डीएनए एक्सप्लेनर
भारतीय जनता पार्टी का ये ट्रेंड रहा है कि वह अक्सर किसी नए और कम चर्चित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाती है. इस कदम के पीछे पार्टी की एक गंभीर रणनीति रहती है. हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में ऐसे ही उदाहरण देखने को मिले हैं.
BJP CM selection strategy: भारतीय जनता पार्टी का ये ट्रेंड रहा है कि वह हमेशा नए और कम चर्चित चेहरों को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनती है. हालिया उदाहरण दिल्ली की नवनियुक्त सीएम रेखा गुप्ता हैं. रेखा गुप्ता एक बार विधायक रहीं और पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं. इसी तरह का ट्रेंड राजस्थान में भजनलाल शर्मा को, हरियाणा में नायब सिंह सैनी को और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर मोदी-शाह का जोड़ी ने लोगों को चौंकाया है. अब सवाल ये है कि आखिर आलाकमान इस तरह का ट्रेंड सेट क्यों कर रही है.
इस पर दिल्ली की राजनीति पर गहरी समझ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र का कहना है कि दिल्ली में वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया क्योंकि बीजेपी यह बताना चाहती है कि वे 50 की उम्र के जवान लोगों को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. दूसरा, अगर किसी कद्दावर नेता को मुख्यमंत्री बनाया तो उसका अपना गुट होगा और बाद में वो गुटबाजी करके पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, नया नेता हाईकमान की बात मानेगा. उनके साथ तू-तू, मैं-मैं नहीं करेगा. यही वजह है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनती है.
वहीं, वरिष्ठ पत्र अजय पांडे कहते हैं कि बीजेपी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर ये संदेश देना चाहती है कि जो कार्यकर्ता निचले स्तर पर, कड़ी मेहनत पार्टी के लिए कर रहा है, पार्टी उनकी मेहनत को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है. इस तरह के उदाहरण राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश और दिल्ली में देखने को मिले हैं. इस तरह के प्रयासों से बीजेपी संगठन के तौर पर मजबूत हो रही है. बीजेपी का कार्यकर्ता हमेशा चुनाव लड़ने के लिए काम करता है. एक तरह का मैसेज देना कि आप और मेहनत करेंगे तो आप भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं.
साथ ही अजय पांडे ने दिल्ली को लेकर कहा कि पार्टी चाहती तो प्रवेश वर्मा को भी मुख्यमंत्री बना सकती थी लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री बनाने से परिवारवाद का संदेश जाता. प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह वर्मा भी दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे हैं. ऐसे में पार्टी ने परिवारवाद से बचने के लिए रेखा गुप्ता को सीएम बनाया. साथ ही जब राज्यों में नई लीडरशिप पनपेगी तो उससे किसी एक चेहरे पर पार्टी नहीं खड़ी रहेगी बल्कि उसे आगे बढ़ाने वाले अन्य चेहरे भी होंगे.
किन-किन राज्यों में अब तक नए चेहरों को मिला सीएम बनने का मौका:
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भारतीय जनता पार्टा ने समय-समय पर पार्टी और कार्यकर्ताओं के बीच ये संदेश दिया है कि किसी एक की सत्ता नहीं रह सकती. कोई भी कभी भी बदल सकता है. वहीं, पार्टी नए चेहरों को लाकर नेतृत्व में ताजगी, जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय मुद्दों पर ध्यान और पार्टी की छवि में सुधारने के लिए इस तरह के कदम उठाए हैं.
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