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Shubhanshu Shukla 28 घंटे बाद ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने, जानिए ISRO ने कितना पैसा दिया इसके लिए

Shubhanshu Shukla Axiom-4 Mission: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन पायलट शुभांशु शुक्ला 25 जून को Axiom-4 Mission पर तीन अन्य एस्ट्रोनॉट्स के साथ अंतरिक्ष में रवाना हुए थे. करीब 28 घंटे बाद उनका रॉकेट International Space Station पर पहुंच गया है. इस मिशन पर उन्हें ISRO ने भेजा है.

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Shubhanshu Shukla 28 घंटे बाद ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने, जानिए ISRO ने कितना पैसा दिया इसके लिए
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Shubhanshu Shukla Axiom-4 Mission: भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के ग्रुप कैप्टन पायलट शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) ने आखिरकार इतिहास रच दिया है. पांच बार टलने के बाद उनका Axiom-4 Mission दो दिन पहले बुधवार (25 जून) को दोपहर 12.01 बजे इंटरनेशनल अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) के लिए रवाना हुआ था. एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन-9 रॉकेट से रवाना हुआ मिशन करीब 28 घंटे लंबे सफर के बाद 26 जून की शाम 4.01 बजे ISS पर पहुंच गया है. इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष स्टेशन में कदम रखने वाले पहले इंडियन एस्ट्रोनॉट बन गए हैं. लखनऊ निवासी शुभांशु शुक्ला को इस मिशन पर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने भेजा है. इसरो का मकसद इस अभियान के जरिये अपने गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के लिए अनुभव जुटाना है, जिसमें पहली बार भारत अपने दम पर अंतरिक्ष में इंसान को भेजने की तैयारी में है. क्या आप जानते हैं कि इसके लिए शुभांशु शुक्ला को अंतरिक्ष में भेजने पर इसरो ने कितना पैसा खर्च किया है? चलिए हम आपको बताते हैं.

अमेरिकी कंपनी के मिशन में गए हैं शुभांशु
इसरो ने शुभांशु को जिस Axiom-4 Mission पर भेजा है, वो एक प्राइवेट कंपनी Axiom Space का मिशन है. यह मिशन एक्सिओम स्पेस ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और स्पेसएक्स के साथ पार्टनरशिप में किया है. इस मिशन के जरिये एक्सिओम स्पेस आम आदमी को अंतरिक्ष का सफर करने के लिए तैयारी करने का अनुभव जुटा रही है. इस मिशन में एक्सिओम स्पेस ने भारत के शुभांशु शुक्ला के अलावा हंगरी और पोलैंड के भी दो एस्ट्रोनॉट भेजे हैं, जबकि नासा की तरफ से एक अमेरिकी एस्ट्रोनॉट इस मिशन में उनके साथ गया है. 

इसरो ने खर्च किए हैं इस मिशन पर 548 करोड़ रुपये
एक्सिओम-4 मिशन पर शुभांशु शुक्ला को भेजने में आने वाले पूरे खर्च का अनुमान केंद्र सरकार के डिपार्मेंट ऑफ स्पेस (DoS) ने पिछले दिनों जारी किया था. इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल 715 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान लगाया गया था, जिसमें से 548 करोड़ रुपये शुभांशु को एक्सिओम-4 मिशन में एक सीट दिलाने के लिए खर्च किए गए हैं. दिसंबर-2024 में जारी एक आंकड़े के मुताबिक, उस समय तक करीब 413 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे, जबकि 135 करोड़ रुपये का खर्च और होने का अनुमान था.

क्या होगा भारत को इतने पैसे खर्च करने का लाभ
इसरो साल 2027 तक गगनयान मिशन को लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसमें 3 एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. शुभांशु शुक्ला भी गगनयान मिशन के 3 एस्ट्रोनॉट्स में से एक हैं. उनके एक्सिओम-4 मिशन से भारत को रियल फ्लाइट अनुभव मिलेगा. इसरो के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर डायरेक्टर तपन मिश्रा के मुताबिक, रियल फ्लाइट अनुभव नहीं होने पर पहले खाली फ्लाइट्स भेजनी पड़ती. खाली फ्लाइट भेजने पर इसरो को इससे कहीं ज्यादा खर्च करना पड़ता, जितना अब शुभांशु को एक्सिओम मिशन पर भेजने में खर्च हुआ है. इस मिशन से शुभांशु की सिमुलेटर पर ली गई ट्रेनिंग को असल फ्लाइट में परखने का मौका मिल गया है, जो गगनयान उड़ाने से पहले बेहद अहम है. शुभांशु को अब पता है कि असल में अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद यान उड़ाने पर किस तरह की परेशानियों से जूझना पड़ सकता है. इसके अलावा शुभांशु इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से लौटकर अपनी ऑब्जर्वेशन रिपोर्ट दाखिल करेंगे, जिससे भारतीय वैज्ञानिकों को अपना स्पेस स्टेशन डिजाइन करने के लिए वो जानकारी मिलेगी, जो विदेशी वैज्ञानिक साझा नहीं करते. बता दें कि भारत ने भी 2035 तक अपना इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बनाने का टारगेट तय किया है.

14 दिन तक ISS पर रहकर अनुभव लेंगे शुभांशु
एक्सिओम-4 मिशन के चारों एस्ट्रोनॉट्स 14 दिन तक ISS पर रहेंगे. इस दौरान उन्हें कई तरह के अनुभव लेने का मौका मिलेगा. माइक्रोगैविटी से शरीर पर पड़ने वाले असर से लेकर मेंटल हेल्थ में होने वाले बदलाव तक का अनुभव वे दर्ज करेंगे. साथ ही वे अपने साथ इसरो की तरफ से भेजे गए 7 वैज्ञानिक प्रयोग भी करेंगे, जिनकी रिपोर्ट आने वाले मिशन के लिए अहम होगी. इनमें अंतरिक्ष में रहने के दौरान खाने के लिए बनाया गया विशेष खाना भी शामिल है. ये सभी अनुभव इसरो के अपने मिशन में उसके एस्ट्रोनॉट्स के काम आएंगे. दूसरे शब्दों में कहें तो इस मिशन के बाद शुभांशु शुक्ला गगनयान मिशन के अपने बाकी साथियों के लिए एक मेंटॉर की तरह रहेंगे, जो उन्हें अंतरिक्ष में जाने के लिए सही तैयारी कराएंगे.

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