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Mutual Divorce में क्या होता है कूलिंग-ऑफ पीरियड? जिससे युजवेंद्र चहल और धनश्री को मिली राहत

Cooling-Off Period: सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. जिसमें कहा था कि अगर-पत्नी के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं बची तो कोर्ट इस Cooling Off Period को माफ कर सकता है.

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Mutual Divorce में क्या होता है कूलिंग-ऑफ पीरियड? जिससे युजवेंद्र चहल और धनश्री को मिली राहत

yuzvendra chahal and dhanashree

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टीम इंडिया के स्पिनर युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा का आखिरकार तलाक हो गया. दोनों के तलाक की चर्चा काफी समय से सुर्खियों में थीं. मुंबई की बांद्रा फैमिली कोर्ट ने गुरुवार को दोनों को तलाक दे दिया. चहल और धनश्री ने 5 फरवरी को फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की थी. लेकिन कोर्ट ने कपल को तलाक देने से पहले 6 महीने का कूलिंग ऑफ पीरियड पूरा करने की बात कही थी.

युजवेंद्र चहल और धनश्री ने फैमिली कोर्ट में इस कूलिंग ऑफ पीरियड से बचने की मांग भी की थी, लेकिन कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद युजवेंद्र चहल ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाईकोर्ट कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 6 महीने का कूलिंग ऑफ पीरियड माफ कर दिया और फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि 20 मार्च को तलाक के मामले में फैसला सुनाए. चहल को 22 मार्च से IPL 2025 खेलना है, इसलिए उन्होंने अनुरोध किया था कि तलाक की प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी की जाए.

क्या है Cooling-Off Period?

भारत में जब कोई कपल आपसी सहमति से तलाक (Mutual Divorce) लेना चाहता है तो उसे हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 13बी(2) के तहत फैमिली कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी पड़ती है. कोर्ट तलाक की मंजूरी देने से पहले 6 महीने का कूलिंग ऑफ पीरियड अनिवार्य रूप से लागू करता है. इसका मतलब जल्दबाजी में तलाक से बचाव करना होता है.

दरअसल, कुछ पति-पत्नी लड़ाई झगड़े के बाद गुस्से में तलाक लेने का फैसला कर लेते हैं. गुस्से और भावनात्मक उथल-पुथल की वजह से वह अपने और बच्चों के भविष्य के बारे में भी नहीं सोच पाते. ऐसे में कोर्ट तलाक देने से पहले कपल को 6 महीने सोचने-समझने और फैसले पर पुर्विचार करने का मौका देता है.

इस अवधि में पति-पत्नी अपने मतभेद सुलझाकर फिर से साथ आ सकते हैं. अगर दंपत्ति के बच्चे हैं तो उन्हें भी विचार करने का मौक मिलता है. साथ ही कोर्ट की तरफ से एक अधिकारी दोनों को समझाने की कोशिश करता है. एलिमनी औ संपत्ति के बंटवारे के बारे में भी सोचने का समय मिलता है.

कूलिंग ऑफ पीरियड हटाने के लिए किन शर्तों को करना होगा पूरा?

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. जिसमें कहा गया कि अगर-पत्नी के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं बची तो कोर्ट इस Cooling Off Period को माफ कर सकता है. यह इसी कंडीशन में माफ हो सकता है, जब पति-पत्नी कम से कम एक साल से अलग-अलग रह रहे हों. दोनों ने तलाक लेने का फाइनल फैसला ले लिया है. इसके अलावा एलिमनी, संपत्ति बंटवारा, बच्चों की कस्टडी आदि पहले ही तय हो चुके हों.

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