डीएनए एक्सप्लेनर
Improving dairy farm productivity with IoT: भारत का डेयरी उद्योग सदियों से पुराने ढर्रे पर चल रहा था, जहां दूध की बर्बादी और पारदर्शिता का अभाव था. अब स्टेलैप्स टेक्नोलॉजीज अपने डिजिटल समाधानों से किसानों की आय बढ़ा रही है और दूध की गुणवत्ता को सीधे तकनीक से जोड़ रही है.
अमूल के विज्ञापनों में दिखने वाली वह सादगी और ग्रामीण भारत की तस्वीर आज भी हमारे दिल के करीब है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस दूध के सफर में अब भी बहुत कुछ ऐसा है जो हमारी नजरों से छिपा है? भारत में हर साल लाखों लीटर दूध खराब हो जाता है, जिसका सीधा असर किसान की जेब और आपकी सेहत पर पड़ता है. इस पुरानी समस्या को हल करने के लिए विप्रो के पांच पूर्व इंजीनियरों ने अपनी कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर खेतों का रुख किया और स्टेलैप्स टेक्नोलॉजीज की नींव रखी.
देश के करीब 60 प्रतिशत दूध का प्रबंधन आज भी अनौपचारिक 'दूधवालों' द्वारा किया जाता है. संगठित क्षेत्र की कमी और पुरानी तकनीक के कारण दूध की गुणवत्ता में अस्थिरता और बर्बादी एक बड़ी समस्या बनी हुई है. एसोचैम और एमआरएसएस के आंकड़ों के अनुसार, हर साल देश में उत्पादित कुल दूध का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है.
स्टेलैप्स टेक्नोलॉजीज एक अग्रणी डेयरी-टेक स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना 2011 में विप्रो के पांच पूर्व इंजीनियरों ने की थी. यह कंपनी आईओटी (IoT), डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग के जरिए डेयरी सप्लाई चेन को डिजिटाइज़ करती है. यह स्टार्टअप पशु स्वास्थ्य की निगरानी करने वाले स्मार्ट उपकरणों, स्वचालित दूध संग्रहण इकाइयों (AMCU) और डिजिटल वित्तीय समाधानों (MooPay) के माध्यम से दूध की बर्बादी को कम करने, गुणवत्ता सुधारने और सीधे किसानों की आय बढ़ाने का काम कर रहा है, जिससे डेयरी फार्मिंग एक आधुनिक और पारदर्शी व्यवसाय बन रही है.
अक्सर किसान इस बात से परेशान रहते हैं कि गाय या भैंस दूध कम क्यों दे रही है या वो बीमार क्यों है. स्टेलैप्स का 'मू-ऑन' (mooON) उपकरण इस परेशानी का समाधान है. यह एक पहनने योग्य डिवाइस है जो पशु के स्वास्थ्य पर नजर रखता है. इससे किसानों को यह पता चल जाता है कि पशु कब बीमार है या उसे पोषण की क्या जरूरत है. मजे की बात ये है कि इस तकनीक से दूध उत्पादन में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी गई है. यह सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि छोटे किसान की वो ताकत है जो उसे बड़े डेयरी मालिकों की बराबरी में खड़ा कर रही है.
क्या आप जानते हैं कि दूध संग्रहण केंद्रों पर अक्सर डेटा में हेराफेरी होती है? स्टेलैप्स ने इस पर लगाम लगाने के लिए स्मार्ट एएमसीयू (AMCU) तैयार किया है. यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक सिस्टम है. जैसे ही किसान दूध डालता है, उसकी गुणवत्ता और मात्रा का हिसाब तुरंत क्लाउड पर चला जाता है. यहाँ कोई मैन्युअल एंट्री नहीं होती, इसलिए धांधली की गुंजाइश ही नहीं बचती. जब पारदर्शिता आती है, तो दूध की सही कीमत किसान को मिलती है और मिलावट का खतरा खुद-ब-खुद कम हो जाता है.
भारत में छोटे किसानों के लिए बैंक से लोन लेना एक बड़ा सिरदर्द रहा है. मजबूरन उन्हें साहूकारों के पास जाना पड़ता है. स्टेलैप्स ने इस समस्या को भांपते हुए 'मूपे' (MooPay) लॉन्च किया है. यह डिजिटल वित्तीय सेवा किसानों को आकर्षक ब्याज दरों पर लोन दिलाती है और भुगतान को सीधा उनके खाते में ट्रांसफर करती है. इसका असर यह हुआ है कि बिचौलियों का खेल खत्म हो गया है और किसानों का पैसा अब सीधा उनकी जेब में आता है.

एक गौर करने वाली बात ये है कि स्टेलैप्स का बिजनेस मॉडल 'जीरो कैपिटल' पर टिका है. यानी किसान को भारी-भरकम मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं है, बस सदस्यता लें और काम शुरू करें. इनका लक्ष्य सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अफ्रीका और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में अपनी तकनीक का डंका बजाना है. यह स्टार्टअप सिखाता है कि अगर इरादे पक्के हों, तो आईटी के इंजीनियर भी हल चलाने वाले का भाग्य बदल सकते हैं. आने वाले समय में, यह डिजिटल क्रांति संगठित डेयरी क्षेत्र को 1.5 ट्रिलियन रुपये के पार ले जाने की तैयारी में है.
क्रिसिल (CRISIL) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय संगठित डेयरी क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है. चालू वित्त वर्ष (2025-26) में संगठित डेयरी क्षेत्र के राजस्व में 13-15 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. यह वृद्धि मुख्य रूप से दूध और पारंपरिक उत्पादों (जैसे मक्खन और घी) की निरंतर मांग, उच्च वॉल्यूम और मूल्य वर्धित उत्पादों (Value-Added Products - VAP) के प्रति बढ़ती उपभोक्ता रुचि के कारण है.
क्रिसिल रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार स्टेलैप्स टेक्नोलॉजीज अब केवल एक डेयरी-टेक स्टार्टअप नहीं रहा, बल्कि एक व्यापक 'एंड-टू-एंड' समाधान प्रदाता बन गया है. mooMark: स्टेलैप्स ने अपने 'mooMark' ब्रांड के माध्यम से वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों (जैसे आइसक्रीम और अन्य निजी लेबल उत्पाद) के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर बहुत जोर दिया है. VCCircle की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने अक्टूबर 2024 में 26 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी, जिसका उद्देश्य mooMark व्यवसाय को बढ़ाना और छोटे किसानों को अपनी सप्लाई चेन में शामिल करना है.कंपनी अपनी प्रोसेसिंग क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रही है, (उत्तर प्रदेश और बेंगलुरु के बाद नए संयंत्रों की योजना). स्टेलैप्स का लक्ष्य अगले 36-48 महीनों में IPO लाने का भी है.
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