डीएनए एक्सप्लेनर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी चार्ली किर्क की गुरुवार को हत्या कर दी गई. इसके बाद अमेरिका के गन कल्चर को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है. तो चलिए हम आपको अमेरिका के इस गन कल्चर के पीछे की वजह बताते हैं.
'पूरा अमेरिका भर चुका है. अब भारतीयों के लिए और वीजा जारी करने की जरूरत नहीं है.' 2 सितंबर को ये बयान देने वाले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी चार्ली किर्क की गुरुवार को हत्या कर दी गई. किर्क उटा वैली यूनिवर्सिटी में स्टेज से सवालों के जवाब दे रहे थे, जब उन पर जानलेवा हमला हुआ. इसके बाद अमेरिका के गन कल्चर को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है. गोलीबारी की घटनाएं अमेरिका के लिए नई नहीं हैं. एक पूर्व राष्ट्रपति की हत्या तक इसके चलते हो चुकी है. हर नई घटना के बाद गन कल्चर को लेकर तर्क-वितर्क शुरू होता है और मामला ठंडा पड़ते ही लोग इसको भूल जाते हैं. सवाल ये है कि अमेरिकी समाज में बंदूक संस्कृति की शुरुआत कैसे हुई और इस पर इतनी बहस के बावजूद सरकारें लगाम क्यों नहीं लगातीं. सवाल मौजूं इसलिए है क्योंकि साल 2020 से लेकर 2025 तक यानी पिछले पांच साल में अमेरिका में गोलीबारी की घटनाओं में 107,750 लोगों की मौत हो चुकी है और 2 लाख से ज्यादा घायल हुए हैं. गन कल्चर पर नजर रखने वाली संस्था एवरी टाउन फॉर गन सेफ्टी के अनुसार पिछले एक साल में ही गोलीबारी की घटनाओं में 28,308 लोगों की जान जा चुकी है. चर्च, स्कूल, कॉलेज, बाजार- कोई ऐसी जगह नहीं जहां एक आम अमेरिकी गोलीबारी के डर से महफूज रह सके, लेकिन सरकारें इसके खिलाफ कुछ नहीं कर रहीं.
अमरीकियों के बंदूक प्रेम का ये आलम है कि 33 करोड़ की आबादी वाले देश में लोगों के पास 40 करोड़ हथियार हैं. करीब एक-तिहाई लोगों के पास बंदूकें हैं. दुनिया की कुल आबादी का 4 फीसदी अमेरिका में रहती है, लेकिन पूरे विश्व में आम नागरिकों के पास गोली-बंदूकों का 46 प्रतिशत अकेले इस देश में है. और तो और, अमेरिकी सेना भी इस मामले में पीछे है. अमेरिकी लोगों के पास अपनी देश की सेना के मुकाबले करीब 100 गुना ज्यादा हथियार हैं. देश के संविधान में लोगों को हथियार रखने का अधिकार मिला हुआ है. हालत ये है कि ग्रॉसरी स्टोर से लेकर सुपरमार्केट तक, आम लोग कहीं से भी बंदूक खरीद सकते हैं. इसके अलावा हर सप्ताह शहरों में बंदूकों का एग्जीविशन लगता है. खरीदने के लिए खास प्रक्रिया भी नहीं है. इंस्टैंट बैकग्राउंड चेकिंग में खरीदने वाले का नाम, पता, नस्ल, जन्म तिथि और नागरिकता जांची जाती है. फिर स्टोर के कर्मचारी एफबीआई को कॉल कर खरीदार का बैकग्राउंड चेक करने का आग्रह करता है. एफबीआई वाले नेशनल क्रिमिल बैकग्राउंड चेक सिस्टम में उसका नाम डालते हैं. ये सब कुछ मिनटों में हो जाता है और खरीदार को बंदूक मिल जाती है.
अमेरिका में गन कल्चर की नींव अमेरिकी क्रांति के साथ ही पड़ गई थी जिसमें गोला-बारूद की भूमिका अहम रही थी. फिर साल 1791 में दूसरे संविधान संशोधन ने गन कल्चर के लिए मजबूत जमीन तैयार की. इसमें कहा गया कि आम नागरिकों के हथियार रखने के अधिकार की सुरक्षा की जाएगी. 19वीं सदी के अंत में पॉप कल्चर ने बंदूक प्रेम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया. फिर इसका बाजारीकरण शुरू हुआ. दूसरे विश्व युद्ध के बाद हॉलीवुड की फिल्मों में बंदूक को कई बार देशभक्ति से जोड़कर दिखाया. नेशनल राइफल एसोसिएशन जैसे संगठन गन कल्चर के पक्ष में अब भी मजबूती से खड़े हैं. ये संगठन लाइसेंस की प्रक्रिया में नरमी की वकालत करते हैं. नतीजा आज हर घर में बंदूक है और किसी भी गली में कभी गोलीबारी हो सकती है.
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ऐसा नहीं है कि अमेरिकी समाज में इस पर बहस नहीं होती. अमेरिका में गन कल्चर यहां होने वाली मौतों का आतंकवाद से भी बड़ा कारण है, लेकिन बढ़ते अपराध और मौतों के सारे तर्क हथियार रखने के अधिकार के आगे कुंद पड़ जाते हैं. व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा के बीच का संतुलन बिठाना अमेरिका के लिए अब तक दुरूह साबित हुआ है. यहां की सरकारों में भी इसको लेकर इच्छा शक्ति का अभाव दिखता है. बराक ओबामा ने गन कंट्रोल पर बहस शुरू की, लेकिन आम राय नहीं बनना सके. रिपब्लिकन पार्टी तो शुरू से ही गन कंट्रोल के खिलाफ है. ऐसे में आम राय बने भी तो कैसे. दो राजनीतिक दलों वाले देश में एक गन कल्चर का खुला समर्थन करे तो मान लेना चाहिए कि यह आम अमेरिकी की पसंद-नापसंद से ज्यादा सियासत से जुड़ा मामला है.
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