डीएनए एक्सप्लेनर
जैविक खेती का चलन इन दिनों तेजी से बढ़ा है. लोग स्वास्थ्य कारणों से ऐसे प्रोडक्ट्स खरीदना चाह रहे हैं जिनका उत्पादन जैविक तरीके से हुआ है.
डीएनए हिंदी: रासायनिक उर्वरकों का कृषि के क्षेत्र में अनियंत्रित इस्तेमाल खेती योग्य जमीनों के लिए धीमा जहर है. कृत्रिम उर्वरक शरीर और मृदा (मिट्टी) दोनों के लिए नुकसानदेह हैं. इनमें मौजूद हानिकारिक तत्व धरती की उर्वरा क्षमता को प्रभावित करते हैं साथ ही जल प्रदूषण के लिए भी जिम्मेदार हैं.
उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से पैदा होने वाले खाद्य पदार्थ भी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं. ऐसे में सुरक्षित और स्वस्थ खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग ने ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) का चलन बढ़ा दिया है.
अब ऑर्गेनिक फार्मिंग की मांग तेजी से बढ़ी है. एक बड़ा उपभोक्ता वर्ग ऐसा तैयार हो रहा है जो उर्वरकों और कीटनाशकों के न्यूनतम इस्तेमाल से तैयार फसलों को दैनिक तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है. वजह यह है कि प्राकृतिक तौर पर विकसित अनाज या फल का उपयोग हो जिससे शरीर स्वस्थ और निरोग रहे.
क्यों जरूरी है जैविक खेती?
रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बने कृत्रिम उर्वरक मिट्टी की उत्पादन क्षमता को प्रभावित करते हैं. ये धरती को बंजर भी बना सकते हैं. कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. पर्यावरण के लिए भी कृत्रिम उत्पाद संकट पैदा करते हैं. उर्वरकों में मौजूद हानिकारक तत्व पानी में मिलकर भूमिगत जल को भी प्रभावित करते हैं साथ ही सतह पर मौजूद जल को प्रदूषित करते हैं. उर्वरकों में इस्तेमाल होने हानिकारिक तत्वों की वजह से जलीय जीवों को भी खतरा पहुंचता है जो इको सिस्टम के लिए नुकसानदेह है.
कैसे होती है जैविक खेती?
उर्वरकों के अविष्कार से पहले उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भी जैविक उत्पादों का इस्तेमाल होता था. गोबर की खाद, कंपोस्ट, केंचुआ खाद (Vermi-Compost), फसलों के अपशिष्ट पदार्थ को सड़ाना, सनई और ढैंचा की बुवाई कर किसान अपने खेत की उर्वरा क्षमता को बढ़ाते थे. यह प्रकृति संगत था. ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते थे.
उर्वरकों के इजाद होने से फसलों का उत्पादन तो तेजी से बढ़ा लेकिन स्वास्थ्य लोगों का प्रभावित होने लगा. जैविक विधि अपनाने से प्राकृतिक तौर पर ही नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीयम, कैल्शियम और एक्टीनोमाइसिट्स जैसे जरूरी पोषक तत्व पौधों को मिल जाते थे. जैविक खेती में कृषि के इन्हीं पुराने मापदडों का पालन होता है. खेती के लिए आधुनिक किसान एक बार फिर इन्हीं विधियों का सहारा ले रहे हैं.
क्यों महंगे होते हैं ऑर्गेनिक प्रोडक्ट?
जैविक खेती से फसलों का अंधाधुंध उत्पादन नहीं हो पाता है. जैविक उत्पाद अब महंगे हो गए हैं. न तो पहले की तरह लोग पशु पालन कर रहे हैं, न ही गोबर से बनी खाद, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट अब व्यापक स्तर पर तैयार की जा रही है. ऐसे उत्पादों का सीमित तौर पर उपलब्ध होना इनके महंगे होने का कारण है. इन्हें खरीदने के लिए किसानों को अच्छी-खासी पूंजी लगानी पड़ती है. जब फसल तैयार होती है तो किसान अपनी पूंजी मुनाफे के साथ वापस चाहते हैं. इसलिए ऐसे खाद्य उत्पादो के दाम, सामान्य उर्वरकों के इस्तेमाल से तैयार खाद्य उत्पादों की तुलना में महंगे होते हैं.
क्यों बढ़ रहा है जैविक उत्पादों के इस्तेमाल का चलन?
मॉर्डन लाइफ स्टाइल में लोग फिटनेस के प्रति जागरूक हुए हैं. लोग हेल्दी फूड्स को तरजीह दे रहे हैं. ऑर्गेनिक प्रोडक्टस मंहगे होने के बाद भी लोग खरीदना चाह रहे हैं. ऑर्गेनिक उत्पादों में हानिकारक तत्वों की मौजूदगी कम या न के बराबर होती है. ऐसे में लोगों का रुझान ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ा है.
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी डॉक्टर ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल की सालह देते हैं. ऐसी कई स्टडी भी सामने आई है जिनमें कहा गया है कि उर्वरकों से तैयार हुए खाद्य पदार्थों में कैंसर कारक तत्व मौजूद होते हैं. वहीं कुछ स्टडीज में एलर्जी बढ़ने की बात भी सामने आई है. यही वजह है कि लोग बड़ी संख्या में जैविक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.