Advertisement
हिंदी न्यूज़डीएनए एक्सप्लेनर

कमाते रुपये में हैं पर खर्च डॉलर में हो रहा? जानें कैसे नेटफ्लिक्स से लेकर आईफोन तक बिगाड़ रहे आपका वित्तीय फॉर्मूला

Rupee income dollar expenses financial impact:भारतीय मिडिल क्लास की कमाई भले ही रुपये में हो, लेकिन विदेशी सब्सक्रिप्शन, गैजेट्स और ट्रिप्स के कारण खर्च डॉलर से तय हो रहे हैं. इस 'करेंसी मिसमैच' के वित्तीय नुकसान से बचने के लिए 'लाइफस्टाइल हेजिंग' का नया फॉर्मूला आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है.

Latest News
कमाते रुपये में हैं पर खर्च डॉलर में हो रहा? जानें कैसे नेटफ्लिक्स से लेकर आईफोन तक बिगाड़ रहे आपका वित्तीय फॉर्मूला

आपकी सैलरी को चुपके से खा रहा है 'करेंसी मिसमैच', तुरंत अपनाएं यह फॉर्मूला (फोटो एआई)

Add DNA as a Preferred Source
  • कमाई रुपये में, खर्च डॉलर में ये कैसे हो रहा है?
  • ग्लोबल लाइफस्टाइल से जेब खाली कैसे हो रही?
  • करेंसी मिसमैच का बड़ा वित्तीय जाल क्या है?
  • लाइफस्टाइल हेजिंग है नया फॉर्मूला जानते हैं?

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आपकी सैलरी जिस रफ्तार से बढ़ती है, आपके सब्सक्रिप्शन, आईफोन की कीमत और विदेश घूमने का खर्च उससे कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ जाता है? सीए सुदेशना बसु बताती है कि जाने-अनजाने में भारतीय मिडिल क्लास एक बड़े वित्तीय जाल में फंस चुका है, जिसे 'करेंसी मिसमैच' कहते हैं. हमारी कमाई तो शुद्ध रूप से भारतीय रुपये में होती है, लेकिन सुबह नेटफ्लिक्स देखने से लेकर शाम को विदेशी क्लाउड स्टोरेज या गैजेट्स खरीदने तक, हमारा लाइफस्टाइल पूरी तरह डॉलर की मजबूती से तय होने लगा है. जब भी डॉलर मजबूत होता है, आपकी जेब पर सीधा डाका पड़ता है और आपको पता भी नहीं चलता. तो चलिए सीए की नजर से समझते हैं इन हिडेन फाइनेंशियल लॉस को और कैसे इन लाइफस्टाइल खर्चों से बच सकते हैं.

विदेशी कंपनियों का वो हिडन चार्ज जो आपकी मंथली सेविंग खा रहा है 

आज के दौर में हम जो भी प्रीमियम सर्विस इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके सर्वर और हेडक्वार्टर विदेशों में हैं. जब अमेरिकी बाजार में महंगाई बढ़ती है या डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो ये कंपनियां भारत में चुपके से अपने सबस्क्रीप्शन प्लान महंगे कर देती हैं. सीए सुदेशना कहती है कि आप सोचते होंगे कि महीने के 100-200 रुपये बढ़ने से क्या फर्क पड़ता है, लेकिन जब आप इसे सालाना क्लाउड स्टोरेज, ओटीटी ऐप्स, गेमिंग पास और विदेशी सॉफ्टवेयर के कुल खर्च से जोड़ते हैं, तो यह एक बड़ी रकम बन जाती है. आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी अतिरिक्त फायदे के सीधे विदेशी कंपनियों के खातों में जा रहा है.

विदेश यात्रा और इंटरनेशनल गैजेट्स का बदलता गणित 

बात सिर्फ छोटे-मोटे ऐप्स की नहीं है. अगर आप साल में एक बार भी विदेश घूमने की योजना बनाते हैं, तो रुपया गिरते ही आपकी फ्लाइट टिकट्स, होटल बुकिंग और वहां खाने-पीने का बजट अचानक 10 से 15 फीसदी तक बढ़ जाता है. लोग सोचते हैं कि वे कुछ महीने और ज्यादा बचत करके इस खर्च को संभाल लेंगे, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि जब तक वे पैसा जमा करते हैं, डॉलर और महंगा हो जाता है. यही हाल प्रीमियम मोबाइल और लैपटॉप का है, जिनकी बेस प्राइज डॉलर में तय होती है. आप भारतीय बाजार में रहकर भी अमेरिकी महंगाई की मार झेलने को मजबूर हैं, जो कि पूरी तरह एकतरफा नुकसान है.

लाइफस्टाइल हेजिंग का वो नया फॉर्मूला जो अमीरों का सीक्रेट था 

इस अनचाहे नुकसान से बचने के लिए अब एक्सपर्ट्स एक नया कॉन्सेप्ट दे रहे हैं, जिसे 'लाइफस्टाइल हेजिंग' कहा जाता है. कॉर्पोरेट कंपनियां तो अपने घाटे को बचाने के लिए हेजिंग करती ही थीं, लेकिन अब आम कंज्यूमर को भी यह पैंतरा अपनाना होगा. इसका सीधा सा नियम है कि अगर आपका खर्च डॉलर के प्रभाव से बढ़ रहा है, तो आपकी कमाई या निवेश का कुछ हिस्सा भी डॉलर में बढ़ना चाहिए. अगर आप अपने पोर्टफोलियो का सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स, ग्लोबल ईटीएफ या सीधे यूएस स्टॉक्स में निवेश करते हैं, तो रुपया कमजोर होने पर भी आपको वहां से मिलने वाला रिटर्न उस नुकसान की भरपाई कर देगा.

आपकी सैलरी को चुपके से खा रहा है 'करेंसी मिसमैच', तुरंत अपनाएं यह फॉर्मूला

मिडिल क्लास के लिए व्यावहारिक रणनीति और टेकअवे 

पारंपरिक तौर पर हमें हमेशा यही सिखाया गया है कि एफडी करा लो या भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगा दो. लेकिन आज के समय में जब आपका कंजम्पशन ग्लोबल हो चुका है, तो निवेश का घरेलू होना आपके लिए घाटे का सौदा साबित होगा. लाइफस्टाइल हेजिंग कोई लग्जरी नहीं बल्कि मिडिल क्लास के लिए अपनी पर्चेजिंग पावर को बचाए रखने का एक जरूरी हथियार बन चुका है. अगली बार जब आप किसी विदेशी ट्रिप की प्लानिंग करें या कोई महंगा गैजेट खरीदने की सोचे, तो उसी दिन से किसी इंटरनेशनल फंड में एक छोटी सी एसआईपी भी शुरू कर दें, ताकि करेंसी का संतुलन बना रहे और आपकी जेब पर अचानक कोई भारी बोझ न आए.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement