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श्याम सरन नेगी कैसे बने भारत के पहले वोटर? 106 साल की उम्र में 34 बार डाला वोट, जानें उनकी कहानी

Shyam Saran Negi: श्याम सरन नेगी ने 1951 में पहली बार वोट डाला था. उन्होंने 34 बार मतदान किया था. आइये जानते हैं वह भारत के पहले वोटर कैसे बनें...

श्याम सरन नेगी कैसे बने भारत के पहले वोटर? 106 साल की उम्र में 34 बार डाला वोट, जानें उनकी कहानी

भारत के पहले वोटर श्याम सरन नेगी

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डीएनए हिंदी: आजाद भारत के पहले वोटर श्याम सरन नेगी (Shyam Saran Negi) का शनिवार सुबह निधन हो गया. 106 साल उम्र में मतदान के प्रति उनके अंदर इतना बड़ा जुनून था कि तीन दिन पहले ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए डाक मतपत्र के जरिए अपना वोट डाला था. नेगी हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से लगभग 280 किलोमीटर दूर किन्नौर जिले के कल्पा गांव के रहने वाले थे. उन्होंने 1951 में पहली बार मतदान किया था.

कमजोर शरीर और लड़खड़ाते कदम. 106 साल की उम्र में कई शारीरिक तकलीफों के बावजूद श्याम सरन नेगी हमेशा मतदान केंद्र पर जाकर अपना वोट डालते थे. 2 नवंबर को उन्होंने कल्पा स्थित अपने घर से पोस्टल बैलेट से वोट डाला था. यह पहली बार था जब नेगी ने घर से बैलेट पेपर जरिए वोट डाला. हालांकि, इस बार भी वह मतदान केंद्र जाकर वोट डालना चाहते थे. इसको लेकर उन्होंने निर्वाचन अधिकारी से बहस करते हुए 12-D फॉर्म लौटा दिया था. लेकिन इस बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद चुनाव अधिकारियों ने 2 नवंबर को उनके कल्पा स्थित घर जाकर पोस्टल वोट डलवाया.

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Shyam Saran Negi ने 1951 में डाला था पहला वोट (Who is Shyam Saran Negi?)
1 जुलाई 1917 को हिमाचल प्रदेश के किनौर जिले के चिन्नी गांव (अब कल्पा गांव) में श्याम सरण नेगी का जन्म हुआ था. वह स्वतंत्र भारत के पहले वोटर माने जाते हैं. भारत में पहले चुनाव के लिए 1950 में देशभर में वोट डाले गए थे. लेकिन तब की राज्य व्यवस्था में किन्नौर सहित ऊंचे हिमालयी पर्वतीय क्षेत्रों में 25 अक्टूबर 1951 में वोट डाले गए थे. श्याम सरन नेगी भी किन्नौर के रहने वाले थे. उन्होंने अक्टूबर 1951 में पहली बार संसदीय चुनाव में अपना वोट डाला और तब से लेकर 2 नवंबर 2022 तक उन्होंने लगातार अपना मतदान किया. नेगी ने अपने जीवनकाल में 34 बार वोट दिया. बैलेट पेपर से EVM का बदलाव भी देखा.

श्याम सरन नेगी

कल्पा के स्कूल में टीचर थे श्याम सरन नेगी
श्याम सरन नेगी 1951 के दौरान एक स्कूल में टीचर थे. इसी दौरान उन्होंने मतदान किया था. उस वक्त कल्पा को चिन्नी गांव के नाम से जाना जाता था. 9वीं तक पढ़ाई करने वाले नेगी को उम्र ज्यादा होने की वजह से 10वीं में एडमिशन नहीं मिला था. इसकी वजह से वह दुखी भी हुए थे. इसके बाद उन्होंने 1940 से 1946 तक वन विभाग में गार्ड की नौकरी की. बाद में कल्पा लोअर मिडल स्कूल में टीचर लग गए और बच्चों को पढ़ाने लगे.

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कैसे बने भारत के पहले वोटर?
श्याम सरन नेगी ने बताया था, 'चुनाव के दौरान पड़ोस के गांव के स्कूल में मेरी ड्यूटी लगी थी. लेकिन मेरा वोट अपने गांव कल्पा में था. मतदान से एक रात पहले मैं अपने गांव आ गया था. कड़कड़ाती ठंड में सुबह 4 बजे जल्दी उठा और तैयार हो गया. सुबह 6 बजे अपने पोलिंग बूथ पर पहुंच गया लेकिन तब तक ना तो कोई वोटर पहुंचा और ना ही पोलिंग अधिकारी. थोड़ी देर बाद जब पोलिंग कराने वाला दल वहां पहुंचा तो मैंने उनसे अनुरोध किया कि जल्दी वोट डालने दें, क्योंकि मुझे 9 किलोमीटर दूर दूसरे गांव में चुनाव कराने जाना है. पोलिंग अधिकारियों ने उनके परेशानी समझ लिया और निर्धारित समय से आधा घंटा पहले सुबह 6:30 बजे वोट डालने दिया. इस तरह मैं देश का पहला वोटर बन गया'

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