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First Vaccine of World: कैसे बनी थी दुनिया की पहली वैक्सीन, किसने बनाई थी? 

एडवर्ड जेनर का जन्म 17 मई 1749 में इंग्लैंड के ग्लूसेस्टरशायर के बर्केले में हुआ था. उन्हें बचपन में ही चेचक हो गया था.

First Vaccine of World: कैसे बनी थी दुनिया की पहली वैक्सीन, किसने बनाई थी? 

Vaccination

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डीएनए हिंदी: कोरोनो महामारी ने दुनिया के सामने वैक्सीन की अहमियत को बेहद स्पष्ट तरीके से स्थापित कर दिया है. वह दौर जब कोरोना का आतंक हर दिन बढ़ रहा था, तब उम्मीद की एक किरण वैक्सीन ही थी. मगर क्या आप जानते हैं कि दुनिया में पहली बार वैक्सीन कब बनी? किसने बनाई? और ये वैक्सीन कौन सी थी? आज 17 मई के दिन यह जानना और भी जरूरी इसलिए है क्योंकि आज ही के दिन दुनिया की पहली वैक्सीन बनाने वाले व्यक्ति का जन्म हुआ था. इनका नाम है एडवर्ड जेनर (Edward Jenner), जेनर ने ही दुनिया की पहली वैक्सीन बनाई थी.

बचपन में हो गया था चेचक
जेनर का जन्म 17 मई 1749 में इंग्लैंड के ग्लूसेस्टरशायर के बर्केले में हुआ था. बचपन में ही जेनर को चेचक ने घेर लिया. इस बीमारी का जीवन भर उनकी सेहत पर असर रहा. यह बात अलग है कि जेनर पढ़ाई में शुरुआत से ही बेहद अच्छे थे. सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने अपनी अप्रेंटिस शुरू कर दी थी. यह 7 साल चली और 21 साल की उम्र में वह लंदन में सर्जन बन चुके थे.

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Edward Jenner during giving vaccination

ऐसे हुआ था पहला वैक्सीनेशन
उन दिनों काउ पॉक्स नाम की एक बीमारी फैली हुई थी. इसके लिए वैक्सीनिया नाम के वायरस को जिम्मेदार माना जाता था. इसके इलाज का अजब तरीका निकालने की कोशिश की एडवर्ड जेनर ने. यह सन् 1796 की बात है. जेनर ने एक ग्वाले के हाथ में बने काउ पॉक्स के घाव से ही इंजेक्शन में उसका पस निकाला और एक 13 साल के बच्चे को ये इंजेक्शन लगा दिया. नतीजे में सामने आया कि बच्चे में स्मॉलपॉक्स के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता आ गई है. इसे आप दुनिया का पहला वैक्सीनेशन मान सकते हैं.

फिर बनी पहली आधिकारिक वैक्सीन
इसके बाद पहली वैक्सीन की कहानी ये रही कि जेनर के बच्चे पर किए गए उस एक्सपेरीमेंट का क्लीनिकल टेस्ट शुरू किया गया. 1799 में इसके नतीजे सामने आए और यह क्लीनिकल टेस्ट सफल रहा. यह सब वैक्सीनिया नाम के वायरस को खत्म करने के लिए हुआ था इसलिए इसे नाम भी वैक्सीन दे दिया गया. यहीं से शुरुआत हुई दुनिया की पहली वैक्सीन की.  उन दिनों स्मॉलपॉक्स की समस्या उतनी ही भीषण थी, जितनी आज के समय में कोरोना महामारी बनी हुई है. 

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