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चीन, रूस और अमेरिका... अचानक महाशक्तियों की 'आंख का तारा' क्यों बना ग्रीनलैंड?

Greenland History: ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 21,65,000 वर्ग किलोमीटर है. ग्रीनलैंड में उपलब्ध दुर्लभ तत्व तेल, तांबा, जिंक सोना और यूरेनियम दुनिया का लालच बढ़ा रहे हैं.

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चीन, रूस और अमेरिका... अचानक महाशक्तियों की 'आंख का तारा' क्यों बना ग्रीनलैंड?

Greenland

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ग्रीनलैंड इस समय सुर्खियों में बना हुआ है. इसकी वजह है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो हर हाल में ग्रीनलैंड को पाना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने साम-दाम-दंड-भेद सभी दांव अजमाना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की पेश की, लेकिन डेनमार्क ने इस पेशकश को ठुकरा दिया. इसके बाद उन्होंने सेना के बल पर हथियाने की धमकी दे डाली. NATO देशों ने जब ग्रीनलैंड का समर्थन करने की कोशिश की, तो ट्रंप ने उनके ऊपर भी 10% का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया. लेकिन सबसे खास बात ये है कि ग्रीनलैंड में अमेरिका की ही नहीं, बल्कि चीन और रूस की भी दिलचस्पी बढ़ी है.

पूरी दुनिया इस बात से भौंचक्का है कि अचानक इन तीन महाशक्तियों में ग्रीनलैंड को लेकर इतनी रुची क्यों बढ़ी है? ग्रीनलैंड की धरती में ऐसा क्या है, जिसे हड़पने के लिए ग्रीनलैंड को पाना चाहते हैं.

ग्रीनलैंड का भौगोलिक महत्व

दरअसल, ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 21,65,000 वर्ग किलोमीटर है. यह आर्कटिक महासागर में स्थित है. जिसकी जनसंख्या लगभग 57,000 है. जिसमें 90% लोग राजधानी नुउक (Nuuk) में रहते हैं.

ग्रीनलैंड की आबादी भले ही कम हो लेकिन विशाल प्राकृतिक संसाधन, तेल, गैस, खनिज और भविष्य की जलवायु परिस्थितियों के कारण यह तीनों महाशक्तियों (रूस, चीन और अमेरिका) के लिए 'आंख का तारा' बन चुका है. इसकी बर्फ की चादर में दुनिया का लगभग 10% ताजा पानी है, जो जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है.

अमेरिका के लिए क्यों खास ग्रीनलैंड?

अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड इसलिए खास है, क्योंकि यह उत्तरी अटलैंटिक महासागर में पड़ता है. जो यूरोप और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है. अमेरिका का यहां थ्यूल एयर बेस मौजूद है. इससे यह साबित होता है कि ग्रीनलैंड में उसकी सीधी मौजूदगी है. वह भविष्य में आर्कटिक समुद्री मार्ग (नॉर्दर्न सी रूट) वैश्विक व्यापार के रूप में देख रहा है.

इसके अलावा ग्रीनलैंड पर मौजूद दुर्लभ तत्व (Rare Earth Elements) तेल, तांबा, जिंक सोना और यूरेनियम ट्रंप के लालच को और बढ़ा रहे हैं. ट्रंप जानते हैं कि यह चीजें अगर मिल गईं तो चीन पर दुनिया की निर्भरता कम हो जाएगी. रेयर अर्थ एलिमेंट के लिए दुनिया में उसकी पहुंच बढ़ेगी.

चीन देख रहा है अपना भविष्य

चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ एलिमेंट उत्पादक है. लेकिन वह भी अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए स्रोत खोज रहा है. ग्रीनलैंड उसके लिए सबसे मुफीद का सौदा मान रहा है. इसमें वह रिसर्च स्टेशन बनाने का ख्वाब सजा रहा है. जहां उसके हवाई अड्डे और बंदरगाह हो सकत हैं. इससे न सिर्फ उसका व्यापार बढ़ेगा, बल्कि राजनीतिक प्रभाव भी दुनिया में बढ़ेगा.

रूस के लिए क्यों है जरूरी?

ग्रीनलैंड, रूस के उत्तर में पड़ता है. जिसमें मौजूद अमेरिका की रडार और मिसाइल सिस्टम रूस की रणनीतिक योजनाओं में रोढ़ा बनती हैं. रूस ने जानता है कि अगर ग्रीनलैंड उससे हाथ लग गया तो अमेरिका को निशाना बनाना उसके लिए आसान हो जाएगा. इसके अलावा रूस के नॉर्दर्न सी रूट भी उसके लिए अहम है. क्योंकि यह रास्ता उसके व्यापार को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है. बर्फ के पिघलने रूस को नए-नए समुद्री मार्ग मिल रहे हैं.

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