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Pandit Ravi Shankar : वह महान संगीतज्ञ जिसके बनाए Orchestra से आज भी चलते हैं हज़ारों घर

भारतरत्न पंडित रविशंकर को उस कलाकार के तौर पर देखा जाता है जिन्होंने पश्चिमी दुनिया में भी भारतीय राग और सुर की ख़ुशबू बिखेर दी थी.

Pandit Ravi Shankar :  वह महान संगीतज्ञ जिसके बनाए Orchestra से आज भी चलते हैं हज़ारों घर
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डीएनए हिंदी : भारत के सफलतम संगीतज्ञों की हर सूची में पंडित रविशंकर का नाम अव्वल आएगा. पांच ग्रैमी पुरस्कार जीत चुके संगीत के यह विशारद जीवित होते तो इस 7 अप्रैल को 102 साल के हो जाते. भारतरत्न पंडित रविशंकर को उनकी अपूर्व प्रतिभा के साथ उस कलाकार के तौर पर देखा जाता है जिन्होंने पश्चिमी दुनिया में भी भारतीय राग और सुर की ख़ुशबू बिखेर दी थी. 

बीसवीं सदी के सबसे प्रभावी संगीतज्ञों में  एक 
पंडित रविशंकर(Pandit Ravishankar) को बीसवीं सदी में दुनिया भर के सबसे प्रभावी संगीतज्ञों में एक माना जाता रहा है. रविशंकर मैहर घराने के संस्थापक अल्लाउद्दीन खान के शिष्य थे. अल्लाउद्दीन खान मैहर दरबार के मुख्य सरोद वादक थे. 1934 में रविशंकर अल्लाउद्दीन खान से मिले और तब ही तय कर लिया कि वे अल्लाउद्दीन खान के शिष्य बनेंगे. 

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बड़े भाई उदय शंकर भी थे संगीत साधक 
पंडित रविशंकर(Pandit Ravishankar) के बड़े भाई उदय शंकर मशहूर शास्त्रीय नर्तक थे. उनके बारे में कहा जाता है की उन्होंने भारतीय नृत्य कला और यूरोपीय नर्तन तकनीक के सम्मिश्रण से नई नृत्य परम्परा की शुरुआत की थी. इसे फ्यूजन कहा गया था. रविशंकर अपने गुरु अल्लाउद्दीन खान से भाई उदय शंकर के ट्रूप के माध्यम से ही मिले थे. 

अपने गुरु के दामाद भी थे पंडित रविशंकर 
पंडित रविशंकर(Pandit Ravishankar) की पहली शादी अल्लाऊद्दीन खान की बेटी और शिष्या अन्नपूर्णा देवी से हुई थी. अन्नपूर्णा देवी भी नामचीन सितार वादक थीं. अन्नपूर्णा देवी और रविशंकर कई कॉन्सर्ट में साथ भी नज़र आए थे. 

जब वे ऑल इंडिया रेडियो के म्यूजिक डायरेक्टर थे 
1949 में बतौर ऑल इंडिया रेडियो के म्यूजिक डायरेक्टर पंडित रविशंकर(Pandit Ravishankar) ने वाद्य वृन्द नामक भारतीय ऑर्केस्ट्रा का गठन किया. यह ऑर्केस्ट्रा आज भी कार्यरत है और दशकों से भारत के हज़ारों संगीतज्ञों को रोज़गार दे रहा है. 

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