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Delhi World Book Fair 2024: 40 देशों के 1000 से ज्यादा प्रकाशक, क्षेत्रीय भाषाओं की भी किताबें मेले में

Delhi World Book Fair 2024: पुस्तकों के इस महाकुंभ में 40 से ज्यादा देशों के प्रकाशक और प्रतिनिधि आएंगे. इस बार 1000 से अधिक प्रकाशक इसमें शामिल हो रहे हैं. इस बार पुस्तक मेले में क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकें और द्विभाषी पुस्तकें भी होंगी.

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Delhi World Book Fair 2024: 40 देशों के 1000 से ज्यादा प्रकाशक, क्षेत्रीय भाषाओं की भी किताबें मेले में

दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2024 का उद्घाटन 10 फरवरी को.

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नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 10 फरवरी से पुस्तक प्रेमियों का महाकुंभ शुरू हो जाएगा. कल सुबह इस मेले का उद्घाटन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे. उद्घाटन सत्र के सारे कार्यक्रम भारत मंडपम में किए जाएंगे. ये जानकारियां नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) ने दीं.
एनबीटी ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा पुस्तक मेला होगा. इसमें 40 देशों के 1000 से अधिक प्रकाशक आ रहे हैं. यहां लगभग सभी विषयों पर विभिन्न भाषाओं में पुस्तकें उपलब्ध होंगी. इस बार पुस्तक मेले में द्विभाषी पुस्तकों के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकें भी होंगी. 'बुक्स फॉर ऑल' के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सहयोग से यूआईडी दिखाने पर दृष्टिबाधित पाठकों को ब्रेल पुस्तकें नि:शुल्क मुहैया करवाई जाएंगी.

इस बार पुस्तक मेले में अहमदाबाद साहित्य महोत्सव, सिनेमा दरबार, भारत साहित्य महोत्सव, प्रगति विचार इन सभी के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है. वे विश्व पुस्तक मेले के मंच से साहित्यिक, सांस्कृतिक ​गतिविधियां आयोजित कर सकते हैं और पुस्तकों का विमोचन भी. विश्व की लगभग सभी भाषाओं के प्रतिनिधियों की मौजूदगी होगी यहां.

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किस हॉल में कैसी किताबें

प्रगति मैदान के हॉल संख्या 1 से 5 में आयोजित इस पुस्तक मेले में पाठकों को हॉल 1 में विज्ञान, मानविकी और दर्शन की पुस्तकें मिलेंगी. हॉल 2 में लेखक मंच बनाया गया है, जहां भारतीय भाषाओं के लेखक विभिन्न साहित्यिक विषयों, पुस्तकों और विधाओं पर बातचीत करेंगे. हॉल 3 बच्चों के लिए है, जिसमें बच्चों से जुड़े हर विषय की पुस्तकें, स्टेशनरी, कला और शिल्प आदि सामग्री उपलब्ध होगी. हॉल 4 में अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां आयोजित होंगी जबकि हॉल 5 थीम मंडप का है.

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भाषाओं का साहित्यिक जश्न

इस बार की थीम है 'बहुभाषी भारत : एक जीवंत परंपरा'. थीम पर एनबीटी के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा कि अनुसूची 8 में 22 भाषाएं बताई गई हैं, लेकिन भारत में भाषाओं-बोलियों की कोई सीमा नहीं. भारतीय भाषाओं में पूरे विश्व का ज्ञान मिल जाता है. इसमें साहित्य की अहम भूमिका है. इस बार के विश्व पुस्तक मेले में भाषाओं का साहित्यिक जश्न मनाया जाएगा. सऊदी अरब का साहित्य भी यहां उपलब्ध होगा.

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