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क्यों मोदी सरकार चाहती है संसद में राम मंदिर पर बहस, क्या है रूल 193? जानिए BJP का मास्टर स्ट्रोक

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि वह चर्चा में भाग नहीं लेगी. कांग्रेस ने अभी तक अपने फैसले पर चुप्पी साधी है.

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क्यों मोदी सरकार चाहती है संसद में राम मंदिर पर बहस, क्या है रूल 193? जानिए BJP का मास्टर स्ट्रोक
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संसद के बजट सत्र का आज आखिरी दिन है. सत्र के आखिरी दिन राम मंदिर पर सदन में चर्चा होगी. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सासंद आज दोनों सदनों में रूल 193 और रूल 176 के तहत राम मंदिर पर प्रस्ताव लाएंगे. लोकसभा में बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह, प्रताप चंद्र सारंगी और संतोष पांडे प्रस्ताव रखेंगे. 

राज्यसभा में यह प्रस्ताव नियम 176 के तहत लाया जाएगा और इसे बीजेपी सांसद के लक्ष्मण, सुधांशु त्रिवेदी और राकेश सिन्हा पेश करेंगे. तैयारी यह है कि संसद से अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा और भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने के लिए प्रस्ताव पारित किया जाए.

रूल 193 क्या है?
रूल 193 के जरिए लोकसभा में उन चर्चाओं को किया जाता है, जिन्हें सदन में प्रस्तुत विशिष्ट या औपचारिक प्रस्तावों के दायरे में नहीं रखा जाता है. पारंपरिक प्रस्तावों के विपरीत, रूल 193 चर्चा में मतदान की आवश्यकता नहीं होती है.

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राम मंदिर पर क्यों चर्चा कराना चाहती है BJP? क्या है मास्टर प्लान
22 जनवरी को अयोध्या के ऐतिहासिक मंदिर में श्री राम लला की 'प्राण प्रतिष्ठा' आयोजित की गई थी. विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि थे. उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने न्योता दिया था लेकिन विपक्ष ने इस कार्यक्रम को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्यक्रम बताया.

बीजेपी राम मंदिर पर पीएम मोदी को वाहवाही देना चाहती है, वहीं विपक्षी दलों की आलोचना चाहती है. इस चर्चा से विपक्षी पार्टियां दूर रहेंगी.

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विपक्ष पर लगा राम विरोधी टैग
संसद में इस प्रस्ताव पर चर्चा का अर्थ है कि कांग्रेस इसमें शामिल नहीं होगी. विपक्षी दल भी इससे बचेंगे. राजनीतिक तौर पर संदेश जाएगा कि विपक्ष राम के नाम से भी बचना चाहता है. विपक्ष पहले से सोशल मीडिया पर राम विरोधी होने के ठप्पे से परेशान है.

राम मंदिर पर फंसेगा विपक्ष
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) पहले ही कह चुकी है कि वह चर्चा में भाग नहीं लेगी, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक अपना निर्णय स्पष्ट नहीं किया है. प्रधानमंत्री मोदी के लोकसभा में प्रस्ताव के अंत में बोलेंगे. ऐसा हो सकता है कि वे कांग्रेस को राम मंदिर पर घेरें. 

पीएम मोदी के लिए तालियां और विपक्ष के लिए....
जानकारों का मानना है कि बीजेपी राम मंदिर के निर्माण की प्रशंसा और भगवान राम के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव को पारित कराना चाहेगी. संसद के दोनों सदनों में इस पर चर्चा होगी. इस प्रस्तावना में पीएम मोदी के लिए जमकर तालियां पड़ने वाली हैं. वहीं बीजेपी विपक्ष को जमकर घेरने वाली है.

हिंदी हार्टलैंड में अपना नुकसान कर रही कांग्रेस
बीजेपी ने पहले ही कांग्रेस को प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने की वजह से 'राम-विरोधी' टैग दे दिया है. कांग्रेस अगर प्रस्ताव का विरोध करती है, या उससे दूर रहने का विकल्प चुनती है तो बीजेपी को कांग्रेस की आलोचना का एक और मौका मिल जाएगा. बीजेपी, कांग्रेस को घेरने के लिए और तैयार हो जाएगी. कांग्रेस की पकड़ हिंदी हार्टलैंड में कमजोर हो जाएगी और तगड़ा झटका लगेगा.
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