डीएनए एक्सप्लेनर
लद्दाख में आर्टिकल 371 को लागू करने और स्थानीय अधिकारों को मजबूत करने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है.
Article 371 Ladakh: लद्दाख को लेकर इन दिनों सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है. खबर है कि लद्दाख प्रशासन ने वहां के लोगों की सहूलियत और विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब लद्दाख के सभी सातों जिलों को 'लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद' (LAHDC) का फायदा मिलेगा. इसके लिए नए बने जिलों में भी हिल डेवलपमेंट काउंसिल का गठन किया जाएगा. लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने मंगलवार (14 जुलाई 2026) को साफ किया है कि इस कानून के तहत हर जिले में काउंसिल बनाने का नियम पहले से ही है, बस इसमें थोड़े बहुत बदलाव की जरूरत होगी.
सरकार का मानना है कि इस फैसले से लद्दाख के गांवों तक विकास पहुंचेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए मौके मिलेंगे. इस पूरी हलचल के बीच दो बातें सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही हैं- पहला, हिल काउंसिल का दायरा बढ़ाना और दूसरा, आर्टिकल 371 को लेकर होने वाली चर्चा. जानिए पूरा मामला क्या है और इससे लद्दाख में क्या बदलने वाला है.
आर्टिकल 370 के बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन हमारे संविधान में एक और जरूरी धारा है- आर्टिकल 371. यह धारा देश के कुछ खास राज्यों या इलाकों को उनकी संस्कृति, जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए 'विशेष दर्जा' या सुरक्षा देती है. हमारा संविधान यह मानता है कि भारत में कई ऐसे इलाके हैं जहां की भौगोलिक स्थिति कठिन है, या वहां की संस्कृति और तौर-तरीके बिल्कुल अलग हैं. ऐसे में उन इलाकों के विकास और पहचान को बचाए रखने के लिए विशेष नियमों की जरूरत होती है. संविधान के भाग 21 में आर्टिकल 371A से लेकर 371J तक कई प्रावधान हैं, जो नागालैंड, मिजोरम और असम जैसे राज्यों को विशेष अधिकार देते हैं.
लद्दाख के लोग लंबे समय से अपनी जमीन, नौकरी और अनूठी संस्कृति को बचाने के लिए विशेष दर्जे की मांग कर रहे हैं. अगर लद्दाख में आर्टिकल 371 के तहत सुरक्षा उपाय लागू होते हैं, तो वहां कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.
लद्दाख एक पहाड़ी और बेहद कठिन रास्तों वाला इलाका है. यहां दिल्ली या बड़े शहरों में बैठकर नीतियां बनाना मुश्किल है. इसीलिए 1995 में लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) कानून बनाया गया था, ताकि स्थानीय लोग खुद तय कर सकें कि उनके इलाके का विकास कैसे होगा. पहले यह काउंसिल सिर्फ लेह और कारगिल तक सीमित थी. लेकिन पिछले साल सरकार ने लद्दाख में पांच नए जिले (शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास) बनाने का एलान किया था. अब इन सभी सातों जिलों में हिल काउंसिल काम करेगी.
कुल मिलाकर, लद्दाख में इस समय लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण यानी सत्ता को सीधे जनता के हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है. आने वाले समय में केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत में आर्टिकल 371 के सुरक्षा घेरे और लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे को लेकर अंतिम फैसला होगा. अगर यह मांगें पूरी होती हैं, तो लद्दाख के इतिहास में यह एक नया और बेहद अहम अध्याय होगा.
ये भी पढ़ें- संत रविदास एक्सप्रेस 17 जुलाई से होगी शुरू, कब चलेगी, कहां-कहां रुकेगी? जानें पूरा रूट और शेड्यूल