डीएनए स्पेशल
मौलाना आज़ाद भारत की वह आवाज़ थे जिन्होंने गांधी जी के साथ मिलकर धर्मनिरपेक्ष भारत की कल्पना की थी
डीएनए हिंदी : भारत के पहले शिक्षा मंत्री के बारे में जानते हैं? उनका नाम मौलाना अबुल कलाम आज़ाद था. वही अबुल कलाम आज़ाद जो भारत के मूल निवासी नहीं होते हुए भी हर सांस भारतीय थे.
नवम्बर की ग्यारहवीं तारीख़ को 1888 में सउदी अरब के मक्का में पैदा हुए सैयद ग़ुलाम महियुद्दीन अहमद बिन खैरुद्दीन अल हुसैनी भारतीय लोकतंत्र की बेहद मज़बूत कड़ी थे. अरबी, बंगाली, हिंदुस्तानी, पर्शियन और अंग्रेज़ी भाषाओं के उत्साद मौलाना आज़ाद शायर भी थे.
घर में पढ़कर 16 साल की उम्र में पूरी की शिक्षा
उनकी उर्दू अदब के लिए दीवानगी ऐसी थी कि यौवन की दहलीज़ छूने से पहले ही नज़्म लिखने लगे, शेर कहने लगे. मज़े की बात यह कि वे किसी पारम्परिक स्कूल में नहीं पढ़े थे. घर पर पढ़ाई हुई और इतने कुशाग्र थे कि उस पढ़ाई के बूते पंद्रह की उम्र होते-होते बाक़ियों को भी पढ़ाने लगे. सोलह की उम्र में पढ़ाई पूरी हो गई. यह कुल समय उस वक़्त पढ़ाई करने में आमतौर पर लगने वाले वक़्त से 9 साल कम था.
स्वयं इतने उत्तम छात्र रहे मौलाना आज़ाद को बतौर शिक्षा मंत्री आईआईटी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शुरूआत करने का श्रेय भी प्राप्त है.
पाकिस्तान के विरोध में मज़बूत आवाज़
मौलाना आज़ाद बेहद प्रखर राष्ट्रवादी थे. जब पाकिस्तान बन रहा था तो उन्होंने धर्म के आधार पर हो रहे देश विभाजन का कड़ा विरोध किया था. उनका एक ही मत था कि सभी धर्म और वर्ग के भारतीय एक होकर अंग्रेज़ों का मुक़ाबला करें. गांधी जी के अव्वल शिष्य रहे आज़ाद ख़िलाफ़त आंदोलन की आवाज़ थे. अंग्रेज़ों के विरोध में गांधी जी द्वारा शुरू किए गए अवज्ञा आंदोलन में भी उन्होंने खुलकर हिस्सा लिया.
पत्रकार भी थे मौलाना आज़ाद
मौलाना आज़ाद के बारे में कई बेहद ख़ूबसूरत जानकारियां हैं. एक ज़रूरी बात यह भी कि बेहद कम उम्र में उन्होंने राजनीति और पत्रकारिता शुरू कर दी थी. वे इंडियन नेशनल कांग्रेस के सबसे कम उम्र के कम उम्र अध्यक्ष थे.
मरणोपरांत भारत रत्न पाने वाले मौलाना आज़ाद की मृत्यु 22 फ़रवरी 1958 हो गई थी.