: Pragya Singh Linkedin)

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अधिकतर स्टूडेंट्स को यह लगता है कि आईआईटी में पढ़ाई का सपना सिर्फ एक एग्जाम से पूरा हो सकता है. और वह परीक्षा है जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम या जेईई. लेकिन प्रज्ञा की कहानी यह नजरिया बदल देती है और यह दिखाती है कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता एक से ज्यादा हो सकता है. कोविड 19 महामारी ने प्रज्ञा सिंह के जेईई एग्जाम की योजना पर पानी फेर दिया था. उस दौरान वह मलेशिया में थीं और महामारी के चलते वह जेईई एग्जाम नहीं दे पाई थीं. लेकिन उन्होंने अपने आईआईटी में पढ़ाई के सपने को नहीं छोड़ा और इसके लिए एक दूसरा रास्ता खोज निकाला.

आईआईटी मद्रास में एडमिशन का प्रज्ञा ने कैसे पूरा किया सपना?

साल 2021 में प्रज्ञा ने आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम इन डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस में दाखिला लिया. चार साल बाद उन्होंने अपनी डिग्री पूरी की और अब वह बेंगलुरु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं. हाल ही में आईआईटी मद्रास बीएस प्रोग्राम की टीम ने उनकी कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की और बताया कि भले ही जेईई की योजना पूरी नहीं हो पाई, लेकिन प्रज्ञा ने अपने आईआईटी के सपने को नहीं छोड़ा. संस्थान का यह भी कहना था कि सिर्फ जेईई का रिजल्ट किसी के भविष्य को तय नहीं करता, बल्कि उसका पूरा सफर मायने रखता है.

प्रज्ञा की यह कहानी उन स्टूडेंट्स के लिए बेहद प्रासंगिक है जो पारंपरिक जेईई मार्ग से सफलता न मिलने को अपने आईआईटी के सपनों का अंत मान लेते हैं. आईआईटी मद्रास का बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस प्रोग्राम भारत के इस प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिले का एक वैकल्पिक रास्ता देता है. यह प्रोग्राम फाउंडेशन, डिप्लोमा, बीएससी और बीएस डिग्री, इन चार लेवल पर बंटा हुआ है और स्टूडेंट्स किसी भी लेवल पर प्रोग्राम छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं. इसका फ्लेक्सिबल लर्निंग मॉडल अलग-अलग एजुकेशनल बैकग्राउंड से आने वाले स्टूडेंट्स के लिए खुला है जो जरूरी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, फिर चाहे उन्होंने जेईई क्वालिफाई किया हो या नहीं.

सिर्फ डिग्री नहीं, इंटर्नशिप के जरिए लिया इंडस्ट्री का अनुभव

प्रज्ञा का सफर सिर्फ आईआईटी की डिग्री तक ही सीमित नहीं रहा. पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप के जरिए इंडस्ट्री का अनुभव भी हासिल किया. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, साल 2023 में उन्होंने न्यूट्रिनेशन में डेटा साइंस इंटर्न के तौर पर काम किया, जहां उन्होंने रिट्राइवल ऑगमेंटेड जनरेशन और वेक्टर डेटाबेस जैसी तकनीकों पर काम सीखा.

इसके बाद जनवरी से अक्टूबर 2024 तक उन्होंने Fiery में भी डेटा साइंस इंटर्न के तौर पर काम किया. यहां उन्होंने रिट्राइवल ऑगमेंटेड जनरेशन एप्लीकेशन, इंटेंट रिकग्निशन एप्लीकेशन और एक होम डेकोर से जुड़ी एप्लीकेशन पर काम किया. इन दोनों इंटर्नशिप ने उन्हें उन तकनीकों पर काम करने का मौका दिया जो आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंडस्ट्री को आकार दे रही हैं. इसके बाद वह अब बेंगलुरू की कंपनी Cyncly में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं.

प्रज्ञा की कहानी यह साबित करती है कि हमें अपने सपने कभी नहीं छोड़ने चाहिए. कई बार हमें लगता है कि मंजिल तक पहुंचने का सिर्फ एक ही रास्ता है, लेकिन असल में रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, बस हमें उन्हें थोड़ा एक्सप्लोर करने की जरूरत है. कहते भी हैं जहां चाह वहां राह.

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