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क्या कैबिनेट विस्तार से बदलेंगे बिहार में समीकरण, नीतीश ने इन 7 चेहरों से साधा जातीय-क्षेत्रीय बैलेंस!

Bihar Cabinet Expansion: बिहार में कैबिनेट विस्तार लंबे समय से टलता आ रहा था. लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले नीतीश कुमार ने यह दांव चलकर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है.

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क्या कैबिनेट विस्तार से बदलेंगे बिहार में समीकरण, नीतीश ने इन 7 चेहरों से साधा जातीय-क्षेत्रीय बैलेंस!

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बिहार में नीतीश कुमार कैबिनेट का आज विस्तार हुआ. राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बारी-बारी से 7 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों में सुनील कुमार, जीवेश मिश्रा, राजू कुमार सिंह, संजय सरावगी, मोतीलाल प्रसाद, विजय मंडल और कृष्ण कुमार मंटू शामिल हैं. राज्य में इस साल अक्टूबर में चुनाव होना है. ऐसे में नीतीश सरकार का यह अंतिम कैबिनेट विस्तार माना जा रहा है. इस कैबिनेट विस्तार के जरिए नीतीश कुमार ने जातिगत चौसर को और सुदृढ़ करने की पूरी कोशिश की है.

इस मंत्रीमंडल विस्तार के साथ ही बिहार सरकार में अधिकतम 36 मंत्रियों का कोटा पूरा हो गया है. राज्य में अभी तक 30 मंत्री थे, लेकिन बुधवार को राजस्व और भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद एक मंत्री की जगह और खाली हो गई थी.  इस विस्तार से जाति समीकरण का असर साफ दिख रहा है. क्योंकि जिन 7 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है, उनमें 3 पिछडी जाति, 2 अति पिछडी और 2 सवर्ण हैं.

कौन मंत्री किस जाति से?
संजय सरावगी:
नए मंत्रियों में दरभंगा से बीजेपी विधायक संजय सरावगी वैश्य जाति से आते हैं. वह आरएसएस के करीबी माने जाते हैं और कई सालों से इस सीट पर राज करते आए हैं. वैश्य जाति की बिहार में 22 प्रतिशत वोटबैंक है, जो अति पिछड़ा वर्ग में आती है. यह वोटबैंक जेडीयू और बीजेपी से छिटका रहा है. इस समुदाय को अपने साथ जोड़ने के लिए नीतीश लंबे समय से प्रयास करते रहे हैं.

कृष्ण कुमार मंटू: छपरा के अमनौर से विधायक कृष्ण कुमार मंटू को मंत्री बनाकर कुर्मी जाति को साधने की कोशिश की गई है. मंटू बीजेपी के दिग्गज नेताओं में से एक हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के करीबी माने जाते हैं. मंटू ने हाल ही में पटना में कुर्मी समाज की एक बड़ी महासभा की थी, जिसमें भारी संख्या में लोग जुटे थे. मंटू का प्रभाव अपनी विधानसभा में ही नहीं बल्कि छपरा, सिवान, गोपालगंज से सटे अन्य इलाकों में भी है. बिहार में कुर्मी समुदाय की संख्या 8 लाख 7 हजार है.

विजय मंडल: अररिया की सिकटी सीट से विधायक विजय मंडल केवट जाति से आते हैं. सीमांचल में आना वाला यह इलाका मुस्लिम बहुल माना जाता है. इसमें RJD ने अपनी जड़ें इतनी मजबूत बना रखी हैं कि नीतीश की जेडीयू और बीजेपी के लिए चुनौती रहा है. विजय मंडल को कैबिनेट में शामिल करके नीतीश ने केवट जाति को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है.

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इसके अलावा साहिबगंज के विधायक राज सिंह राजपूत जाति, जाले से विधायक जिवेश मिश्रा भूमिहार जाति, बिहारशरीफ से विधायक सुनील कुमार कुशवाहा जाति से आते हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में जिस तरह कुशवाह वोटरों ने एकमुश्त तरीके से वोट डालकर राजनीतिक पार्टियों को झटका दिया उनकी डिमांड और बढ़ गई है. कई उम्मीदवार ऐसे थे जो कुशवाहा वोटरों के उलटफेर की वजह से लोकसभा नहीं पहुंच पाए थे.

BJP के लिए माना जा रहा मास्टरस्ट्रोक
इस जातीय समीकरण से नीतीश कुमार को फायदा होगा या नहीं, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन रानीतिक एक्सपर्ट बीजेपी के लिए इसे 2025 चुनाव का मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं. इससे बीजेपी रुतबा बिहार सरकार में और बढ़ जाएगा. इससे बीजेपी इस जातीय और क्षेत्रीय समीकरण से वोटबैंक को साधाने की कोशिश करेगी.

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