डीएनए एक्सप्लेनर
समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने अलग-अलग संगठनों की भूमिका तय करने की योजना बना रही है. वहीं पार्टी ने अपने छात्र संगठन के लिए नीले ड्रेस कोड का भी ऐलान किया है. आइए जानते हैं कि सपा नीला ड्रेस कोड क्यों लागू कर रही है.
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रदेश में चुनावी सरगर्मी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी अपने ड्रेस कोड में बदलाव करने जा रही है. वह लाल से नील रंग पर आ रही है. सपा अपने छात्र संगठन समाजवादी पार्टी छात्र सभा के लिए नीले रंग का ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी कर रही है वहीं सपा ने Gen Z को लेकर भी खास प्लान तैयार किया है. आइए जानते हैं कि समाजवादी पार्टी लाल रंग से नीले रंग में क्यों आ रही है?
यूपी की राजनीति में नीला रंग दशकों से दलित और अंबेडकरवादी राजनीति की पहचान बना है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) जैसी दलित-केंद्रित पार्टियां नीले रंग को अपने राजनीतिक पहचान का हिस्सा बना चुकी हैं.
अब समाजवादी पार्टी (SP) लाल रंग से नीले रंग पर आ रही है. वह इस रंग के जरिए युवाओं और खासकर दलित वर्ग के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की तैयारी में है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं.
पार्टी के इस कदम को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उसके PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक एजेंडे को युवाओं के बीच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
सपा का यह कदम केवल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पार्टी अपने विभिन्न युवा संगठनों की अलग-अलग पहचान और भूमिका तय करने पर भी काम कर रही है. इनमें समाजवादी पार्टी युवजन सभा, लोहिया वाहिनी, अंबेडकर वाहिनी और छात्र सभा शामिल है.
पार्टी के कई युवा संगठन हैं और ऐसे में प्रत्येक संगठन की भूमिका और पहचान को स्पष्ट करने की योजना बनाई जा रही है. नया ड्रेस कोड इसी कवायद का एक हिस्सा है.
सपा अब Gen Z और Gen Alpha से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव आज Gen Z और Gen Alpha के युवाओं के लिए पार्टी की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी दे सकते हैं. विधानसभा चुनाव में Gen Z को ध्यान में रखते हुए सपा अपनी तैयारी कर रही है.
सपा के संभावित ब्लू ड्रेस कोड को लेकर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी ने इसे दलित वोटरों को साधने की कोशिश बताया. भाजपा ने इस पर सपा के दलित मुद्दों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री आजम खान की बीआर आंबेडकर को लेकर की गई पुरानी टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि केवल रंग बदलने से पुराने आरोपों के दाग नहीं मिटेंगे. सपा कपड़ों का रंग बदलकर दलित मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
सपा ने हाल के दिनों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभियान तेज किया है. पार्टी राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति को मुद्दा बना रही है और कई जगह PDA पाठशाला आयोजित करने की भी बात सामने आई है.
पार्टी ने करीब 26 हजार प्राथमिक विद्यालयों के बंद होने के मुद्दे को भी उठाया है. ऐसे में माना जा रहा है कि सपा शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े सवालों को आगामी चुनावी में प्रमुखता से उठाएगी.
अखिलेश यादव की लखनऊ में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रंका से मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई थीं. यह मुलाकात दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा के मुद्दे को लेकर CJP के समर्थन वाले प्रदर्शन को सपा की ओर से समर्थन दिए जाने के कुछ दिनों बाद हुई थी.
इसके बावजूद शिक्षा और सरकारी स्कूलों के मुद्दे पर दोनों संगठनों के अभियानों में समानता को लेकर चर्चा जरूर हुई. सपा नेताओं का कहना है कि छात्र सभा के लिए नीला ड्रेस कोड मुख्य रूप से पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और अपने युवा संगठनों को अलग पहचान देने की रणनीति का हिस्सा है.
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की यह कवायद इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी PDA समीकरण के साथ-साथ युवा मतदाताओं, खासकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है.