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Delhi Yamuna River Pollution: यमुना नदी में दिखने वाला सफेद झाग क्या है, छठ पर्व पर स्नान से पहले जान लें ये बातें

यमुना में दिखने वाला सफेद झाग कहां से आता है. इसके बनने के क्या कारण हैं. छठ पर्व पर इस पानी में नहाना कितना खतरनाक? सभी सवालों के जवाब यहां दिए गए हैं.

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Delhi Yamuna River Pollution: यमुना नदी में दिखने वाला सफेद झाग क्या है, छठ पर्व पर स्नान से पहले जान लें ये बातें
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Delhi Yamuna River Pollution : दिल्ली में छठ पूजा से पहले यमुना नदी में जहरीले झाग देखने को मिलते हैं. जिसकी भी नजर झाग वाली यमुना पर जाती है तो सबसे पहला सवाल होता है कि ये झाग (Yamuna River Foam) क्या है. कहां से आता है और अगर आप व्रती हैं. मतलब छठ पूजा पर व्रत रखने वाली हैं तो टेंशन और बढ़ जाती है. छठ पर्व (Chhath Puja 2024) पर श्रद्धालु यमुना नदी में डुबकी लगाते हैं. यमुना में स्नान करने वालों को मन भी में ये सवाल चलता है कि आखिर ये सफेद झाग है क्या और आता कहां से है? इस पानी में नहाने से कोई नुकसान तो नहीं है? तो आपके सभी सवालों के जवाब सिलसिलेवार तरीके से दिए गए हैं. आइए देखें. 

यमुना नदी में झाग क्यों बनता है और कहां से आता है?

  • यमुना नदी में झाग बनने और आने का कोई एक कारण नहीं है बल्कि कई कारण हैं. यमुना नदी में झाग की परत बनने के कई कारण हैं. आइए इन्हें एक-एक करके समझें. 
  • पर्यावरणविदों के अनुसार दिल्ली के 17 बड़े नाले सीधे यमुना नदी में गिरते हैं. इसलिए यमुना प्रदूषित है. 
  • बायो एक्सपर्ट के मुताबिक, यमुना के झाग बढ़ते प्रदूषण का संकेत हैं. 
  • दिल्ली से जब यमुना बाहर निकलती है तो ऑक्सीजन लेवल जीरो और फिकल इंडिकेटर 9 लाख होता है. इस स्तर पर ये पानी इंसान और जीव दोनों के लिए खतरनाक हो जाता है.
  • आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर और स्टूडेंट की एक टीम के रिसर्च के मुताबिक, घरेलू और औद्योगिक कचरे से फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट वाले डिटर्जेंट की वजह से झाग बढ़ता है. 
  • केमिकल्स यमुना नदी के पानी की सतह पर तनाव को कम कर देते हैं, जिससे बुलबुले और सफेद झाग बनते हैं. 
  • बढ़ता तापमान यमुना में झाग बनाने में कारगर साबित होता है. अक्टूबर के महीने में तापमान गिरने पर ये झाग को स्थिर कर देता है. 
  • इस झाग में हानिकारक कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जिनसे जहरीली गैस निकलती है और सीधे वायुमंडल में घुलती है.
  • बिना ट्रीटमेंट गिरने वाला सीवेज नाइट्रेट्स और फॉस्फेट से प्रदूषण को कई गुना बढ़ा देता है. इसके दबाव के कारण बड़े पैमाने पर झाग बनने लगता है.
  • वैज्ञानिक खास तरह के फिलामेंटस बैक्टीरिया की मौजूदगी को भी यमुना नदी में सफेद झाग बनने की एक बड़ी वजह मानते हैं.
  • यमुना में सफेद झाग पर्यावरणीय गतिविधि से ज्यादा इंसानी गतिविधियां कारण हैं. 
  • पर्यावरण एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यमुना नदी में बनने वाले सफेद झाग में अमोनिया और फॉस्फेट की मात्रा अधिक होती है. 
  • ये हानिकारक कार्बनिक पदार्थ हैं. ये कार्बन के कण हेल्थ के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होते हैं.  

यमुना के पानी में नहाने से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
दिल्ली के स्वामी विवेकानंद अस्पताल में जनरल फिजिशियन डॉ. ग्लैडविन त्यागी ने दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का उदाहरण देते हुए बताया कि बीते दिनों दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर वीरेंद्र सचदेवा ने दिल्ली सरकार के खिलाफ प्रदूषण करते हुए यमुना नदी में डुबकी लगाई थी. हालांकि, इस स्नान के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. उन्हें स्किन पर लाल रैशिस, खुजली और सांस लेने में हल्की तकलीफ हुई. इस पर डॉ. ग्लैडविन त्यागी आगे कहते हैं कि यमुना का पानी इतना गंदा है कि अगर कोई लगातार कुछ दिन नहा ले तो उसे कैंसर तक हो सकता है. सफेद झाग में जहरीले कैमिकल्स होते हैं जिससे लिवर-किडनी को भी नुकसान हो सकता है. यही नहीं गले में दर्द और आंखों में जलन की समस्या भी हो सकती है. यमुना नदी में स्नान के बाद अगर आपको किसी भी तरह की दिक्कत महसूस हो रही है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. इस पर लापरवाही न करें. 


यह भी पढ़ें - दिल्ली प्रदूषण के विरोध में वीरेंद्र सचदेवा ने लगाई यमुना में डुबकी, अब हो गई खुजली और सांस लेने में दिक्कत


 

दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
आपको बता दें, 31 अक्टूबर की रात को दिवाली मनाने के बाद,  IQAir ने शुक्रवार सुबह (1 नवंबर) राजधानी दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया. स्विस फर्म ने अपने रियल टाइम प्रदूषण रैंकिंग में दिल्ली को टॉप पर रखा. शुक्रवार सुबह 10 बजे आनंद विहार स्टेशन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 388 तक पहुंच गया. दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने पटाखों पर बैन लगाया था. हालांकि, लोगों ने इन प्रतिबंधों का ध्यान नहीं रखा और अब कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब की स्थिति में है.  

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