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DNA एक्सप्लेनर: IAS Cader Rules Ammendment क्या है जिसका विरोध कर रहे तमिलनाडु-केरल जैसे राज्य

IAS Cadre Rules 1954 में बदलाव के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर केरल और तमिलनाडु ने आपत्ति जताते हुए इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है.

DNA एक्सप्लेनर: IAS Cader Rules Ammendment क्या है जिसका विरोध कर रहे तमिलनाडु-केरल जैसे राज्य
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डीएनए हिंदी: IAS Cadre Rules 1954 में प्रस्तावित बदलावों पर कई राज्य सरकारों की ओर से सख्त आपत्ति दर्ज की जा रही है. गैर-बीजेपी शासित राज्यों में से अब केरल और तमिलनाडु ने भी इसे संघीय भावना के खिलाफ बताया है. इसका विरोध करते हुए पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने भी इसे संघीय भावना के साथ खिलवाड़ बताया है. 

क्या है केंद्र सरकार का प्रस्तावित बदलाव 
बता दें कि केंद्र सरकार ने आईएएस कैडर के नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है. नए बदलावों के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले का अधिकार केंद्र के पास सुरक्षित रहेगा. प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, अगर राज्य सरकार की किसी तबादले को लेकर असहमति है तो अंतिम अधिकार केंद्र सरकार का ही होगा. गैर-बीजेपी शासित राज्य सरकारें इस प्रस्ताव के विरोध में हैं. 

अब तक क्या है नियम 
अभी तक के नियमों के मुताबिक, अधिकारियों की भर्ती केंद्र सरकार ही करती है. राज्यों के कैडर दिए जाने के बाद अधिकारी राज्य सरकार के अधीन हो जाते हैं. अधिकारियों को केंद्र सरकार की सहमति के बाद ही किसी दूसरे राज्य या केंद्र सरकार के विभाग में नियुक्त किया जा सकता है. माना जा रहा है कि बजट सेशन में केंद्र सरकार यह प्रस्ताव लेकर आ सकती है. 

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प्रस्तावित बदलाव का विरोध कर रहे हैं ये राज्य 
केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध कई राज्य सरकारें और विपक्षी दल कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल के साथ जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी इसका विरोध किया है. 

विरोध के पीछे मुख्य तर्क संघीय भावना का है
विरोध करने वाली सरकारों को और दलों का इसके पीछे प्रमुख तर्क है कि यह देश की संघीय ढांचा की मूल भावना के विरोध में. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसका विरोध करते हुए केंद्र को लिखे पत्र में कहा है कि मैं इस प्रस्ताव के विरोध में अपनी कठोर आपत्ति दर्ज करती हूं. यह संघीय ढांचे और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है. अगर इसे लागू कर दिया जाएगा तो दशकों से केंद्र और राज्य सरकारों के सामंजस्यपूर्ण तरीके से चल रहे कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. 

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प्रस्ताव के समर्थन में भी ठोस तर्क मौजूद 
ऐसा नहीं है कि इस प्रस्ताव के विरोध में ही सिर्फ वाजिब तर्क है. प्रस्ताव के समर्थन में भी सबसे बड़ा तर्क है कि अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र के जरिए ही होती है. इसके अलावा, मौजूदा व्यवस्था भी है कि किसी अधिकारी का कैडर बदला जा सकता है और जरूरत होने पर केंद्र सरकार के विभाग में नियुक्त किया जा सकता है. केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा बल्कि ट्रांसफर के दौरान होने वाली रुकावटों को कम करने में सफलता मिलेगी.

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