Advertisement

भूपेंद्र हुड्डा और शशि थरूर छोड़ देंगे कांग्रेस का 'हाथ'? बढ़ रही दिग्गज नेताओं में नाराजगी, क्या इन राज्यों में खत्म हो जाएगी कांग्रेस?

कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं के बीच नाराजगी बढ़ रही है. ऐसे में कांग्रेस के लिए ये मंथन का समय है कि वह हाथ की पांचों उंगलियों को कैसे एक मुट्ठी बनाकर रखे. अगर ये मुट्ठी खुली तो बिखर सकती है.

Latest News
भूपेंद्र हुड्डा और शशि थरूर छोड़ देंगे कांग्रेस का 'हाथ'? बढ़ रही दिग्गज नेताओं में नाराजगी, क्या इन राज्यों में खत्म हो जाएगी कांग्रेस?
Add DNA as a Preferred Source

Senior Congress leaders discontent: हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में चुनावों में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस पार्टी को झटके पर झटके लग रहे हैं. पहले चुनावों में विफलता और अब पार्टी के सीनियर लीडर्स की नाराजगी. राहुल गांधी के सामने दोहरी परेशानियां हैं. हाल ही में शशि थरूर का कांग्रेस को लेकर बयान और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बीजेपी में शामिल होने की सलाह कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बनते नजर आ रहे हैं. यह अटकलें तब और तेज हो गईं जब दोनों नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान के साथ कुछ नीतिगत मतभेदों को लेकर अपनी असहमति व्यक्त की.

भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं. हुड्डा लंबे समय से कांग्रेस संगठन में बदलाव की मांग करते रहे हैं. वहीं, हरियाणा में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर उनकी नाराजगी कई बार सामने आ चुकी है. वह गहलोत-पायलट मॉडल की तर्ज पर हरियाणा कांग्रेस में अधिक स्वतंत्रता चाहते हैं. हुड्डा के पार्टी छोड़ने के कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुनील जाखड़ के पोते की शादी के रिसेप्शन में शामिल हुए थे. हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की थी. रिसेप्शन का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें पीएम मोदी और हुड्डा एक-दूसरे का हालचाल पूछते नजर आ रहे हैं. इसको लेकर पूर्व सीएम हुड्डा ने सफाई दी है.

हुड्डा ने कहा, 'अरे ये लोकतंत्र है, हमारा विरोध राजनीतिक है, कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है. साथ ही हुड्डा ने क्लियर किया कि उन्होंने मुझे नहीं बुलाया. मेरे पास एक व्यक्ति खड़ा था, उसे बुलाया गया है. उसने समय मांगा था, अश्वनी कुमार मेरे पास खड़े थे, उन्हें बुलाया गया है. जब वे 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे तो हम रोज मिलते थे. सम्मेलनों में मिलते थे.
 
अगर हुड्डा कांग्रेस छोड़ते हैं, तो उनकी अगली रणनीति क्या हो सकती है?
जुलाना नगर पालिका चुनाव में प्रचार करने आए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को भाजपा में शामिल होने का ऑफर तक दे दिया. उन्होंने कहा कि राजनीति में सभी संभावनाएं खुली हैं. अगर हुड्डा भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो हो सकते हैं. राजनीति में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता. वहीं, यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि हुड्डा का प्लान बी क्या होगा? बीजेपी के साथ जाने की संभावना कम है, क्योंकि उनका पूरा राजनीतिक कद कांग्रेस विरोधी बीजेपी छवि पर टिका है. आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन भी संभावित नहीं दिखता. एक नई पार्टी बनाना या किसी क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन करना उनके लिए अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है.

क्यों भड़क रहे शशि थरूर?
हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में शशि थरूर ने कहा कि तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद चुने जाने से साबित होता है कि जनता राज्य और देश के विकास से जुड़े उनके विचारों और उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति का समर्थन करती है. शशि थरूर ने कहा, 'मैं पार्टी के लिए हमेशा तैयार हूं. लेकिन अगर कांग्रेस को मेरी सेवाओं की जरूरत नहीं है, तो मेरे पास 'विकल्प' खुले हैं.' ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि शशि थरूर किस तरह के विकल्प की बात कर रहे हैं. क्या उनका इशारा भाजपा है या फिर एलडीएफ? कारण कि वह समय-समय पर दोनों की तारीफ कर चुके हैं.

शशि थरूर, जो कांग्रेस के 'थिंक टैंक' माने जाते हैं, ने पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांग करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था. उन्होंने गांधी परिवार के वर्चस्व को चुनौती देते हुए यह चुनाव लड़ा, हालांकि वह हार गए. थरूर का कांग्रेस के प्रति असंतोष समय-समय पर दिखता रहा है. अगर वे पार्टी छोड़ते हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की टीएमसी के साथ जुड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. 


यह भी पढ़ें - Bhupinder Singh Hooda दिल्ली से रोहतक लगातार मिला रहे फोन, नतीजों से पहले ही CM रेस के लिए चला दांव


 

हालांकि अभी तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा और शशि थरूर ने कांग्रेस छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह की बयानबाजी और काम दिख रहे हैं उससे राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट कुछ और ही होने लगी है. अगर हुड्डा ने कांग्रेस छोड़ी तो पार्टी को हरियाणा में नुकसान होगा और अगर थरूर ने पार्टी छोड़ी तो पार्टी की बौद्धिक छवि को नुकसान होगा. ऐसे में कांग्रेस को अब ये सोचना होगा कि हाथ की पांचों उंगलियों को कैसे एक बंद मुट्ठी बनाया जाए ताकि ये खुलकर बिखर न जाए. ये कांग्रेस के लिए मंथन का समय है.  

 

ख़बर की और जानकारी के लिए डाउनलोड करें DNA App, अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें  हमारे गूगलफेसबुकxइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement