डीएनए एक्सप्लेनर
देश की सीमाओं को अधिक सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए 'स्मार्ट बॉर्डर' पहल पर तेजी से काम हो रहा है, जानें सीमा सुरक्षा को लेकर कैसे बदल रही भारत की स्ट्रैटजी और इससे कैसे हमारा देश दुनिया के सबसे आधुनिक बॉर्डर वाले देशों की लिस्ट में शामिल होगा...
भारत सरकार देश की सीमाओं को अधिक सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए 'स्मार्ट बॉर्डर' पहल पर तेजी से काम कर रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक चार स्तरीय एकीकृत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जा रहा है. इस व्यवस्था में सीमा सुरक्षा बल (BSF), संबंधित राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियां और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. सरकार का लक्ष्य सिर्फ सीमा पर चौकियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और एजेंसियों के बेहतर समन्वय के जरिए किसी भी सुरक्षा चुनौती का समय रहते पता लगाकर उसका मुंहतोड़ जवाब देना है.
गृह मंत्रालय का कहना है कि स्मार्ट बॉर्डर की परिकल्पना भारत की सीमा सुरक्षा प्रणाली को आने वाले साल में दुनिया की सबसे आधुनिक और तकनीक आधारित प्रणालियों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह पहल केंद्र सरकार की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है. इसके साथ ही नक्सलवाद, सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने पर भी खास जोर दिया जा रहा है.
गृह मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षित सीमाएं, विकसित सीमावर्ती इलाके और सतर्क स्थानीय समाज, राष्ट्रीय सुरक्षा के तीन अहम आधार हैं. सरकार का मानना है कि सीमावर्ती गांव सिर्फ देश की अंतिम बस्तियां नहीं, बल्कि भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति हैं. इसी सोच के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के माध्यम से सीमावर्ती गांवों के विकास पर विशेष जोर दिया है. इस योजना का मकसद सीमावर्ती इलाकों से पलायन रोकना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना है. इससे सीमाओं पर आबादी बनी रहेगी और देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.
गृह मंत्रालय का यह भी कहना है कि सरकार ने सीमा सुरक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण को रिएक्टिव से प्रो-एक्टिव बनाया है. पहले किसी घटना के बाद कार्रवाई पर ज्यादा जोर रहता था लेकिन अब तकनीक की मदद से संभावित खतरे को पहले ही भांपने और उसे रोकने की रणनीति अपनाई जा रही है. मंत्रालय के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या में होने वाले असामान्य बदलाव की जानकारी भी लोकल लेवल से लेकर सरकार के हायर लेवल तक तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जा रही है जिससे समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें.
केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ साल में सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, सुरंग, संचार नेटवर्क और दूसरे बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय तेजी आई है. गृह मंत्रालय का दावा है कि सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश और निर्माण कार्य में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे सुरक्षा बलों की तैनाती, रसद आपूर्ति और आपातकालीन प्रतिक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा तेज और प्रभावी हुई है.
स्मार्ट बॉर्डर पहल के तहत ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक रडार, थर्मल इमेजिंग कैमरे, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी, ग्राउंड सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. इन प्रणालियों का मकसद सीमा पर होने वाली हर गतिविधि की उसी समय में निगरानी करना, संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाना और सुरक्षा बलों को तत्काल कार्रवाई के लिए अलर्ट करना है. इस पहल से खासतौर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी संवेदनशील सीमाओं पर निगरानी क्षमता और प्रतिक्रिया समय में सुधार होने की उम्मीद है.
भारत में स्मार्ट बॉर्डर पहल की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि देश लगभग 15,106.7 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय भू-सीमा बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान जैसे सात देशों के साथ साझा करता है. इसके अलावा भारत की लंबी समुद्री सीमा भी है. इतनी विशाल और विविध भौगोलिक सीमा की निगरानी केवल मैनपॉवर के भरोसे संभव नहीं है. भारत की सीमाएं रेगिस्तान, ऊंचे हिमालयी ग्लेशियरों, बर्फ से ढकी चोटियों, घने जंगलों, दलदली इलाकों, नदियों और दुर्गम पर्वतीय इलाकों से होकर गुजरती हैं. इस तरह के इलाकों में हर समय बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती संभव नहीं होती इसलिए सेंसर, स्मार्ट फेंसिंग, कैमरे, ड्रोन और दूसरे आधुनिक तकनीकों के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी रखना ज्यादा प्रभावी और किफायती समाधान है.
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