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BJP नए और कम चर्चित चेहरों को ही CM क्यों बनाती है? इन 13 राज्यों में क्या रहा ट्रेंड

भारतीय जनता पार्टी का ये ट्रेंड रहा है कि वह अक्सर किसी नए और कम चर्चित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाती है. इस कदम के पीछे पार्टी की एक गंभीर रणनीति रहती है. हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में ऐसे ही उदाहरण देखने को मिले हैं.

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BJP नए और कम चर्चित चेहरों को ही CM क्यों बनाती है? इन 13 राज्यों में क्या रहा ट्रेंड
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BJP CM selection strategy: भारतीय जनता पार्टी का ये ट्रेंड रहा है कि वह हमेशा नए और कम चर्चित चेहरों को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनती है. हालिया उदाहरण दिल्ली की नवनियुक्त सीएम रेखा गुप्ता हैं. रेखा गुप्ता एक बार विधायक रहीं और पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं. इसी तरह का ट्रेंड राजस्थान में भजनलाल शर्मा को, हरियाणा में नायब सिंह सैनी को और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर मोदी-शाह का जोड़ी ने लोगों को चौंकाया है. अब सवाल ये है कि आखिर आलाकमान इस तरह का ट्रेंड सेट क्यों कर रही है. 

इस पर दिल्ली की राजनीति पर गहरी समझ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र का कहना है कि दिल्ली में वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया क्योंकि बीजेपी यह बताना चाहती है कि वे 50 की उम्र के जवान लोगों को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. दूसरा, अगर किसी कद्दावर नेता को मुख्यमंत्री बनाया तो उसका अपना गुट होगा और बाद में वो गुटबाजी करके पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, नया नेता हाईकमान की बात मानेगा. उनके साथ तू-तू, मैं-मैं नहीं करेगा. यही वजह है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनती है. 

वहीं, वरिष्ठ पत्र अजय पांडे कहते हैं कि बीजेपी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर ये संदेश देना चाहती है कि जो कार्यकर्ता निचले स्तर पर, कड़ी मेहनत पार्टी के लिए कर रहा है, पार्टी उनकी मेहनत को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है. इस तरह के उदाहरण राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश और दिल्ली में देखने को मिले हैं. इस तरह के  प्रयासों से बीजेपी संगठन के तौर पर मजबूत हो रही है. बीजेपी का कार्यकर्ता हमेशा चुनाव लड़ने के लिए काम करता है. एक तरह का मैसेज देना कि आप और मेहनत करेंगे तो आप भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं. 

साथ ही अजय पांडे ने दिल्ली को लेकर कहा कि पार्टी चाहती तो प्रवेश वर्मा को भी मुख्यमंत्री बना सकती थी लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री बनाने से परिवारवाद का संदेश जाता. प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह वर्मा भी दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे हैं. ऐसे में पार्टी ने परिवारवाद से बचने के लिए रेखा गुप्ता को सीएम बनाया. साथ ही जब राज्यों में नई लीडरशिप पनपेगी तो उससे किसी एक चेहरे पर पार्टी नहीं खड़ी रहेगी बल्कि उसे आगे बढ़ाने वाले अन्य चेहरे भी होंगे. 

किन-किन राज्यों में अब तक नए चेहरों को मिला सीएम बनने का मौका:

  • दिल्ली: रेखा गुप्ता (2025) - पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने महिला सशक्तिकरण और जातिगत संतुलन पर जोर दिया. 
  • उत्तर प्रदेश: योगी आदित्यनाथ (2017) - गोरखपुर से सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाया.
  • उत्तराखंड: त्रिवेंद्र सिंह रावत (2017) - संगठन में लंबे समय तक सेवा देने वाले रावत को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने संगठनात्मक अनुभव को महत्व दिया.
  • महाराष्ट्र: देवेंद्र फडणवीस (2014) - नागपुर से विधायक फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने युवा नेतृत्व को प्रोत्साहित किया.
  • हरियाणा: मनोहर लाल खट्टर (2014) - संगठन के अनुभवी खट्टर को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने साफ-सुथरी छवि और प्रशासनिक कौशल को प्राथमिकता दी. बाद में नायब सिंह सैनी को बनाया. 
  • झारखंड: रघुबर दास (2014) - गैर-आदिवासी नेता दास को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने सामाजिक संतुलन स्थापित किया.
  • त्रिपुरा: बिप्लब कुमार देब (2018) - युवा नेता देब को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने पूर्वोत्तर में नए नेतृत्व को बढ़ावा दिया.
  • हिमाचल प्रदेश: जयराम ठाकुर (2017) - ग्रामीण पृष्ठभूमि के ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन साधा.
  • कर्नाटक: बसवराज बोम्मई (2021) - अनुभवी नेता बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने लिंगायत समुदाय को साधा.
  • गुजरात: भूपेंद्र पटेल (2021) - पहली बार विधायक बने पटेल को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने पाटीदार समुदाय को महत्व दिया.
  • असम: हिमंत बिस्वा सरमा (2021) - पूर्व कांग्रेस नेता सरमा को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत की.
  • मणिपुर: एन. बीरेन सिंह (2017) - पूर्व फुटबॉलर और पत्रकार सिंह को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने विविध पृष्ठभूमि के नेताओं को प्रोत्साहित किया.
  • गोवा: प्रमोद सावंत (2019) - युवा नेता सावंत को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया.

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भारतीय जनता पार्टा ने समय-समय पर पार्टी और कार्यकर्ताओं के बीच ये संदेश दिया है कि किसी एक की सत्ता नहीं रह सकती. कोई भी कभी भी बदल सकता है. वहीं, पार्टी नए चेहरों को लाकर नेतृत्व में ताजगी,  जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय मुद्दों पर ध्यान और पार्टी की छवि में सुधारने के लिए इस तरह के कदम उठाए हैं. 

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