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औरंगजेब की वो कब्र कहां है जिस पर हो रही इतनी सियासत, क्या है इसकी कहानी, 5 पॉइंट्स में जानें

औरंगजेब की कब्र को लेकर रोज नया बवाल और सिसायत दिखाई-सुनाई दे रही है. अब लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ये कब्र है कहां और इस पर बवाल क्यों है? अगर आपके भी मन में ये सवाल हैं, तो यहां जानें सारी जानकारी.

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औरंगजेब की वो कब्र कहां है जिस पर हो रही इतनी सियासत, क्या है इसकी कहानी, 5 पॉइंट्स में जानें
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Aurangzeb grave location: फिल्म छावा आने के बाद औरंगजेब पर सियासी बहस शुरू हो गई है. औरंगजेब की कब्र को लेकर बहस महाराष्ट्र से शुरू हुई और अब पूरे देश में फैल गई है. अब लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जिसने भारतीयों पर इतने अत्याचार किए, उसकी कब्र को सजाकर क्यों रखा है? ये मांग छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशजों और वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तरफ से भी उठाई गई है. आज जिस औरंगजेब पर बहस हो रही है अब लोग जानना चाहते हैं कि ये कौन था, इसकी कब्र कहां और कब्र पर सिसायत क्यों हो रही है? तो यहां जाने इसकी पूरी कहानी.

कौन था औरंगजेब?
औरंगजेब का पूरा नाम मुहिउद्दीन मुहम्मद था, लेकिन उसे आलमगीर या औरंगजेब के नाम से पुकारा जाता था. औरंगजेब मुगल साम्राज्य का छठा और अकबर के बाद सबसे शक्तिशाली बादशाह था. उसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य बहुत विशालकाय हो गया था. इस बादशाह ने 1658 से लेकर 1707 तक दिल्ली की गद्दी पर हुकूमत की थी.

हिंदू विरोधी शास क्यों कहा जाता है?
औरंगजेब लेकर कहा जाता है कि वह हिंदू, सिख विरोधी शासक था. उसने हिंदुओं पर कठोर नीतियां लागू कीं और कई प्रमुख मंदिरों को तुड़वाया, जिनमें काशी विश्वनाथ, मथुरा का केशव देव मंदिर और सोमनाथ मंदिर शामिल हैं. उसने गैर-मुस्लिमों पर जजिया कर (धार्मिक कर) फिर से लागू किया, जिसे अकबर ने हटा दिया था. उसने कई हिंदू राजाओं और मराठों के खिलाफ युद्ध छेड़े और उन्हें दबाने की कोशिश की. यही नहीं, औरंगजेब के 49 सालों के शासन में 46 लाख लोग मारे गए. उसने छत्रपति संभाजी महाराज को 40 दिनों तक भयंकर यातनाएं देने के बाद उनकी हत्या करवाई थी. अब संभाजी के वंशजों की तरफ से इस औरंगेजब की कब्र को हटाने की बात हो रही है. 

कहां है औरंगजेब की कब्र?
औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में खुल्दाबाद नामक स्थान पर स्थित है. इस जगह को सूफी संत बुरहानुद्दीन गरीब और अन्य संतों की मौजूदगी के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. यह जगह औरंगाबाद से लगभग 25 किमी दूर है और इसे 'वलीयों का नगर' भी कहा जाता है क्योंकि यहां कई सूफी संतों की दरगाहें भी हैं. साल 1707 में औरंगजेब की मृत्यु हुई थी तब महाराष्ट्र के औरंगबाद में उसकी कब्र बनाई गई थी. उस क्षेत्र का नाम औरंगाबाद औरंगजबे के नाम पर ही रखा गया था. 


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कब्र को लेकर औरंगजेब की इच्छा?
कहा जाता है कि औरंगजेब ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उसे साधारण मिट्टी की कब्र में दफनाया जाए, और यह खर्च उसकी कमाई से किया जाए. पहले उसके मकबरे को कच्ची मिट्टी से तैयार किया गया था. लेकिन बाद में लॉर्ड कर्जन ने उस पर संगमरमर मढ़वा दिया था. इस मकबरे की वास्तुकला इस्लामिक शैली की है. यह मकबरा बेहद सादा और सफेद रंग का है. औरंगजेब के मकबरे के पास ही उनके बेटे आजम शाह का मकबरा है. शेख जैनुद्दीन दरगाह भी इसके करीब ही स्थित है. मकबरे की दीवारों पर औरंगजेब के बारे में कुछ जानकारी दी गई है. 

 

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