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Demonetisation: अनिल बोकिल ने दिया था पीएम मोदी को नोटबंदी का आइडिया, 9 मिनट की मीटिंग 2 घंटे तक चलती रही 

Demonetisation: 8 नवंबर 2016 को पीएम नरेन्द्र मोदी ने देश में 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर दिए थे. इसे कालाधन रोकने के लिए बड़ा कदम बताया गया था. 

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Demonetisation: अनिल बोकिल ने दिया था पीएम मोदी को नोटबंदी का आइडिया, 9 मिनट की मीटिंग 2 घंटे तक चलती रही 
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डीएनए हिंदीः 8 नवंबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित किया और एक झटके में 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिए गए. इसके बाद बैंकों के बाहर लोगों की लाइनें देखने को मिली. देश आज भी उस दौर को नहीं भूला है. नोटबंदी से देश को क्या फायदा हुआ और क्या नुकसान पर सवाल उठते रहे हैं. इन सवालों के बीच एक नाम सामने है अनिल कोबिल (Anil Bokil) का. ये ही वो शख्स हैं जिन्होंने पीएम मोदी को नोटबंदी का आइडिया दिया था. दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी (PM Narendra Modi) के साथ उनकी मुलाकात सिर्फ 9 मिनट के लिए तय हुई थी, हालांकि जब दोनों में बातचीत शुरू हुई तो करीब 2 घंटे तक मीटिंग होती रही. 

पीएम को बताया नोटबंदी से कैसे होगा फायदा?
अनिल बोकिल ने पीएम मोदी के साथ मुलाकात में उन्हें नोटंबदी के फायदे बनाए थे. एक इंटरव्यू में अनिल बोकिल ने बताया कि जब वह पीएम मोदी से मिले तो उन्हें बताया कि नोटबंदी से ना सिर्फ वस्तुओं के दाम कम होंगे बल्कि सामान की मांग बढ़ेगी, जिससे प्रोडक्शन बढ़ाना पड़ेगा. यह भी बताया कि इससे बैंकों से आसानी से लोन मिल सकेगा. पीएम मोदी मुलाकात से बात इस प्लान से काफी प्रभावित हुए थे. 

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मनमोहन-राहुल को भी दिया था प्रजेंटेशन
अनिल बोकिल ने नोटबंदी को लेकर यूपीए सरकार के दौरान मनमोहन सिंह और राहुल गांधी को भी प्रजेंटेशन दिया था. बोकिल का कहना है कि ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी ने सिर्फ 2-3 सेकंड दिए थे लेकिन उनसे 3-4 मिनट अच्छी बात हुई. राहुल गांधी नेअपने एक्सपर्ट का नंबर दिया था. बोकिल ने कहा कि राहुल गांधी को प्लान पसंद भी था, लेकिन हर सरकार चीजों को अलग नजरिए से देखती है.  

कौन हैं अनिल बोकिल? 
महाराष्ट्र के लातूर में जन्मे 53 साल के बोकिल अर्थक्रांति प्रतिष्ठान के फाउंडर हैं. अनिल बोकिल मूल रूप से मैकेनिकल इंजीनियर हैं. बाद में उन्होंने इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की और पीएचडी भी हासिल की. वह पुणे में थिंक टैंक अर्थक्रांति के संस्थापक हैं. उन्होंने साल 1999 में अर्थक्रांति को लेकर काम करना शुरू किया और 2004 में अर्थक्रांति को एक संगठन के रूप में रजिस्टर करा लिया. बोकिल कई सामाजिक आर्थिक परियोजनाओं में शामिल है. अनिल मुंबई में कुछ वक्त तक डिफेंस सर्विस से जुड़े रहे फिर उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में खुद का कुछ करने का सोचा और औरंगाबाद लौटकर इंडस्ट्रियल टूल्स और पार्ट्स की फैक्ट्री लगाई.   

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