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लाल सागर पर हूतियों का बढ़ता कंट्रोल क्यों है खतरनाक संकेत? जानिए जंग का नया मोड़

यमन में हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है. जानिए कैसे यह तनाव ग्लोबल ऑयल सप्लाई और मिडिल ईस्ट को प्रभावित कर रहा है.

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लाल सागर पर हूतियों का बढ़ता कंट्रोल क्यों है खतरनाक संकेत? जानिए जंग का नया मोड़

हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर किया कब्जा, AI Photo

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  • हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है.
  • जुलाई से हमलों के बाद से बाब अल-मंदेब के रास्ते सऊदी तेल निर्यात में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है.
  • दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 12% से 15% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है.

Houthis Red Sea Control: यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बड़ा सैन्य अभियान चलाते हुए लाल सागर तट के रणनीतिक बंदरगाह मोखा और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित पेरिम द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है. इस अचानक हुई सैन्य बढ़त ने वर्ष 2022 से चले आ रहे युद्धविराम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, क्योंकि इसके साथ ही ईरान युद्ध में एक नया और दूसरा मोर्चा खुल गया है. 

लाल सागर सागर पर क्यों गहराया संकट ?

मंगलवार को हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमले किए, जिससे वहां की तेल सुविधाओं में आग लग गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए. इसके बाद बृहस्पतिवार को यमन के भीतर लाल सागर तट पर भीषण लड़ाई हुई, जिसमें हूती विद्रोहियों ने सऊदी-समर्थित सरकारी बलों को खदेड़ते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया. शुक्रवार को यमन सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित पेरिम द्वीप को भी अपने कब्जे में ले लिया है.

मोखा बंदरगाह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से 50 मील से भी कम दूरी पर स्थित है और यह अब तक हूती-विरोधी गठबंधन का एक प्रमुख गढ़ माना जाता था. इस कब्जे के साथ ही हूतियों और उनके सहयोगी ईरान ने लाल सागर के इस महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है.

बाब अल-मंदेब पर हूतियों का कब्जा

दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 12% से 15% हिस्सा इसी रूट से होकर गुजरता है, लेकिन बढ़ते खतरों की वजह से शिपिंग कंपनियों को मजबूरन अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है, जिसने ट्रेवल डिस्टेंस और कॉस्ट दोनों को एकदम पीक पर पहुंचा दिया है. इस बढ़े हुए ट्रांसपोर्टेशन खर्चे का सीधा असर अब मार्केट पर दिख रहा है, जहां क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, गोल्ड, सिल्वर और कॉपर या एल्युमिनियम जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे पूरी दुनिया में एक भयंकर महंगाई का खतरा मंडराने लगा है.

कैसे शुरू हुआ हूती हमला ?

ईरान के साथ जारी युद्ध के दौरान सऊदी अरब के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य के स्थान पर लाल सागर का रास्ता कच्चे तेल के निर्यात का मुख्य वैकल्पिक जरिया बन गया था. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की इसी संवेदनशीलता और निर्भरता का फायदा उठाया है.

जुलाई महीने में हूती हमलों के दोबारा शुरू होने के बाद से बाब अल-मंदेब के रास्ते होने वाला सऊदी तेल का निर्यात 95 प्रतिशत तक गिर चुका है. इसके अलावा हूती विद्रोही मिस्र की ओर उत्तर दिशा में जाने वाले तेल टैंकरों और बुनियादी ढांचों को भी निशाना बना रहे हैं.

तनाव बढ़ने की मुख्य वजह जुलाई मध्य में उत्पन्न हुई थी, जब ईरान ने तेहरान से हूती प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल को विमान में लाकर यमन की राजधानी साना में उतारने का प्रयास किया. इसके जवाब में सऊदी अरब और यमन सरकार ने साना एयरपोर्ट के इकलौते रनवे पर बमबारी कर दी. हालांकि वह विमान हूती-नियंत्रित हुदैदा बंदरगाह पर उतरा, लेकिन हूतियों ने इस सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम तोड़ने का बहाना बना लिया और सऊदी अरब के खिलाफ नया सैन्य अभियान शुरू कर दिया.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

ईरान युद्ध के दौरान तेहरान की सबसे बड़ी ताकत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करने की क्षमता रही है. अब यमन में हूतियों के माध्यम से बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण स्थापित करके ईरान ने एक 'डबल चोकपॉइंट' की स्थिति का निर्माण कर दिया है.

यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो ईरान और हूती विद्रोही संयुक्त रूप से हर साल खरबों डॉलर मूल्य के वैश्विक व्यापार और ऊर्जा परिवहन के मुख्य नियंत्रक बन जाएंगे. इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों और ऊर्जा बाजारों पर भारी दबाव पैदा हो जाएगा. 

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