डीएनए एक्सप्लेनर
यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी सीएम योगी के सहारे तीसरी बार सत्ता में आने की योजना बना रही है, लेकिन आगामी चुनाव में बीजेपी और सीएम योगी को कई चुनौतियों का भी सामना करना होगा.
यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई हैं. सपा, बसपा और कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक अपनी चुनावी जमीन तैयार करने में जुटे हैं. बीजेपी फिर से सरकार बनाने की पूरी तैयारी में है और चुनावी माहौल को अपने पक्ष में बनाए रखने की कवायद तेज कर दी है. सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी खूब चर्चा रहे हैं. आगामी चुनाव में बीजेपी सीएम योगी के सहारे की जीत हासिल करने की तैयारी कर रही है.
दो बार से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता BJP के लिए अब भी बड़ी ताकत मानी जा रही है. पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि कानून-व्यवस्था और महिला वोटरों के बीच सरकार की पकड़ के सहारे 2027 में सत्ता बरकरार रखी जा सकती है. इसके बावजूद संगठन के स्तर पर मतभेद और अलग-अलग सामाजिक समूहों की नाराजगी BJP के लिए चुनौती बन रही है.
युवाओं और रोजगार के मुद्दे को लेकर योगी सरकार ने हाल के महीनों में कई कदम उठाए हैं. इसी महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने 'उत्तर प्रदेश कॉर्पोरेशन फॉर आउटसोर्सिंग सर्विसेज' (UPCOS) की शुरुआत की. इसका उद्देश्य प्रदेश में काम कर रहे करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा करना और उन्हें विभिन्न सरकारी लाभों से जोड़ना है.
इससे पहले सीएम योगी ने 6 महीने के भीतर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटने का लक्ष्य घोषित किया था. सीएम आदित्यनाथ के मुताबिक, उनकी सरकार ने साढ़े नौ साल के कार्यकाल में अब तक 9.3 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है.
सरकार ने पुलिस और शिक्षक भर्ती के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ाने के लिए 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' चलाया जा रहा है. छात्रों को कॉरपोरेट और तकनीकी संस्थानों में स्टाइपेंड वाली इंटर्नशिप देने की पहल भी की गई है.
सरकार की ओर से सेंट्रलाइज्ड फैमिली कार्ड की व्यवस्था भी शुरू की गई है. इसके जरिए ऐसे परिवारों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जिनके किसी भी सदस्य के पास सरकारी या निजी क्षेत्र में नौकरी नहीं है.
जातीय राजनीति भी BJP के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है. इंडियन एक्सप्रेस ने यूपी बीजेपी के एक बड़े नेता के हवाले से कहा कि कुछ OBC समूहों में यह धारणा दोबारा मजबूत हो रही है कि BJP ऊंची जातियों के पक्ष में झुकी हुई पार्टी है. अधिकारियों के बीच जाति के आधार पर बने WhatsApp ग्रुप भी इस तरह की धारणाओं को बढ़ावा दे रहे हैं.
पार्टी के सामने सिर्फ OBC नाराजगी ही चुनौती नहीं है. BJP के भीतर ऊंची जातियों के बीच भी गुटबाजी की चर्चा है. पार्टी के कुछ नेताओं के मुताबिक, ठाकुर और ब्राह्मण जातियों के बीच बढ़ती दूरी और दोनों समुदायों से जुड़े नेताओं के बीच मतभेद भी संगठन के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं.
ऐसे में BJP के लिए 2027 का चुनाव सिर्फ सरकार के कामकाज का जनादेश नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग जातियों के बीच संतुलन बनाए रखने की भी बड़ी परीक्षा होगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार BJP के सामने एक और अहम चुनौती युवाओं की रोजगार संबंधी धारणा है. पार्टी के एक नेता के मुताबिक, समस्या सिर्फ बेरोजगारी की नहीं है, बल्कि 'अंडर-एम्प्लॉयमेंट' भी युवाओं में असंतोष बढ़ा रहा है.
यानी बड़ी डिग्री और योग्यता हासिल करने के बाद भी युवाओं को ऐसी नौकरियां करनी पड़ रही हैं, जिनमें उनकी योग्यता और कौशल का पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा. इससे सरकारी आंकड़ों में रोजगार बढ़ने के बावजूद युवाओं के एक वर्ग में यह भावना बनी हुई है कि उनकी क्षमता के मुताबिक उन्हें अवसर नहीं मिल रहा है.
UGC के इक्विटी नियमों को लेकर भी BJP के सामने एक अलग तरह की चुनौती पैदा हो गई है. इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना था. इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी थी.
इन नियमों को लेकर ऊंची जातियों के एक वर्ग में भी नाराजगी देखने को मिली थी. ऐसे में BJP के सामने एक साथ अलग-अलग जातियों की अपेक्षाओं को संतुलित करने की बड़ी चुनौती है.
इन चुनौतियों के बावजूद BJP नेताओं का मानना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के पास कुछ मजबूत राजनीतिक आधार हैं. इनमें सबसे प्रमुख प्रदेश कानून-व्यवस्था का मुद्दा है. BJP लगातार योगी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में सुधार को अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है और चुनाव में भी इसे बड़ा मुद्दा बनाएगी. वहीं महिला वोटरों को भी पार्टी महत्वपूर्ण आधार मान रही है.
2027 का यूपी चुनाव सिर्फ BJP बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं होगा. मुकाबला रोजगार, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के साथ-साथ जातीय समीकरणों, महिला वोटरों, युवाओं और विपक्षी गठबंधन के बीच तालमेल पर भी टिका होगा. BJP के सामने योगी की लोकप्रियता को सामाजिक समीकरणों के साथ जोड़कर सत्ता विरोधी भावनाओं को रोकने की चुनौती है.
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