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जानें, पिन कोड हमेशा 6 डिजिट के ही क्यों होते हैं?

देश को नौ इलाकों में बांटा गया और हर इलाके को एक अलग पिनकोड प्रदान किया गया.

जानें, पिन कोड हमेशा 6 डिजिट के ही क्यों होते हैं?

भारतीय डाक छह अंकों के डिजिट के सहारे सामान डिलिवर करता है. फाइल फोटो

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डीएनए हिंदी: पिन कोड (Pin Code) या पोस्टल इंडेक्स नंबर हमारी दिनचर्या का महत्वपूर्ण अंग हैं. खासकर ऐसे समय में जब भारत के शहरी इलाकों में लोग अपनी जरूरतों के सामान होम डिलीवरी कराते हैं. क्या कभी आपने यह सोचा है कि पिन कोड हमेशा छह अंकों के ही क्यों होते हैं? इन छह नंबरों के पिन का क्या मतलब होता है? सच तो यह है कि इन छह अंकों के सहारे डाक विभाग बहुत मजे में अपना काम संपन्न करता है.  

इस वर्ष पिनकोड का हुआ जन्म
 
भारत में छह अंकों का पिन कोड 15 अगस्त 1972 को अस्तित्व में आया था. देश को नौ इलाकों में बांटा गया और हर इलाके को एक अलग पिनकोड प्रदान किया गया. 8 भौगोलिक इलाकों के अलावे 9वां पिनकोड आर्मी पोस्टल सर्विस के लिए रिजर्व रखी गई. भारत में 1,54,725 डाकघरों को कुल 19,101 पिन कोड के तहत रखे गए हैं जबकि आर्मी पोस्टल सर्विस को 2014 के बाद से अलग पिनकोड के तहत रखा गया है. 

क्या होता है इन छह अंकों का मतलब?

सबसे पहला डिजिट रीज़नल नंबर होता है. दरअसल, पूरे देश को आठ रीज़नल और नौ फंक्शनल जोन में बांटा गया है. इसमें दूसरा डिजिट सब-रीज़न (उप क्षेत्र) का डिजिट है. तीसरा डिजिट सॉर्टिंग डिस्ट्रिक्ट का है और आखिरी तीन डिजिट सम्बद्ध डाकघरों से जुड़े हैं.

दुनिया में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित डाकघर भारत के हिक्किम में है. हिक्किम 15,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. हिक्किम, हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले में स्थित है.

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