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कतर में नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को क्यों सुनाई गई फांसी की सजा, क्या हैं आरोप?

कतर की एक अदालत ने आठ भारतीय अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है. उन्होंने नौसेना के अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों को भी सार्वजनिक कर दिया है.

कतर में नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को क्यों सुनाई गई फांसी की सजा, क्या हैं आरोप?

Indian Navy.

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डीएनए हिंदी: कतर की एक अदालत ने अगस्त 2023 में गिरफ्तार भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है. बीते साल अगस्त से ही ये भारतीय नागरिक, कतर की जेल में बंद हैं. बीते साल 30 अगस्त को कतर की खुफिया एजेंसी ने रात के अंधेरे में अधिकारियों को अचानक उनके क्वार्टर से उठा लिया था. पूर्व नौसैनिक कतर में एक डिफेंस सर्विस प्रोवाइडर कंपनी, डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी के लिए काम कर रहे थे.

अधिकारी जब से गिरफ्तार हुए हैं, तभी से उन्हें एकान्त कारावास (Solitary Confinement) में रखा गया है. अदालत ने हर बार उन्हें जमानत देने से इनकार किया और अंत में फांसी की सजा सुना दी. कतर पुलिस ने 8 लोगों के परिवार तक को हिरासत में लेने की वजह नहीं बताई. डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी, कतर नौसेना के ट्रेनिंग में शामिल थी.

कैसे पता चली गिरफ्तारी की बात?
डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज के लिए काम करने वाले सभी अधिकारियों गिरफ्तारी सबसे पहले एक पूर्व कमांडर की बहन के ट्वीट से सामने आई थी. वह फर्म में मैनेजिंग डायरेक्टर था. साल 2013 से वह दोहा में कतर के नौसेना कर्मियों को प्रशिक्षण दे रहा था. बीते साल नवंबर में रिटायर कमांडर पुणेन्दु तिवारी की बहन मीतू भार्गव ने अपने भाई को वापस लाने के लिए सरकार से मदद मांगी थी.

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समाचार एजेंसी ANI से हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'मैंने 25 अक्टूबर को एक ट्वीट किया और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मेरे भाई को वापस लाने की अपील की. वह दोहा, कतर में अवैध हिरासत में है. मेरा भाई एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी है. वह डहरा ग्लोबल कंसल्टेंसी सर्विसेज कंपनी के जरिए कतर नौसेना को प्रशिक्षण देने के लिए वहां गया था.'

एक अधिकारी को मिल चुका है अहम सम्मान
साल 2019 में, कतर सरकार की सिफारिश पर पुणेन्दु तिवारी को प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया गया था. यह भारत सरकार की ओर से प्रवासी भारतीयों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है. 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों की गिरफ्तारी की बात तब पता चली जब एक अधिकारी के भाई ने आशंका जताई. भाई ने उसे जन्मदिन की बधाई दी थी लेकिन किसी ने उसने बधाई संदेश का कोई जवाब नहीं दिया.

गिरफ्तार लोगों को मिला है कांसुलर एक्सेस
गिरफ्तार लोगों को कांसुलर एक्सेस दी गई थी. कतर के अधिकारियों ने कभी सार्वजनिक तौर पर खुलासा नहीं किया है कि अधिकारियों को गिरफ्तार क्यों किया गया था. कई मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि उन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगा था. यह भी दावा किया गया था कि उनकी हिरासत की वजह किसी अन्य कंपनी के साथ कंपनी की प्रतिद्वंद्विता भी हो सकती है.

अधिकारियों पर क्या-क्या लगे हैं आरोप?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी ने 8 भारतीयों को रोजगार दिया था. इस कंपनी का मालिक एक कतर का नागिरक है. कतर के अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में जमानत पर उसे रिहा कर दिया गया था. मीडिया में ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि कतर का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन को भी रोका गया था.

ऐसे भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि गिरफ्तार पूर्व अधिकारियों ने लोगों ने कतरी नौसेना की छोटी पनडुब्बियों की गुप्त परियोजना पर इजरायल की ओर से जासूसी की थी. यह पनडुब्बी रडार का पता लगाने से बच सकती थी. 

किन पूर्व भारतीय अधिकारियों को मिली है सजा?
कतर ने जिन 8 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है, वे भारतीय नौसेना के दिग्गज अधिकारी रहे हैं. गिरफ्तार पूर्व अधिकारियों के नाम कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश हैं. ये सभी अधिकारी डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम करते हैं.

क्या है भारत सरकार का रुख?
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हम सभी अधिकारियों के परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम के संपर्क में हैं. साथ ही कानूनी विकल्प भी तलाश रहे हैं. मामले को हम काफी महत्वपूर्ण मानते हैं और इस पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. साल दिसंबर 2023 में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारतीय पक्ष लगातार कतर सरकार के संपर्क में है. उन्होंने आश्वासन दिया था कि गिरफ्तार भारतीयों की रिहाई देश के लिए प्राथमिक काम है.

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विदेश मंत्री ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा था कि यह एक बहुत ही संवेदनशील मामला है. उनके हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं. राजदूत और वरिष्ठ अधिकारी कतर सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम आश्वस्त करते हैं कि वे हमारी प्राथमिकता हैं.

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