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भतीजे पर एक्शन, भाई पर भरोसा... आखिर मायावती के दिमाग में क्या चल रहा? जानें इनसाइड स्टोरी

UP BSP Politics: मायवाती के हवाले से बसपा ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को निकालने के बाद उसकी लड़की का आकाश आनंद पर बुरा प्रभाव रहा है. वह बसपा में फूट करवा सकती है.

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भतीजे पर एक्शन, भाई पर भरोसा... आखिर मायावती के दिमाग में क्या चल रहा? जानें इनसाइड स्टोरी

mayawati and akash anand

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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) में रविवार को बड़ा फेरबदल किया. मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand)को बीएसपी के नेशनल कोऑर्डिनेटर और अपने उत्तराधिकारी पद से हटा दिया. मायावती ने आकाश को सभी पदों से मुक्त कर दिया है. उनकी की जगह अपने भाई और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को बसपा का नेशनल कोओर्डिनेटर बनाया गया है.

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने रविवार को लखनऊ में ऑल इंडिया पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी. हालांकि इस बैठक में आकाश आनंद नहीं पहुंचे थे. मायावती ने दिसंबर 2023 में आकाश को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन पिछले साल लोकसभा चुनाव के बीच अपना फैसला वापस ले लिया था. इसकी वजह यह थी कि एक चुनावी रैली के दौरान आकाश ने बीजेपी को आतंक की सरकार करार दिया था. जिसके बाद मायावती ने अपने भतीजे को सभी पदों से हटा दिया था. हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें वापस सभी पद दे दिए गए थे.

आकाश को हटाने के पीछे क्या वजह?
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मायावती के दिमाग में चल क्या रहा है? पिछले 2 साल के अंदर आकाश आनंद पर तीसरी बार कुर्सी छीनी गई है. क्या मायावती को अपने भतीजे पर भरोसा नहीं रहा है? मायवाती के हवाले से बसपा ने कहा कि आकाश की जिस लड़की से शादी हुई थी, उसके पिता आकाश सिद्धार्थ को हाल ही में पार्टी से निकाला गया था. मायावती ने समधी अशोक सिद्धार्थ पर आरोप लगाया था कि वह पार्टी को दो गुटों में बांटने का षडयंत्र रच रहे थे. 

मायवाती के हवाले से बसपा ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को निकालने के बाद उसकी लड़की का आकाश पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. वह आकाश पर नेगेटिव प्रभाव डाल रही है. इसे गंभीरता से देखा गया है. ऐसे में पार्टी के हित के लिए आकाश पर जिम्मेदारियों का बना रहना काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. 

मायावती को शिवसेना-NCP जैसे हाल का डर
दरअसल, मायावती को डर है कि अगर आकाश पर पार्टी की जिम्मेदारी रही तो उनके ससुर और पत्नी बसपा में दो फाड़ करा सकते हैं.  उनको लगता है कि बसपा में भी महाराष्ट्र की एनसीपी और शिवसेना जैसे हालत हो सकते हैं. 

इसके अलावा मायावती ने पार्टी मीटिंग में इस बात के भी संकेत दे दिए कि उनके जीते जी पार्टी का कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा. मायावती का कहना है कि बसपा की जिम्मेदारी उसे ही मिल सकती है, जो श्री कांशीराम जी की शिष्या की तरह हर दुःख-तकलीफ उठाकर अंतिम सांस पार्टी व मूवमेंट को आगे बढ़ाएगा.

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