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MGNREGA: इन राज्यों में मिलती है सबसे कम मजदूरी? जानिए दिल्ली में क्यों हो रहा है प्रदर्शन

MGNREGA Workers Protest: केंद्र सरकार पर मनरेगा मजदूरों का 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. देशभर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग MGNREGA से जुड़े हुए हैं.

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MGNREGA: इन राज्यों में मिलती है सबसे कम मजदूरी? जानिए दिल्ली में क्यों हो रहा है प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे मनरेगा मजदूर 

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डीएनए हिंदी: देश भर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत काम करने वाले हजारों मजदूर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. मंच के पीछे 'नरेगा संघर्ष मोर्चा' का एक बड़ा सा बैनर लगा हुआ है. देश के 15 राज्यों से हाथों में झंडे लेकर हजारों की तादाद में मजदूर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार पर मनरेगा मजदूरों का 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. इसके चलते मजदूरों को दिल्ली का रुख करना पड़ा है.

इस विरोध प्रदर्शन में भारी तादाद में महिलाएं भी पहुंची हैं. इनमें 55 साल की एक महिला कमला देवी हैं, जो राजस्थान के राजसमंद जिले से ट्रेन पकड़कर दिल्ली पहुंची हैं. कमला देवी का कहना है, 'मेरे पास कोई काम धंधा नहीं है, मनरेगगा के साहरे जिंदगी चल रही है. मनरेगा के तहत एक दिन मजदूरी करने पर 231 रुपये मिलते हैं. साल में मुश्किल से 100 दिन काम मिल पाता है. 231 रुपये काफी कम है, इतनी महंगाई में इतने कम पैसे से घर चलाना बहुत मुश्किल है. लेकिन सरकार पिछले साल के उस बकाया पैसे को भी नहीं दे रही जिससे हम अपना जीवन चला सकें.'

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केंद्र ने मनरेगा का बजट 25 हजार करोड़ रुपये घटाया
गौरतलब है कि कोरोना के समय केंद्र सरकार ने मनरेगा का बजट 70 हजार करोड़ से बढ़ाकर 1. 11 लाख करोड़ कर दिया था. लेकिन इस साल के बजट 2022 में सरकार ने मनरेगा का बजट 25 हजार करोड़ रुपये से घटाकर 73 हजार करोड़ रुपये कर दिया था. साथ ऐप के जरिए फोटो अपलोड कराने के नियम से भी मजदूर परेशान हैं. कुछ मजदूरों का फोटो मनरेगा ऐप पर अपलोड ही नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से वह इस योजना से कट गए है. यही नहीं झारखंड और पश्चिम बंगाल में मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोप में केंद्र सरकार ने फंड ही नहीं दिया है. इससे वहां के मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

मजदूरों को नहीं मिल रहा मनरेगा का पैसा

किस राज्य में कितने रुपये मिलती है मनरेगा में मजदूरी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत हर राज्य में मजदूरी करने वालों को अलग-अलग दरों से पैसा दिया जाता है. इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और त्रिपुरा में मनरेगा के तहत सबसे कम पैसा दिया जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों में प्रतिदिन मनरेगा न्यूनतम मजदूरी दर 220 रुपये से भी कम है. वहीं, हरियाणा, गोवा, केरल, कर्नाटक और पंजाब में अन्य राज्य के मुकाबले मनरेगा के तहत अधिका पैसा दिया जाता है.

मनरेगा मजदूरी दर: सबसे कम देने वाले राज्य
मध्य प्रदेश- 204 रुपये (प्रति मजदूर)
छत्तीसगढ़- 204 रुपये (प्रति मजदूर)
झारखंड- 210 रुपये (प्रति मजदूर)
बिहार- 210 रुपये (प्रति मजदूर)
त्रिपुरा- 212 रुपये (प्रति मजदूर)

मनरेगा मजदूरी दर: सबसे ज्यादा देने वाले मजदूर (Top 5 States)
हरियाणा- 331 रुपये (प्रति मजदूर)
गोवा- 315 रुपये (प्रति मजदूर)
केरल- 311 रुपये (प्रति मजदूर)
कर्नाटक- 309 रुपये (प्रति मजदूर)
पंजाब- 282 रुपये (प्रति मजदूर)

न्यूनतम मजदूरी से भी कम मिल रहा मनरेगा में पैसा

UP में न्यूनतम मजदूरी से मनरेगा में 154 रुपये दिए जाते हैं कम
बता दें कि केरल में न्यूनतम मजदूरी दर 490 रुपये है लेकिन मनरेगा के तहत सिर्फ 311 रुपये ही दिए जाते हैं. वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो न्यूनतम मजदूरी से 154 रुपये कम दिए जाते हैं. मनरेगा के तहत मिल रही न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाने के लिए कई सामाजाकि संगठन मांग कर रहे हैं. राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून सितंबर 2005 में लागू किया गया था. कानून में कम से कम 100 दिनों का रोजगार देने की बात कही गई है. कानून के तहत व्यक्ति के मांगने पर 15 दिनों में रोजगार देना अनिवार्य है, अगर सरकार शख्स को रोजगार देने में नाकाम रहती है तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा.

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मनरेगा से जुड़े हैं 30 करोड़ लोग
MGNREGA से देशभर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं. जिसमें करीब 15 करोड़ एक्टिव वर्कर हैं यानी इतने बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार दिया जाता है. साल 2018-19 में सरकार ने मनरेगा के लिए 61 करोड़ रुपये का बजट पास किया था. जिसे कोरोना काल में बढ़ाकर 1.11 लाख करोड़ कर दिया गया था. सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस दौरान मनरेगा के तहत लाखों लोगों की जिंदगी बचाने का काम किया गया. लाखों लोगों को मनरेगा के तहत गांवों में रोजगार मिला. हालांकि,  साल 2022-23 के बजट में सरकार ने 25 हजार करोड़ रुपये की कटौती कर दी और अनुमानित बजट 73 हजार करोड़ रुपये रखा गया.

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