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'डिजिटल वसीयत' क्यों हैं जरूरी? मौत के बाद आपके बिटकॉइन और सोशल मीडिया हैंडल्स का कौन होगा हकदार? जानिए कैसे चुनें वारिस

Digital estate planning for creators: डिजिटल दौर में आपकी मौत के बाद आपके यूट्यूब चैनल, क्रिप्टो वॉलेट और सोशल मीडिया एकाउंट्स लावारिस हो सकते हैं. जानिए क्या है 'डिजिटल वसीयत' बनाने का कानूनी तरीका और कैसे आप अपने ऑनलाइन एसेट्स को सुरक्षित रख सकते हैं.

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'डिजिटल वसीयत' क्यों हैं जरूरी? मौत के बाद आपके बिटकॉइन और सोशल मीडिया हैंडल्स का कौन होगा हकदार? जानिए कैसे चुनें वारिस

क्या आपने बनाई अपनी 'डिजिटल वसीयत'? (फोटो एआई)

Add DNA as a Preferred Source

आज के दौर में हम अपनी जमीन-जायदाद और बैंक बैलेंस की सुरक्षा के लिए तो बड़े-बड़े फैसले लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके स्मार्टफोन के पीछे छिपी आपकी डिजिटल दुनिया का आपके बाद क्या होगा? अगर आज आपको कुछ हो जाए, तो आपके लाखों सब्सक्राइबर्स वाले यूट्यूब चैनल, क्रिप्टो वॉलेट में रखे कॉइन्स, या सालों से संजोकर रखी गई क्लाउड मेमोरीज पर किसका हक होगा? आईटी मंत्रालय यानी MeitY के अनुसार सच यह है कि भारत में 90 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी इस अदृश्य संपत्ति को लेकर पूरी तरह लापरवाह हैं, जिसके कारण उनकी मौत के बाद यह पूरी कमाई और यादें इंटरनेट के समंदर में हमेशा के लिए दफन हो जाती हैं.

बैंक और जायदाद से ज्यादा कीमती है आपका डिजिटल एसेट 

पुराने जमाने में लोग तिजोरी की चाबी छोड़कर जाते थे, लेकिन आज की युवा पीढ़ी के पास सबसे बड़ी संपत्ति उनके डिजिटल एकाउंट्स हैं. एक सफल ब्लॉगर का ब्लॉग, एक रील्स क्रिएटर का इंस्टाग्राम पेज, या किसी निवेशक का क्रिप्टो अकाउंट आज लाखों-करोड़ों की वैल्यू रखता है. आम आदमी को लगता है कि उनके जाने के बाद परिवार वाले सिर्फ पासवर्ड डालकर इन एकाउंट्स को चला लेंगे, लेकिन कानूनी रूप से यह इतना आसान नहीं है. प्राइवेसी और सुरक्षा नियमों के कारण कंपनियां बिना पुख्ता कानूनी दस्तावेजों के किसी भी रिश्तेदार को आपके एकाउंट का एक्सेस नहीं देती हैं. अगर आपने समय रहते इसका इंतजाम नहीं किया, तो आपकी मेहनत से खड़ा किया गया डिजिटल एम्पायर एक झटके में बंद हो सकता है.

गूगल से लेकर सोशल मीडिया तक, ऐसे काम करता है डिजिटल नॉमिनेशन 

गूगल (Inactive Account Manager), मेटा/फेसबुक (Legacy Contact) और एप्पल (Digital Legacy) की आधिकारिक सेटिंग्स और नियम, जो उन्होंने यूज़र्स की मृत्यु के बाद डेटा हैंडलिंग के लिए बनाए हैं.  तकनीकी कंपनियों ने अब इस समस्या को धीरे-धीरे समझना शुरू किया है. गूगल के पास 'इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर' नाम का एक फीचर होता है, जहां आप यह तय कर सकते हैं कि अगर आप एक निश्चित समय तक अपने अकाउंट को लॉगइन नहीं करते हैं, तो आपके डेटा का एक्सेस किसे दिया जाए. इसी तरह फेसबुक पर 'लिगेसी कॉन्टैक्ट' का विकल्प मिलता है. हालांकि, यह सिर्फ आपके एकाउंट को मैनेज करने या डिलीट करने की अनुमति देता है, इससे आपकी कमर्शियल प्रॉपर्टी यानी आपके चैनल से होने वाली कमाई पर मालिकाना हक साबित नहीं होता. इसके लिए आपको तकनीकी सेटिंग्स से आगे बढ़कर कानूनी रास्ते अपनाने होंगे.

भारतीय कानून के दायरे में कैसे बनती है डिजिटल वसीयत 

भारत में 'इंडियन सक्सेशन एक्ट' (भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' के तहत भारत में सभी प्रकार की संपत्तियों की वसीयत बनाई जाती है) के तहत आप अपनी पारंपरिक संपत्तियों की तरह ही अपने डिजिटल एसेट्स के लिए भी एक वसीयत तैयार कर सकते हैं. इसे 'डिजिटल विल' कहा जाता है. इसमें आपको अपने सभी डिजिटल एकाउंट्स, मॉनेटाइज्ड चैनल्स, वेबसाइट डोमेन्स और क्रिप्टो वॉलेट्स की एक लिस्ट बनानी होती है. सबसे जरूरी बात यह है कि इस वसीयत में आपको अपनी सीक्रेट 'प्राइवेट की' या पासवर्ड्स लिखने से बचना चाहिए, बल्कि इसकी जगह आपको एक 'डिजिटल एग्जीक्यूटर' नियुक्त करना चाहिए जो आपकी वसीयत के कानूनी तौर पर लागू होने के बाद उन पासवर्ड्स को एक सुरक्षित डिजिटल लॉकर के जरिए आपके वारिस तक पहुंचा सके.

एक छोटी सी लापरवाही और परिवार को झेलना पड़ सकता है भारी नुकसान 

अगर आप सोचते हैं कि क्रिप्टो करेंसी या यूट्यूब से होने वाली कमाई आपके बाद अपने आप आपके बच्चों को मिल जाएगी, तो आप बड़ी गलतफहमी में हैं. बिना वसीयत या साफ कानूनी निर्देश के, आपके क्रिप्टो वॉलेट की चाबी (Private Key) खो जाने पर दुनिया की कोई भी अदालत या सरकार उसे रिकवर नहीं करा सकती. इसका सीधा असर आपके परिवार के आर्थिक भविष्य पर पड़ता है. इसलिए आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत यही है कि आप अपनी वित्तीय प्लानिंग में डिजिटल एस्टेट प्लानिंग को भी शामिल करें, ताकि आपकी डिजिटल विरासत आपके अपनों के काम आ सके.

1. डिजिटल वसीयत में क्या-क्या शामिल होता है?

आपकी डिजिटल विरासत को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

वित्तीय डिजिटल एसेट्स: बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी (क्रिप्टो वॉलेट की प्राइवेट कीज़), डिजिटल बैंक अकाउंट्स, ट्रेडिंग ऐप्स (जैसे Groww, Zerodha), पेटीएम/गूगल पे वॉलेट्स, और रिवॉर्ड पॉइंट्स.

सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन: फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), लिंक्डइन, यूट्यूब चैनल और आपकी ईमेल आईडी (जीमेल, याहू आदि).

पर्सनल डेटा और क्लाउड स्टोरेज: गूगल ड्राइव, आईक्लाउड, ड्रॉपबॉक्स में रखी तस्वीरें, वीडियो, ज़रूरी दस्तावेज़ और आपके ब्लॉग या वेबसाइट के डोमेन.

2. डिजिटल वसीयत बनाने का कानूनी तरीका क्या है?

भारत में 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' (Indian Succession Act, 1925) के तहत वसीयत बनाई जाती है. हालांकि इसमें 'डिजिटल एसेट्स' शब्द को अलग से स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन आप अपनी सामान्य वसीयत में ही डिजिटल एसेट्स का क्लॉज़ जोड़कर इसे पूरी तरह कानूनी रूप दे सकते हैं. टेक जर्नल्स में 'Digital Estate Planning' और 'Crypto Inheritance' की रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल वारिस तय करने के लिए आपको निम्न स्टेप्स फॉलो करने होंगे.

चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

एसेट्स की सूची (Inventory) बनाएं: अपने सभी डिजिटल अकाउंट्स, उनके यूजरनेम और वो कहां स्थित हैं, इसकी एक लिस्ट बनाएं. ध्यान रहे: इस सूची में कभी भी अपने पासवर्ड या पिन (PIN) न लिखें.

वारिस (Beneficiary) तय करें: तय करें कि कौन सा अकाउंट या क्रिप्टो का हिस्सा किस व्यक्ति को मिलेगा. आप चाहें तो किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति को अपना 'डिजिटल एक्जीक्यूटर' (Digital Executor) भी चुन सकते हैं, जो आपकी मृत्यु के बाद इन खातों को बंद करने या ट्रांसफर करने का काम करेगा.

वसीयत को ड्राफ्ट करें: एक सादे कागज़ पर या स्टैम्प पेपर पर साफ शब्दों में लिखें कि आपके बाद किस डिजिटल एसेट्स का मालिकाना हक किसे मिलेगा.

हस्ताक्षर और गवाह (Witness): वसीयत पर आपके हस्ताक्षर और दो गवाहों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है.

रजिस्ट्रेशन (वैकल्पिक लेकिन सुरक्षित): वसीयत को कानूनी रूप से और मजबूत बनाने के लिए आप इसे सब-रजिस्ट्रार के दफ्तर में रजिस्टर करवा सकते हैं.

3. तकनीकी रूप से इसे कैसे लागू करें? (पासवर्ड शेयर किए बिना)

कानूनी वसीयत के अलावा, आपको तकनीकी टूल्स का इस्तेमाल करना होगा ताकि आपके वारिस को उन खातों का एक्सेस मिल सके:

गूगल का 'Inactive Account Manager': इसके ज़रिए आप तय कर सकते हैं कि अगर आप 3 या 6 महीने तक अपने गूगल अकाउंट पर एक्टिव नहीं रहते हैं, तो आपके जीमेल, ड्राइव और फोटोज का एक्सेस आपके चुने हुए किसी भरोसेमंद व्यक्ति को मिल जाए.

फेसबुक/इंस्टाग्राम 'Legacy Contact': आप अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स में जाकर एक 'Legacy Contact' चुन सकते हैं, जो आपके बाद आपके अकाउंट को 'मेमोरियलाइज्ड' (यानी एक स्मृति के रूप में) रख सकता है या उसे डिलीट कर सकता है.

एप्पल 'Digital Legacy': आईफोन और आईक्लाउड यूज़र्स अपने अकाउंट में एक 'Legacy Contact' जोड़ सकते हैं, जो एक विशेष की (Key) के ज़रिए आपके बाद डेटा एक्सेस कर पाएगा.

क्रिप्टो के लिए 'Dead Man's Switch' या पासवर्ड मैनेजर: क्रिप्टो की चाबी (Private Keys) कभी भी सीधे वसीयत में न लिखें. इसके लिए आप Bitwarden या 1Password जैसे पासवर्ड मैनेजर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनमें 'इमरजेंसी एक्सेस' का फीचर होता है.

एक ज़रूरी सलाह: डिजिटल वसीयत में कभी भी अपने पासवर्ड न लिखें क्योंकि वसीयत कई बार सार्वजनिक (जैसे प्रोबेट प्रक्रिया के दौरान) हो सकती है. इसके बजाय, वारिस को यह बताएं कि पासवर्ड मैनेजर या मास्टर की (Master Key) कहां सुरक्षित रखी है (जैसे किसी बैंक लॉकर में).

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