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World Hindi Day: Google पर भी नहीं मिलेगा हिंदी के इन कठिन शब्दों का सही अर्थ

हिंदी के कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका अर्थ आपको Google पर भी नहीं मिलेगा.

World Hindi Day: Google पर भी नहीं मिलेगा हिंदी के इन कठिन शब्दों का सही अर्थ
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डीएनए हिंदी: भारतीयों के लिए हिंदी एक भाषा नहीं एक भावना है. भारत 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाता है लेकिन 10 जनवरी साल 1975 को पहली बार विश्व हिंदी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था जिसके चलते उस दिन को याद करते हुए दुनिया आज यानी 10 जनवरी को ही ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाती है. हिंदी अपने आप में एक वृहद स्तर की भाषा है. हिंदी की दुनिया इतनी बड़ी है कि दुनिया भर का ज्ञान देने का दावा करने वाले Google को भी हिंदी के कुछ शब्दों का मतलब नहीं पता है.

Google को भी नहीं पता इनका मतलब 

आम तौर पर यदि आप किसी भी चीज की जानकारी चाहते हैं तो उसे Google पर चेक करके देखते हैं लेकिन कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका अर्थ Google को भी नहीं पता है. उन शब्दों की सूची यहा दी गई है. 

  • क्लिष्ट - कठिन
  • अट्टालिका - किसी उंच्ची इमारत का ऊपरी कक्ष या हिस्सा
  • तारतम्य - किसी घटना या क्रम की आवृत्ति
  • अक्षुण्ण - जिसके टुकड़े करना संभव ना हो
  • कृतघ्न - उपकार ना मानने वाला
  • तरणि  - नौका
  • अक्षुण्ण- जिसके टुकड़े करना संभव ना हो  
  • वसन- कपड़ा  
  • नश्वरता- नाशवान
  • यत्किंचित- थोड़ा बहुत 
  • प्रगल्भ- चतुर, होशियार 
  • चरायंध- दुर्गंध 
  • स्वैराचार- स्वेच्छाचार   
  • वात्याचक्र- भंवर
  • श्लाघ्य- प्रशंसनीय 
  • निर्निमेष- अपलक देखना 
  • मंदर- पर्वत 
  • भित्ति- दीवार
  • व्याधि- बीमारी 
  • स्वेद- पसीना 
  • प्राकार- चारदीवारी 
  • अभिराम- मनोहर 
  • सुरभित- सुगंधित
  • क्षीणवपु- कमजोर


ये ऐसे शब्द हैं जिनका सटीक अर्थ Google को भी नहीं पता है. ये बताता है कि हिंदी किस विराट स्तर की भाषा है. गौरतलब है कि हिंदी दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. भारत के अलावा पाकिस्तान, अमेरिका, मॉरिशस, बांग्लादेश, फिजी, थाईलैंड, सिंगापुर और साउथ अफ्रीका समेत 30 से ज्यादा देशों में हिंदी का अस्तित्व है. वहीं भारत की 43 प्रतिशत से अधिक आबादी हिंदी बोलती है.

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