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इस आदिवासी जनजाति से ताल्लुक रखती हैं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू, ऐसा रहा है इतिहास

NDA President Candidate द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं. इस जनजाति को संथाल नाम से जाना जाता है. आबादी के हिसाब से यह झारखंड की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक कही जाती है.

इस आदिवासी जनजाति से ताल्लुक रखती हैं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू, ऐसा रहा है इतिहास

draupadi murmu

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डीएनए हिंदी: राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के जीवन से जुड़ी कई बातें इन दिनों चर्चा में हैं. किस तरह उन्होंने निजी जिंदगी में संघर्षों का सामना किया. असमय ही उनके दो बेटों की मौत हो गई. कैसे असमय ही उनके पति का भी निधन हो गया. दुखों की इस मार के बीच कैसे वह डिप्रेशन से घिर गईं और फिर कैसे उन्होंने खुद को उबारा. उनके बारे में सामने आ रही ये सभी बातें अपने आप में मिसाल कायम करती हैं और जिंदगी में कभी भी हार ना मानने के लिए प्रोत्साहित करती हैं. 

आदिवासी समाज से आती हैं द्रौपदी मुर्मू
द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं. इस जनजाति को संथाल नाम से जाना जाता है. आबादी के हिसाब से यह झारखंड की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक कही जाती है. द्रौपदी मुर्मू संथाली संस्कृति में ही पली-बढ़ी हैं. इस जनजाति से जुड़े लोग मूल रूप से झारखंड, बंगाल, उड़ीसा, बिहार और असम में रहते हैं.

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जानते हैं क्या हैं संथाल आदिवासी जनजाति से जुड़ी खास बातें-

  • संथाल जनजाति को भारत के सबसे बड़े आदिवासी समुदाय के तौर पर जाना जाता है. 
  • भुवनेश्वर के शेड्युल्ड कास्ट एंड शेड्युल्ड ट्राइब्स रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (SCSTRTI) के मुताबिक संथाल दो शब्दों से मिलकर बना है. संथा का मतलब है शांत और आल का मतलब है व्यक्ति यानी शांत चित्त वाला व्यक्ति.
  •  अन्य आदिवासी जनजातियों के मुकाबले संथाल जनजाति के लोगों में शैक्षिक दर काफी अच्छी होती है. यहां पढ़ाई- लिखाई को काफी महत्व दिया जाता है.
  • कहा जाता है कि संथाल समाज में महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर ही अधिकार दिए जाते हैं. उन्हें अपनी पसंद से शादी करने का भी अधिकार होता है. यही नहीं यहां विधवा विवाह को भी बुरा नहीं माना जाता है. इस जनजाति के लोग प्रकृतिप्रेमी भी होते हैं. 
  • अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में भी संथाल जनजाति के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इसी के बाद संथाल नेता तिलका माझी को देश भर मं खास पहचान मिली.
  • इस जनजाति के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है. इस जनजाति से जुड़े लोग संगीत और हैंडीक्राफ्ट्स में काफी महारत रखते हैं.
  • झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के अलावा शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन भी संथाली जनजाति से ही आते हैं.
     

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