डीएनए एक्सप्लेनर
BSNL satellite phone buying rules: BSNL के बेहद सैटेलाइट फोन की कीमत 1.34 लाख रुपये है लेकिन ये हाईटेक फोन अगर आतंकवादियों के हाथ लग गया तो? अगर आपके मन में भी ये सवाल कौंध रहा तो आपके हर डर का जवाब इस खबर में है. इस फोन को रखने से लेकर इस्तेमाल करने और देश की सुरक्षा तक के लिए नियम तय हैं.
How satellite phone tracks calls via Ghaziabad gateway: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आप किसी ऐसी जगह फंस जाएं जहां दूर-दूर तक कोई मोबाइल टावर न हो, और अचानक आपको अपने परिवार या किसी इमरजेंसी सर्विस से बात करनी पड़े? अक्सर पहाड़ों, घने जंगलों या समुद्र के बीच में नेटवर्क गायब हो जाता है और लोग बेबस हो जाते हैं या जब देश में बाढ़, भूकंप या कोई बड़ी आफत आती है, तो सबसे पहले मोबाइल टावर गिर जाते हैं और बिजली कटने से सारे स्मार्टफोन महज़ एक डिब्बा बनकर रह जाते हैं. ऐसे मुश्किल हालातों में लोगों की जान बचाने और दुर्गम से दुर्गम इलाकों में सीधे अंतरिक्ष से संपर्क साधने के लिए सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने एक बेहद एडवांस सैटेलाइट फोन भारतीय बाजार में उतारा है.
यह फोन बिना किसी मोबाइल टावर या सिम कार्ड के, सीधे आसमान में घूम रहे इनमारसैट-4 (Inmarsat-4) सैटेलाइट की मदद से आपकी कॉल और एसएमएस कनेक्ट करवा सकता है. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत के 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर के पूरे क्षेत्रफल के साथ-साथ हमारी 7,516 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा को भी 100% कवर करती है, जहां आज तक कोई नेटवर्क नहीं पहुंच सका. लेकिन इस जादुई तकनीक के आने के बाद देश के लोगों के मन में एक गंभीर और खौफनाक सवाल उठने लगा है, क्या बिना नेटवर्क वाली इस हाइटेक कॉलिंग का गलत फायदा उठाकर आतंकवादी देश की सुरक्षा को चूना नहीं लगा पायेंगे? आइए सुरक्षा और नियमों के हर बारीक एंगल से समझते हैं इसका पूरा सच.
बीएसएनएल का यह नया सैटेलाइट फोन पूरी तरह से ग्लोबल सैटेलाइट कंपनियों (Inmarsat और Viasat) के नेटवर्क पर काम करता है. जब जमीनी नेटवर्क पूरी तरह फेल हो जाता है, तब यह सीधे अंतरिक्ष में सिग्नल भेजता है. लेकिन यह गैजेट जितना आधुनिक है, इसका खर्च आम स्मार्टफोन के मुकाबले होश उड़ा देने वाला है. बीएसएनएल ने इस फोन (IsatPhone 2) की कुल कीमत टैक्स मिलाकर 1,34,166 रुपये (1.34 लाख रुपये) तय की है. इसके अलावा इसके कॉलिंग प्लान का गणित भी बेहद महंगा है.

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) - ग्लोबल सैटेलाइट फोन सर्विस (GSPS) आधिकारिक टैरिफ और गाइडलाइंस के अनुसार कमर्शियल यूजर्स के लिए इसके पोस्टपेड प्लान 3,500 रुपये से लेकर 11,670 रुपये प्रति महीने तक जाते हैं. इसमें एक और पेंच है, इस फोन में सामान्य फोन की तरह 1 सेकंड का पल्स नहीं होता, बल्कि 30 सेकंड या 1 मिनट का फिक्स्ड पल्स होता है. यानी अगर आपने सिर्फ 5 सेकंड भी बात की, तो पूरे 1 मिनट का पैसा (लगभग 25 रुपये प्रति मिनट) कट जाएगा. इसके अलावा फोन बंद रहने पर भी इसे एक्टिव रखने के लिए सालाना करीब 12,000 से 15,000 रुपये का मेंटेनेंस चार्ज अलग से देना पड़ता है. इतनी भारी-भरकम कीमत होने के कारण यह साफ है कि यह आम जनता के टाइमपास के लिए नहीं है.
सैटेलाइट फोन का जिक्र आते ही साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले (26/11) का वो खौफनाक मंजर याद आ जाता है, जब आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से बात करने के लिए थुरैया (Thuraya) कंपनी के सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया था. तो क्या देश के दुश्मन इस नए फोन को भी हथियाकर अपनी साजिशों को अंजाम दे सकेंगे? इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है, चाहकर भी नहीं. भारतीय दूरसंचार अधिनियम (Telecommunications Act) – सैटेलाइट फोन के अवैध इस्तेमाल पर प्रतिबंध और धाराएं (Section 4) के अनुसार क्योंकि सरकार ने इस बार सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है जिसे भेदना नामुमकिन है.
नया दूरसंचार अधिनियम (Telecommunications Act) अवैध सैटेलाइट डिवाइसों पर प्रतिबंध (Section 4) और गृह मंत्रालय (MHA) सुरक्षा गाइडलाइंस और भारतीय सीमा शुल्क घोषणा नियम (Customs Declaration Form D) के अनुसार सरकार ने सुरक्षा कारणों से ही Thuraya और Iridium जैसी विदेशी सैटेलाइट फोन सेवाओं को भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर रखा है. इसका कारण यह था कि इन विदेशी कंपनियों के सर्वर और गेटवे भारत से बाहर (जैसे यूएई या अमेरिका) में थे, जिससे भारतीय एजेंसियां इनकी कॉल्स को तुरंत ट्रैक नहीं कर पाती थीं. लेकिन BSNL का यह नया फोन पूरी तरह भारत सरकार के नियमों के अधीन है. इसे कोई भी आम नागरिक बाजार से सीधे नहीं खरीद सकता. इसे केवल डिफेंस, मरीन ऑपरेशन्स, माइनिंग और सरकार द्वारा प्रमाणित एडवेंचर ट्रैवलर्स (जैसे अमरनाथ या केदारनाथ के तीर्थयात्री) ही खरीद सकते हैं, वो भी डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) से एक खास नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद ही.
ग्लोबल सैटेलाइट फोन सर्विस (GSPS) गाइडलाइंस के अनुसार देश की सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए सरकार ने नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है. नए दूरसंचार अधिनियम (Telecommunications Act) के तहत, भारत में बिना वैध लाइसेंस या बिना अनुमति के सैटेलाइट फोन रखना Section 4 के तहत एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना गया है. अगर किसी व्यक्ति के पास बिना अनुमति के यह डिवाइस पाया जाता है, तो फोन जब्त करने के साथ-साथ उसे **3 साल तक की जेल** और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है. जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट जैसे संवेदनशील इलाकों में तो इन डिवाइसों को लेकर प्रशासन 'जीरो टॉलरेंस' की पॉलिसी अपनाता है.
यहाँ तक कि विदेशी नागरिकों या पर्यटकों के लिए भी नियम बेहद कड़े हैं. जब भी कोई विदेशी भारत के किसी हवाई अड्डे या बंदरगाह पर कदम रखता है, तो उसे कस्टम्स डिक्लेरेशन फॉर्म (Form D) में अपने सैटेलाइट फोन की घोषणा करनी होती है. अगर वो ऐसा नहीं करता है, तो कस्टम अधिकारी उसे तुरंत गिरफ्तार कर सकते हैं.
गृह मंत्रालय (MHA) गाइडलाइंस (विदेशी नागरिकों के लिए कस्टम्स फॉर्म-D नियम) एवं BSNL सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन की रिपोर्ट के अनुसार अब बात करते हैं उस सबसे बड़े सुरक्षा कवच की, जो आतंकियों के हर मंसूबे पर पानी फेर देगा. BSNL की यह ग्लोबल सैटेलाइट फोन सर्विस (GSPS) जिस मुख्य गेटवे से जुड़ी है, वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित है. इस ग्राउंड स्टेशन के अंदर एक बेहद एडवांस और इंटीग्रेटेड लीगल इंटरसेप्शन एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (कानूनी निगरानी प्रणाली) लगाया गया है.
इसका सीधा मतलब यह है कि इस फोन से देश के किसी भी दुर्गम पहाड़, घने जंगल या गहरे समंदर से की जाने वाली हर एक कॉल और भेजा जाने वाला हर एक एसएमएस (SMS) सीधे गाजियाबाद के इस स्टेशन से होकर गुजरता है. भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां रीयल-टाइम में (उसी सेकंड) यह देख सकती हैं कि कॉल कहां से की जा रही है, कौन कर रहा है और क्या बात हो रही है. कॉल्स के सिग्नल भले ही पूरी तरह इनक्रिप्टेड (सुरक्षित) होते हैं, लेकिन इसकी डिक्रिप्शन चाबी पूरी तरह भारतीय एजेंसियों के पास होती है. इसलिए यदि कोई राष्ट्रविरोधी तत्व इसे धोखे से हासिल भी कर ले, तो उसकी पहली ही कॉल उसे सीधे जेल के सीखचों के पीछे पहुंचा देगी.
भले ही अपनी महंगी कीमत और सख्त नियमों के कारण आम लोग इसे अपनी जेब में न रख सकें, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष लाभ देश के करोड़ों आम नागरिकों को ही मिलेगा. साल 2013 की केदारनाथ आपदा या 2014 की कश्मीर बाढ़ के दौरान जब सारे मोबाइल टावर मलबे में तब्दील हो गए थे, तब हमारी सेना और NDRF की टीमों ने केवल 250 से 300 सैटेलाइट फोन्स की मदद से ही पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर हजारों जिंदगियां बचाई थीं.
अब BSNL के इस नए स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क के आने से राहत एजेंसियों के पास इन फोन्स की उपलब्धता में 400% से ज्यादा की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इसके अलावा, गहरे समंदर में महीनों बिताने वाले हमारे भारतीय मछुआरों और दुर्गम पहाड़ों पर जाने वाले ट्रैकर्स के लिए यह फोन एक जीवनदान साबित होगा. कुल मिलाकर, BSNL की यह नई पहल देश को हर कोने से जोड़ने के साथ-साथ सुरक्षा के मोर्चे पर भी पूरी तरह अभेद्य है.
वैधानिक चेतावनी / महत्वपूर्ण नोट: भारत में गृह मंत्रालय और दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति या वैध NOC के बिना किसी भी प्रकार का सैटेलाइट फोन (विशेषकर थुरैया या इरिडियम) रखना या उसका उपयोग करना कानूनन संगीन और गैर-जमानती अपराध है. हवाई अड्डों या बंदरगाहों पर विदेशी नागरिकों के लिए कस्टम्स फॉर्म-D में इसकी घोषणा करना अनिवार्य है.
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