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Diesel-Petrol की कीमतों में क्यों लगी है आग? समझें तेल पर टैक्स क्यों नहीं घटाती सरकार

कच्चा तेल महंगा होने से भारत में भी तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस बीच पीएम मोदी ने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे वैट की दरें कम करें.

Diesel-Petrol की कीमतों में क्यों लगी है आग? समझें तेल पर टैक्स क्यों नहीं घटाती सरकार

पेट्रोल-डीजल की कीमतें छू रही हैं आसमान

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डीएनए हिंदी: भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतें (Petrol-Diesel prices in India) लगातार आसमान छू रही हैं. देश का आम नागरिक तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से हर रोज परेशान हो रहा है. न सिर्फ़ यातायात महंगा हो रहा है, बल्कि लोगों के आज ज़रूरत की चीजें भी महंगाई की मार झेल रही हैं. ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि आखिरी तेल की कीमतें कैसे नियंत्रित होती हैं. कौन से कारक तेल की कीमतों को प्रभावित करते हैं. साथ ही, यह भी समझना ज़रूरी है कि अलग-अलग राज्यों में तेल की कीमतें अलग-अलग कैसे होती हैं. आइए विस्तार से समझते हैं...

भारत में कच्चे तेल का उत्पादन बहुत कम होता है. यही कारण है कि देश की तेल से जुड़ी 80 प्रतिशत ज़रूरतें आयात से पूरी होती हैं. यह भी एक बड़ा कारण है कि वैश्विक स्तर पर हो रही घटनाएं भारत में तेल की कीमतों को प्रभावित करती हैं. तेल की कीमतें महंगाई की दरों को भी प्रभावित करती हैं. पिछले कुछ महीनों में तेल की कीमतों में तेज इजाफा होने की वजह से देश में महंगाई भी तेजी से बढ़ी है. डीजल-पेट्रोल के अलावा घरेलू गैस के साथ-साथ सीएनजी और पीएनजी गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है.

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एक साल में 78 प्रतिशत बढ़े कच्चे तेल के दाम
पिछले एक साल के आंकड़े देखें तो अप्रैल 2021 में भारत में आने वाले कच्चे तेल की कीमत 63.4 डॉलर यानी लगभग 4900 रुपये थी. एक साल में यह कीमत बढ़कर मार्च 2022 में 112.87 डॉलर यानी लगभग 8650 रुपये प्रति बैरल हो गई. यानी कीमतों में लगभग 78 फीसदी का इजाफा हुआ. आपको बता दें कि एक बैरल में लगभग 159 लीटर होते हैं. जनवरी 2022 से अब तक भारत को मिलने वाले कच्चे तेल की कीमतों में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. 

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कीमतें
पेट्रोलियम पदार्थों पर होने वाली कमाई सरकारों की आय का बड़ा स्रोत होती हैं. ऐसे में टैक्स में कमी करने से राज्यों के राजस्व पर बोझ पड़ता है. कोविड महामारी के चलते खाली हुए खजाने को देखते हुए राज्य टैक्स घटाने से हिचक रहे हैं. यही कारण रहा कि केंद्र सरकार की ओर से कटौती किए जाने के बावजूद भी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्यों ने तेल की कीमतों पर वैट में कटौती नहीं की. दिल्ली ने पेट्रोल पर वैट में कटौती तो की, लेकिन डीजल की कीमतों पर कोई कटौती नहीं की. 

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बाकियों की तुलना में भारत में कम हैं कीमतें
जो देश तेल का उत्पादन नहीं करते, अगर उनसे तुलना की जाए, तो भारत में ईंधन की कीमते अपेक्षाकृत कम रही हैं. 4 अप्रैल 2022 को भारत में पेट्रोल की कीमत 103.81 रुपये प्रति लीटर थी. वहीं, नीदरलैंड में पेट्रोल की कीमत 192.73 रुपये, सिंगापुर में 159.05 रुपये, जापान में 104.34 रुपये, जर्मनी में 171.37 रुपये और स्पेन में 148.19 रुपये प्रति लीटर थी.

पड़ोसी देशों में सस्ता है डीजल-पेट्रोल
अगर बात भारत के पड़ोसी देशों की हो, तो वहां कीमतें कम हैं. पाकिस्तान और श्रीलंका में डीजल और पेट्रोल के दाम भारत की तुलना में कम हैं. हालांकि, श्रीलंका और पाकिस्तान के आर्थिक हालात देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि इन कीमतों में स्थायित्व कितना होगा.

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कीमतें कम करने के लिए क्या कर रही है सरकार
केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी पर 5 रुपये और डीजल की एक्साइज ड्यूटी पर 10 रुपये कम किए थे. केंद्र सरकार के इस कदम के बाद कई राज्यों ने भी वैट दरों में कटौती की, जिसके चलते थोड़ी राहत मिली. चुनावों के चलते भी कई महीने तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े, लेकिन चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल की कीमतें फिर से बढ़ने लगीं.

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