डीएनए एक्सप्लेनर
Bihar Politics: बिहार का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है. खासकर राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद से कांग्रेसियों का उत्साह आसमान पर है. इस बदले हुए मिजाज से एक शख्स के लिए मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं, वो हैं तेजस्वी यादव. तेजस्वी के लिए दोहरी चुनौती हो गई है...
Bihar Politics: 'परिवार और पार्टी की इज्जत सबसे ऊपर'- इस साल 25 मई को जब लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) को पार्टी और परिवार से बेदखल किया था, तब रोहिणी आचार्य के यही शब्द थे. लेकिन चार महीने के अंदर ही उनके मिजाज बदले हुए नजर आ रहे हैं. मिजाज तो बिहार का भी बदला हुआ नजर आ रहा है. खासकर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की वोटर अधिकार यात्रा के बाद से कांग्रेसियों का उत्साह आसमान पर है.
इस बदले हुए मिजाज से एक शख्स के लिए मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं, वो हैं तेजस्वी यादव. तेजस्वी (Tejashwi Yadav) के लिए दोहरी चुनौती हो गई है. उन्हें महागठबंधन में अपनी पार्टी को बड़ा भाई बनाए रखना है तो परिवार में छोटा भाई होने के साथ लालू की सियासी विरासत का एकमात्र दावेदार भी बने रहना है.
बिहार में महागठबंधन में कांग्रेस अब तक जूनियर पार्टनर रही है. आरजेडी पर कांग्रेस की निर्भरता का आलम ऐसा रहा है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी लालू यादव की पसंद से बनाए जाते हैं. राहुल की वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस में नई जान आई है. इससे महागठबंधन को मजबूती मिली है, लेकिन आरजेडी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. तेजस्वी को संदेह है कि सीट बंटवारे के दौरान कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है.
यह भी पढ़ें: Bihar Election 2025: जब बिहार को मिला था 5 दिन का CM, जीत लिए थे दिल
उनकी बिहार अधिकार यात्रा इस संदेह का नतीजा भले न हो, लेकिन वोटर अधिकार यात्रा से बराबरी की कोशिश जरूर है. बिहार अधिकार यात्रा में अपने दम पर भीड़ इकट्ठा कर वह कांग्रेस को भी एक संदेश दे रहे हैं. तेजस्वी बता रहे हैं कि बिहार में महागठबंधन के सबसे बड़े नेता वहीं हैं.
बिहार अधिकार यात्रा के जरिए तेजस्वी का संदेश कांग्रेस तक पहुंचे या नहीं, इसकी एक तस्वीर ने जरूर उनके लिए समस्याएं बढ़ा दी हैं. इस तस्वीर में यात्रा के लिए बनाए गए रथ पर तेजस्वी की सीट पर उनके सलाहकार संजय यादव बैठे नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर ने दूसरों के अलावा तेजस्वी के परिवार में भी लोगों के कान खड़े कर दिए हैं. उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने भी इस तस्वीर को एक्स पर पोस्ट किया है. तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव पहले ही संजय यादव को जयचंद बता चुके हैं. रोहिणी अब तक तेजस्वी के समर्थन में रही हैं, लेकिन पार्टी में संजय यादव की बढ़ती भूमिका से संभवतः उनका मन बदल रहा है.
दूसरी ओर, पिछले कुछ दिनों में तेज प्रताप यादव का अंदाज भी बदला है. अब तक तेजस्वी पर सीधा हमला करने से परहेज कर रहे तेज प्रताप अब डायरेक्ट अटैक की मुद्रा में आ गए हैं. वो उनके चुनाव क्षेत्र तक पहुंच गए हैं. ऐसे माहौल में रोहिणी आचार्य का एक्स पोस्ट परिवार में कलह का इशारा कर रहा है.
परिवार और पार्टी से बाहर किए जाने के बाद तेज प्रताप अपनी लड़ाई अब तक अकेले लड़ रहे हैं. परिवार में किसी का साथ उन्हें नहीं मिला है. इसलिए, लालू की सियासी विरासत के लिए तेजस्वी को चुनौती देने की हालत में फिलहाल वे नहीं हैं. रोहिणी आचार्य का एक्स पोस्ट इस लिहाज से तेजस्वी के लिए खतरे की घंटी है. पारिवारिक कलह बढ़ा और यदि परिवार के अन्य सदस्यों का मन भी रोहिणी की तरह बदला तो वो दिन दूर नहीं जब विरासत के असली दावेदार की चर्चा शुरू हो जाएगी.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.