डीएनए एक्सप्लेनर
Gaurav Barar | May 20, 2026, 11:11 AM IST
1.टेक इंडस्ट्री पर सेमीकंडक्टर का राज

आज के समय में अगर आपके पास स्मार्टफोन है, आप कार चलाते हैं, या घर में स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल करते हैं, तो आप अनजाने में ही सही, लेकिन एक बेहद छोटी चीज पर पूरी तरह निर्भर हैं, जो है सेमीकंडक्टर चिप. ये नमक के दाने से लेकर एक नाखून के बराबर की चिप होती है. जिस तरह कभी खाड़ी देशों का तेल पर कब्जा था, आज उसी तरह दुनिया की पूरी टेक इंडस्ट्री पर सेमीकंडक्टर का राज है.
2.चीन और ताइवान जैसे दिग्गजों को टक्कर देने की तैयारी
सबसे बड़ी खबर यह है कि अब भारत इस खेल का सबसे बड़ा खिलाड़ी यानी दुनिया का अगला सेमीकंडक्टर सुपरपावर बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ चुका है. जानिए भारत इस ग्लोबल टेक सप्लाई चेन में कैसे चीन और ताइवान जैसे दिग्गजों को टक्कर देने की तैयारी कर रहा है.
3.क्यों मची है इस छोटी सी चिप के लिए दुनिया में जंग?
कोविड-19 महामारी के दौरान जब दुनिया ठहर गई थी, तब चिप की भारी किल्लत हो गई थी. कारें बनना बंद हो गईं, स्मार्टफोन महंगे हो गए और दुनिया को समझ आ गया कि किसी एक देश पर निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है. फिलहाल दुनिया की 90% से ज्यादा एडवांस चिप्स अकेले ताइवान की कंपनी टीएसएमसी बनाती है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और असेंबलिंग के बड़े हिस्से पर चीन का कब्जा है.
4.अमेरिका और यूरोप को भरोसेमंद दोस्त की जरूरत
ताइवान पर चीन के बढ़ते खतरे और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी और यूरोपीय देशों को अब एक ऐसे भरोसेमंद दोस्त की जरूरत है, जिसके पास बड़ी वर्कफोर्स हो, मजबूत सरकार हो और एक बड़ा घरेलू बाजार हो. यहीं पर एंट्री होती है भारत की.
5.भारत का मास्टरस्ट्रोक
भारत सरकार ने इस मौके को भांपते हुए ₹76,000 करोड़ की सेमीकंडक्टर पीएलआई (PLI) स्कीम शुरू की. इसका असर यह हुआ कि दुनिया भर की दिग्गज टेक कंपनियां भारत में अरबों डॉलर का निवेश करने के लिए लाइन लगाकर खड़ी हो गईं. इस रेस में सबसे बड़ा धमाका टाटा ग्रुप ने किया है. टाटा ने ताइवान की मशहूर कंपनी पीएसएमसी के साथ मिलकर गुजरात के धोलेरा में भारत का पहला कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब लगाने का काम शुरू कर दिया है.
6.दिग्गज कंपनियों के समझौते
इसके अलावा, अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी गुजरात के साणंद में एक विशाल असेंबली और टेस्टिंग प्लांट बना रही है. असम के जागीरोड में भी टाटा एक और बड़ा प्लांट लगा रहा है. हाल ही में रिलायंस और साउथ कोरिया की कंपनियों के बीच भी चिप मेकिंग को लेकर बड़ी बातचीत की खबरें आई हैं. ये समझौते सिर्फ फैक्ट्रियां नहीं हैं, बल्कि भारत के ग्लोबल हब बनने की गारंटी हैं.
7.चीन को टक्कर देने की क्या है तैयारी?
अब तक चीन अपनी सस्ती लेबर और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट पर राज करता आया है. लेकिन भारत अब दो मोर्चों पर चीन को घेर रहा है. सबसे पहला मोर्चा है चिप डिजाइनिंग. दुनिया के करीब 20% सेमीकंडक्टर डिजाइनर भारतीय हैं. इंटेल, एएमडी और एनवीडिया जैसी बड़ी कंपनियों की चिप का दिमाग भारत में ही डिजाइन होता है. भारत के पास टैलेंट की कोई कमी नहीं है, कमी थी तो बस देश के अंदर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की, जो अब पूरी हो रही है.
8.चीन पर आंख मूंदकर नहीं कर रहे भरोसा
दूसरा मोर्चा है भरोसा और सुरक्षा. पश्चिमी देश अब चीन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे हैं. भारत की लोकतांत्रिक छवि और मजबूत नीतियां वैश्विक कंपनियों को एक सुरक्षित विकल्प देती हैं. जब भारत में ही चिप डिजाइन होगी, यहीं बनेगी और यहीं से पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट होगी, तो चीन का एकाधिकार अपने आप खत्म हो जाएगा.
9.राह नहीं है आसान, पर इरादे मजबूत हैं
बेशक, यह सफर इतना सीधा नहीं है. एक सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए अरबों लीटर साफ पानी, बिना किसी रुकावट के 24 घंटे बिजली और बेहद बारीक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है. हल्की सी बिजली गुल होना या पानी में अशुद्धि करोड़ों की चिप्स को बर्बाद कर सकती है. लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इन फैक्ट्रियों को स्पेशल कॉरिडोर और रिसोर्सेज दे रही हैं, जिससे विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ा है.
10.एक नया आत्मनिर्भर भारत
आने वाले 4 से 5 सालों में, भारत में बनी मेड इन इंडिया चिप्स दुनिया भर की कारों, मोबाइल और एआई गैजेट्स को रफ्तार दे रही होंगी. भारत सिर्फ एक कंज्यूमर या उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह दुनिया को टेक्नोलॉजी सप्लाई करने वाला लीडर बनना चाहता है. चीन को पछाड़कर सेमीकंडक्टर सुपरपावर बनने का भारत का यह सपना अब हकीकत में तब्दील हो रहा है.