डीएनए एक्सप्लेनर
दिल्ली में लगातार अवैध अतिक्रमण और मकानों पर बुलडोजर एक्शन हो रहा है. इसमें सबसे ज्यादा तोड़फोड़ O Zone में की जा रही है. ऐसे में बहुत से लोगों को O Zone को लेकर असमंजस में हैं कि यह क्या और यहां तोड़फोड़ क्यों हो रही है आइए जानते हैं...
.A से लेकर Z तक कितने जोनल में बंटा है दिल्ली.
.दिल्ली के O Zone में स्थित घरों पर क्यों चल रहा बुलडोजर
.किस जोनल में आता है दिल्ली का कौन सा क्षेत्र
.O Zone में बने मकान ही क्यों माने जा रहे हैं अवैध
देश की राजधानी दिल्ली में हर किसी का सपना अपना घर बनाने का होता है. लोग दिन रात मेहनत कर पैसा कमाते और पाई पाई जोड़कर सपनों का आशियाना खड़ा करते हैं, लेकिन जब घर के बाहर बिल्डोजर आकर खड़ा हो जाये तो हर किसी के आंसू निकल आते हैं. ऐसा ही हाल इन दिनों दिल्ली में हो रहा है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए कुछ बातों को जान लेना बेहद जरूरी है. जैसे अगर आप दिल्ली में मकान खरीदने जा रहे हैं तो सिर्फ कॉलोनी का नाम जानना काफी नहीं है. उससे भी ज्यादा जरूरी डीडीएन की प्लानिंग के अनुसार उस जगह का जोन जानना है. क्योंकि दिल्ली में कई ऐसे जोन हैं, जहां पर मकान बनाने की अनुमति ही नहीं है. आइए जानते हैं.
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए अलग-अलग जोनों में बांटा है. यही जोन तय करते हैं कि किसी इलाके में मकान, बाजार, उद्योग, पार्क या अन्य निर्माण कैसे और कहां होंगे. ऐसे में हर दिल्लीवासी के लिए यह जानकारी बहुत ही महत्वपूर्ण है.
DDA के अनुसार दिल्ली को अलग अलग प्लानिंग जोनों में बांटा गया है. इन जोनों के आधार पर सड़क, पार्क के अलावा एरिया, आवासीय और व्यावसायिक विकास की प्लानिंग की जाती है. जोनल डेवलपमेंट प्लान मास्टर प्लान और ग्राउंड लेवल डेवलपमेंट के बीच कड़ी का काम करता है. दिल्ली में कुल 18 प्लानिंग जोन हैं. इसके अलावा प्लानिंग में अल्फाबेटिक रूप से भी जोन को अलग अलग किया जाता है. इन दिनों अल्फाबेटिक के हिसाब से O जोन चर्चा में क्योंकि यहां सरकार का बिल्डोजर एक्शन चल रहा है. आइए जानते हैं दिल्ली में A, B, C, D, E और F से लेकर ओ तक कितने जोन हैं...
डीडीएन की साइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, दिल्ली को अल्फाबेटिक रूप से 15 जोन में बांटा गया है. इनमें A, B, C, D, E, F, G, H, J, K, L, M, N, O और P हैं. इसमें दिल्ली के सभी अलग अलग इलाके आते हैं. इन्हें एलओपी यानी ले आउट प्लान में जोनल के हिसाब से बांटा गया है. आइए जानते हैं किस में आता है कौन सा एरिया
Zone A : पुरानी दिल्ली और वॉल्ड सिटी क्षेत्र
Zone B : करोल बाग और आसपास का सिटी एक्सटेंशन इलाका
Zone C : सिविल लाइंस क्षेत्र
Zone D : नई दिल्ली का बड़ा हिस्सा
Zone E : ट्रांस-यमुना यानी पूर्वी दिल्ली
Zone F : दक्षिण दिल्ली का प्रमुख हिस्सा, जिसमें साकेत, ईस्ट ऑफ कैलाश, शेख सराय, जसोला, चिराग दिल्ली जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
Zone G : पश्चिम दिल्ली के तिलक नगर, बिजवासन
Zone H : वजिरपुर, पितमपुरा और रिठाला
Zone J : घिटौरनी, असोला, छतरपुर समेत कई क्षेत्र
Zone K : बरपरोली, मुड़का, डबारी, पालम, काकरोला
Zone L : छावला, नजफगढ़
Zone M : बेगपुर, निठारी, बवाना, रानी खेड़ा, सौदा
Zone N : बवाना, रानी खेड़ा, सौदा
Zone O : यमुना क्षेत्र वजिराबाद बागर, आईटीओ बागर और ओखला बांगर
Zone P : अलीपुर, टीकरी, बुराड़ी
बहुत से लोग मानते हैं कि जोन सिर्फ भौगोलिक सीमा है, लेकिन असलियत इससे कहीं अलग है. DDA के अनुसार, आबादी, भूमि उपयोग, परिवहन व्यवस्था से लेकर पर्यावरणीय जरूरतों के हिसाब से भविष्य के शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर जोन तय किये जाते हैं. यही वजह है कि किसी क्षेत्र को आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत ग्रीन एरिया के रूप में अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है.
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. किसी जोन का नाम यह तय नहीं करता कि वहां मकान वैध है या अवैध. असली फैसला उस जमीन के Land Use से होता है. यदि कोई जमीन ग्रीन बेल्ट, पार्क, वन क्षेत्र, यमुना बाढ़ क्षेत्र, सार्वजनिक उपयोग या किसी अन्य प्रतिबंधित श्रेणी में दर्ज है, तो वहां आवासीय निर्माण अवैध माना जा सकता है, भले ही आसपास बस्तियां मौजूद हों. DDA स्पष्ट करता है कि जोनल प्लान में ओ जोन में यमुना का क्षेत्र है, जिसमें मकान बनाने की अनुमति ही नहीं है, लेकिन कुछ कॉलोनीनाइजर लोगों को सस्ती जमीन के नाम पर लोगों को फंसा लेते हैं. वहीं लोग भी बिना जानकारी के ऐसी जगह पर घर बनाकर फंस जाते हैं.
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के मास्टर प्लान में O Zone का मतलब "River Yamuna का क्षेत्र है. यह पूरा क्षेत्र यमुना नदी और उसके आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों को शामिल करता है. इस जोन का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी के प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरणीय संतुलन और बाढ़ नियंत्रण को सुरक्षित रखना है. इसलिए यहां निर्माण गतिविधियों पर सामान्य आवासीय क्षेत्रों की तुलना में कहीं ज्यादा प्रतिबंध लगाये गये हैं. दिल्ली के कई हिस्से जैसे यमुना खादर क्षेत्र, नदी के किनारे बसे कुछ गांव और बाढ़ मैदान O Zone में आते हैं.
डीडीए के अनुसार, O Zone का बड़ा हिस्सा पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है. यहां जमीन का उपयोग मुख्य रूप से हरित क्षेत्र, खेती, जल संरक्षण और नदियों को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित किया गया है. यहां पर मकान बनाने की अनुमति नहीं है. इसे अवैध माना जाता है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब इन इलाकों में बिना जमीन का परिवर्तन (Land Use Change) या आवश्यक अनुमतियों के आवासीय कॉलोनियां विकसित होने लगती हैं.
दिल्ली में प्रॉपर्टी विवादों, सीलिंग कार्रवाई और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों के पीछे अक्सर जोनिंग और लैंड यूज नियमों की अनदेखी जिम्मेदार होती है. डीडीए अधिकारियों की मानें तो किसी भी प्लॉट या मकान में निवेश से पहले यह पता कर लेना चाहिए कि वह क्षेत्र मास्टर प्लान के अनुसार किस श्रेणी में आता है. इससे भविष्य में कानूनी विवाद, तोड़फोड़ कार्रवाई या नक्शा पास कराने की समस्या से बचा जा सकता है. दिल्ली का जोन सिस्टम सिर्फ सरकारी कागज नहीं है, बल्कि आपकी संपत्ति की वैधता, उसकी कीमत और भविष्य के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है.
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